बिहार

भारत में टारगेट किलिंग की बड़ी साजिश, बिहार के मदरसा टीचर को मिला था ये टास्क

हाल ही में जांच एजेंसियों ने एक ऐसे नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जो देश के युवाओं को गुमराह कर उन्हें देश-विरोधी गतिविधियों में शामिल करने की कोशिश कर रहा था।

Published by
Mahak Singh

हाल ही में जांच एजेंसियों ने एक ऐसे नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जो देश के युवाओं को गुमराह कर उन्हें देश-विरोधी गतिविधियों में शामिल करने की कोशिश कर रहा था। इस मामले ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि जांच में युवकों को नेपाल के रास्ते पाकिस्तान भेजने की साजिश का पता चला है।

पाकिस्तानी नेटवर्क के लिए युवाओं की भर्ती और नेपाल के रास्ते भेजने की साजिश का खुलासा

खुफिया जानकारी के आधार पर बिहार के मधुबनी जिले से इजहारुल हक नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया। जांच में सामने आया कि उसे पाकिस्तान में बैठे कुछ संचालकों ने युवाओं के पासपोर्ट बनवाने और उन्हें नेपाल में मौजूद एजेंटों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दी थी। वहां से इन युवकों को पाकिस्तान भेजने की योजना बनाई जा रही थी। बताया जा रहा है कि इजहारुल बिहार के कई जिलों में युवाओं को इस नेटवर्क से जोड़ने का काम कर रहा था। इस मामले में उत्तर प्रदेश के देवबंद निवासी नईम अब्दुल्ला और मध्य प्रदेश के भोपाल निवासी फराज उर्फ खालिद सैफुल्ला को भी गिरफ्तार किया गया है। आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने तकनीकी निगरानी और खुफिया सूचनाओं के आधार पर इन तीनों को पकड़ा। जांच एजेंसियों के अनुसार, इन लोगों को पाकिस्तान में बैठे हैंडलरों द्वारा अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं। पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि इस नेटवर्क का मुख्य उद्देश्य युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा की ओर आकर्षित करना और उन्हें देश-विरोधी गतिविधियों के लिए तैयार करना था।

कुछ युवकों का इस्तेमाल टारगेट किलिंग जैसी गंभीर घटनाओं में करने की योजना भी बनाई जा रही थी। फराज ने पूछताछ में बताया कि संभावित निशानों की तस्वीरें व्हाट्सएप के माध्यम से भेजी जानी थीं। जांच में यह भी पता चला है कि युवाओं को प्रभावित करने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा था। गूगल मीट जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कथित रूप से भारत-विरोधी संदेश दिए जाते थे। साथ ही विभिन्न भाषणों और संदेशों के माध्यम से युवाओं को भड़काने का प्रयास किया जाता था। आरोपियों के मोबाइल फोन से कई आपत्तिजनक ऑडियो और वीडियो भी बरामद हुए हैं। इनमें जिहादी विचारधारा से जुड़ी सामग्री शामिल बताई जा रही है। फिलहाल सभी डिजिटल साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच की जा रही है, ताकि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर उन तक पहुंचा जा सके।

Share

Recent News