नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। इस बीच उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने अपने एक इंटरव्यू में कहा है कि ईरान का मूल्यांकन सिर्फ उसकी बातों से नहीं बल्कि काम से होगा। यह समझौता सिर्फ कागजी बातों के लिए नहीं है। यह पूरी तरह ईरान के भविष्य के व्यवहार पर टिका है। अमेरिका अब ईरान की गतिविधि पर पैनी नजर रखेगा
ईरान में निर्दोष प्रदर्शनकारियों की हत्या से परेशान थे ट्रंप
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप और पूरा प्रशासन ईरान में निर्दोष प्रदर्शनकारियों की हत्या से बहुत परेशान था। पहले जो लोग सत्ता में थे उन्होंने प्रदर्शनकारियों के साथ बहुत बुरा व्यवहार किया था। उन्होंने कहा कि पुराने नेता अब ईरान की सत्ता से जा चुके हैं। ऐसे में अब अमेरिका यह देखना चाहता है कि क्या ईरान का नया नेतृत्व अपने लोगों के साथ अलग तरह से व्यवहार करता है? उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान पर नजर रखेगा।
ट्रंप ने फ्रांस के वर्साय महल में किए शांति समझौते पर हस्ताक्षर
अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम बढ़ाने के समझौते पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। यह शांति समझौता अब लागू हो गया है। इसके तहत रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज स्ट्रेट फिर से खोला जाएगा। ट्रंप ने फ्रांस के एवियन-ले-बैंस में जी-7 शिखर सम्मेलन में शामिल होने के दौरान इस पर साइन किए। 14 बिंदुओं वाले अमेरिका और ईरान शांति समझौते को मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) कहा गया है। इस समझौते के तहत अब ईरान कभी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा।
इस समझौते के तहत ईरान को अपने संवर्धित यूरेनियम के भंडार को अंतरराष्ट्रीय निगरानी में कम करना होगा। हालांकि अमेरिका के भीतर ही इस शांति समझौते के सौदे का विरोध शुरू हो गया है। रिपब्लिकन नेताओं और इजरायल समर्थकों ने इस पर सवाल उठाए हैं। इस समझौते में हर मोर्चे पर सैन्य अभियान तुरंत और स्थायी रूप से खत्म करने की घोषणा की गई है। जिसमें लेबनान भी शामिल है। हालांकि इजरायल ने इस शांति समझौते पर अपना अलग रुख रखा है और हिज्जबुल्लाह पर हमले जारी रखने की बात कही है। इजरायल का साफ कहना है कि वो अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखेगा।
















