क्या है “रेप ऑफ ब्रिटेन?” और क्यों एलन मस्क ने कहा “जेल भेजे जाएं इसे अनदेखा करने वाले नेता?”
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क्या है “रेप ऑफ ब्रिटेन?” और क्यों एलन मस्क ने कहा “जेल भेजे जाएं इसे अनदेखा करने वाले नेता?”

ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग्स का भयावह सच सामने आया। रूपर्ट लो रिपोर्ट में पुलिस, सोशल सर्विसेस और सरकार की सांठगांठ का खुलासा। पढ़ें पीड़ित लड़कियों की अनसुनी दर्द भरी कहानियाँ और संस्थागत नाकामी का पूरा विवरण।

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा — edited by कुलदीप सिंह
Jun 18, 2026, 11:28 am IST
inविश्व
प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

ग्रूमिंग गैंग का मामला ब्रिटेन में दबने का नाम नहीं ले रहा है। या कहें कि ब्रिटेन के राष्ट्रवादी नेता इसे अब दबने नहीं दे रहे हैं। ब्रिटेन के वे नेता, जो ब्रिटेन की ईसाई पहचान को लेकर सजग हैं, वे अब अपनी उन लड़कियों के साथ आकर खड़े हो गए हैं, जिनकी आवाज और दर्द दबाने की कोशिश न जाने कब से लेबर के नेता करते आ रहे थे।

ये ऐसे दर्द थे, जिन्हें पुलिस ने दर्ज करना उचित ही नहीं समझा और ये ऐसे दर्द थे, जिन्हें अस्पतालों से यूँही भेज दिया गया। न ही उनका इलाज किया गया, न ही दवा दी गई और न ही यह पूछा ही गया कि आखिर इन बच्चियों को हुआ क्या है?

पीड़ितों की पीड़ा पर सियासत

अब दशकों के संस्थागत शोषण और उत्पीड़न के बाद जब लड़कियों ने बोलना शुरू किया, तो उन्हें नेताओं ने ही अविश्वनीय ठहरा दिया, क्योंकि पुलिस में तो ऐसा कोई रिकार्ड था ही नहीं। परंतु पीड़ाओं का अपना ही एक रिकार्ड होता है। उसे नेता या अधिकारी दबा नहीं सकते, उसे नेता अनदेखा नही कर सकते हैं। ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग को लेकर सांसद रूपर्ट लो ने जो चौंकाने वाली रिपोर्ट प्रस्तुत की है, उसने इस संस्थागत शोषण की सारी कलई खोलकर रख दी है।

इस रिपोर्ट में जहां पीडिताओं की कहानियाँ हैं, तो वहीं पुलिस और प्रशासन की वे ढीलें भी हैं, जिन्होनें इस अपराध को संस्थागत अपराध बनने दिया। इस रिपोर्ट में स्पष्ट है कि ज़्यादातर गवाहों के बयानों से मिले सबूत बताते हैं कि इंग्लैंड और स्कॉटलैंड में पुलिस फ़ोर्स को बच्चों की सुनियोजित ग्रूमिंग और रेप के बारे में पता था, फिर भी वे पीड़ितों को बचाने, अपराधियों की जाँच करने या पूरी तरह से प्राप्त खुफिया रिपोर्ट पर कार्रवाई करने में बार-बार नाकाम रहे। अफ़सरों ने रिपोर्टिंग को हतोत्साहित किया, पीड़ितों को अपराधी बनाया, सबूत नष्ट कर दिए या नज़रअंदाज़ कर दिए, और अपराधियों को आज़ाद घूमने दिया। इस बात के भी परेशान करने वाले सबूत हैं कि सेवारत पुलिस अफ़सर रेप गैंग के एसक्रिय सदस्य थे, जबकि दूसरे लोग रेप गैंग को बचाने के लिए अपनी हदें पार कर गए। यह कोई अकेली गलती नहीं थी। यह कई फ़ोर्स में सिस्टमैटिक थी और दशकों तक चली।

इस रिपोर्ट ने सभी को स्तब्ध कर के रख दिया है। और लोग प्रश्न उठा रहे हैं कि आखिर नेता और प्रशासन किसके लिए है, अपराधियों के लिए या फिर आम जनता के लिए? अगर आम जनता के लिए है तो दशकों तक इन लड़कियों के साथ ऐसा क्यों होता रहा?

ग्रूमिंग जिहाद को अनदेखा करने वालों को भेजो जेल

इसी बात को लेकर एलन मस्क ने कहा है कि इसमें शामिल या इसे अनदेखा करने वाले सभी नेताओं को जेल भेजना चाहिए।

मगर क्या केवल जेल भेजने से उन लड़कियों की पीड़ाओं को मुक्ति मिलेगी? क्या इन लड़कियों की पीड़ा कम हो पाएगी? जिन लड़कियों को सोशल सर्विसेस ने भी केवल सेक्स से संबंधित दवाइयों तक ही सीमित कर दिया? एक पीडिता पहले अपने सौतेले पिता से पीड़ित होती रही और उसके बाद वह इस गैंग का शिकार हो गई। 13 वर्ष की उम्र तक उसके शरीर में तमाम सेक्शुअल बीमारियाँ पैदा हो चुकी थीं, मगर न ही अस्पतालों से उसे मदद मिली और न ही पुलिस से। जब वह 14 वर्ष की थी, तब एक सामाजिक कार्यकर्ता ने उससे संपर्क किया और फिर उसे लगा कि शायद उसकी बात सुनी जाएगी। मगर 13 साल से लेकर 19 साल के होने तक उसकी पीड़ा अथाह रही। उसने उस मुसलमान गैंग से निकलने के लिए बहुत हाथ पैर मारे, मगर उन लोगों ने उसे छोड़ा नहीं। यहाँ तक कि छोटे बच्चों से भी उसका बलात्कार करवाया।

अंत में उसने अपने होम टाउन से ही बाहर निकलना उचित समझा और स्कॉटलैंड चली गई। उस पीड़िता ने कहा कि वह अपने इलाके की कम से कम 20 ऐसी लड़कियों को जानती है, जो उससे पहले इन मुसलमानों के गैंग का शिकार हुई थीं। पैटर्न वही था। ग्रूम करना, ड्रग्स देना, तस्करी और शोषण और बलात्कार! और इससे भी बढ़कर उन्हें मस्जिदों में ले जाना और गैर मुसलमानों को काफिर घोषित करना और साथ ही यह भी सलाह देना कि जो गोरी लड़कियां छोटे कपड़े पहनती हैं, उनके साथ कुछ भी किया जा सकता है।

पुलिस से पता होने के बाद भी बंद कर रखी आंखें

इस पीड़िता का मानना है कि स्थानीय पुलिस, सोशल सर्विस, एनएचएस और सरकार सभी को पूरी तरह पता था कि क्या हो रहा है, और उन्हें यह भी पता था कि यह अपराध किस मजहब के लोग कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने दो वजहों से दखल नहीं दिया: क्योंकि वे “पेपरवर्क से परेशान नहीं होना चाहते थे,” और क्योंकि “वे नस्लवादी नहीं दिखना चाहते थे।” यह पीड़िता अपने साथ हुए गलत व्यवहार के लिए इन संस्थाओं और उनके “डायवर्सिटी के लिए दबाव” को दोषी ठहराती है। इस पीड़िता का कहना है कि “अगर मैं सिर्फ़ एक और बच्चे, लड़की या लड़के को भी, इन सबसे गुज़रने से बचा सकती हूँ, तो मैंने अपना काम कर दिया है।”

ऐसी ही तमाम पीड़िताओं की कहानी इस रिपोर्ट में है, जिसमें यह स्पष्ट है कि कानून बनाने वाले लोगों और संस्थाओं को पूरी तरह से पता था कि आखिर यह अपराध कौन कर रहे हैं, किस मूल के लोग हैं और किस मजहब के हैं, मगर फिर भी कार्यवाही नहीं की गई। लड़कियों के साथ बलात्कार ही नहीं होने दिया, बल्कि उनके साथ उनसे कम उम्र के बच्चों ने भी बलात्कार किया। उन्हें काफिर कहा गया और गोरी लड़कियों को फ्री का माल टाइप घोषित किया गया?

इस पीड़ा की क्या कोई कल्पना कर सकता है कि लड़कियों को उनकी धार्मिक पहचान के चलते अपमानित ही नहीं किया जाएगा, बल्कि उनका बलात्कार भी इसी आधार पर किया जाएगा और उनकी धार्मिक पहचान वाले पुरुष ही उनका साथ अपने वोटबैंक के मुनाफे को ध्यान में रखते हुए नहीं देंगे!

क्या इस महापाप को किसी गिरफ़्तारी से दूर किया जा सकता है?

 

Topics: रेप ऑफ ब्रिटेनब्रिटेन ग्रूमिंग स्कैंडलमुस्लिम ग्रूमिंग गैंगUK में ग्रूमिंग गैंगरूपर्ट लोव रिपोर्ट
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