आज विश्व कृत्रिम बुद्धिमत्ता की दौड़ में विभाजित है, अमेरिका कृत्रिम बुद्धिमत्ता की तकनीक अमेरिका से बाहर नहीं जाने देना चाहता। अमेरिका और चीन तकनीकी प्रभुत्व के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। यूरोप अपनी रणनीतिक स्वायत्तता की तलाश में है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएँ पुनर्गठित हो रही हैं। जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा और साइबर युद्ध नई चुनौतियाँ बन चुके हैं। ऐसे समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र जी की फ्रांस एवं स्लोवाकिया की यात्रा मायने रखती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूरोप यात्रा भारत की नई वैश्विक कूटनीति का महत्वपूर्ण अध्याय रही। 14 जून को नीस में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ शिखर वार्ता और भारत इनोवेट्स 2026 का उद्घाटन हुआ, जहाँ कृत्रिम बुद्धिमत्ता, नवाचार, रक्षा, अंतरिक्ष और व्यापार पर महत्वपूर्ण समझौते हुए। 14 से 16 जून तक स्लोवाकिया की ऐतिहासिक यात्रा में संबंधों को व्यापक साझेदारी का स्वरूप मिला। 16-17 जून को एवियाँ में जी-7 शिखर सम्मेलन में भारत ने वैश्विक दक्षिण की आवाज़ बुलंद की। 18 जून को पेरिस के विवाटेक 2026 में भारत को एआई कंट्री पार्टनर के रूप में वैश्विक मान्यता मिली।
भारत-फ्रांस संबंधों की ऐतिहासिक यात्रा
भारत और फ्रांस का संबंध लगभग चार शताब्दियों का है, आजादी के पश्चात फ्रांसीसी उपनिवेशों का भारत में विलय हुआ और शीत युद्ध के दौरान भारत एवं फ्रांस के संबंध अच्छे बने रहे। 1998 पोखरण परमाणु परीक्षण के बाद जहां अमेरिका जापान ने भारत पर प्रतिबंध लगाया, वहीं फ्रांस में संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की बात की। फ्रांस लगातार भारत की सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यता का सहयोग करता रहा है, न्यूक्लियर सप्लाई ग्रुप (NSG) की सदस्य्ता का समर्थन किया है। वैश्विक संस्थानों में अधिक प्रतिनिधित्व का समर्थन करता रहा है। रक्षा संबंध में देखें तो 1990 के दशक में मिराज – 2000 ख़रीदे उसके पश्चात् 36 राफेल लड़ाकू विमान का सौदा किया, अब भारतीय नौसेना की राफेल-एम की दिशा में भी सहयोग हो रहा है। स्कॉर्पियन पनडुब्बी एवं संयुक्त सैनिक अभ्यास वरुण गरुण शक्ति रक्षा क्षेत्र के सम्बन्धो में शामिल है। 2025 -26 में भारत एवं फ्रांस के मध्य व्यापर 16 अरब डालर तक पहुंच गया है।
भारत-फ्रांस संबंध : नीस शिखर सम्मेलन से 2047 की साझी यात्रा तक
प्रधानमंत्री मोदी एवं राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रो के बीच व्यापक द्विपक्षी वार्ता हुई। नीस वार्ता 2026 भारत और फ्रांस के बीच विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी का प्रारंभ हुआ और दोनों देशों को भविष्य की तकनीक को ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था और वैश्विक नेतृत्व के साझा मंच पर ला कर खड़ा कर दिया है। इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता सेमीकंडक्टर क्वांटम कंप्यूटिंग जैव प्रौद्योगिकी दीप टेक स्टार्टअप अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी हरित ऊर्जा और डिजिटल विज्ञान की बात हुई है जो आने वाले समय में भारत की शक्ति को बढ़ाने के साथ-साथ विश्व की व्यवस्था को प्रभावित करेंगे। दोनों देशों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में स्थाई सहयोग के लिए संयुक्त कार्य समूह बनाने का निर्णय किया और आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्षेत्र पर अमेरिका चीन का प्रभाव है, तब भारत फ्रांस मिलकर ऐसा लोकतांत्रिक मॉडल विकसित करना चाहते हैं जो मानव अधिकार और पारदर्शिता पर आधारित हो।
भारत फ्रांस ने अगले 5 वर्षों में 16 अरब डॉलर के व्यापार को 32 अरब डॉलर करने का लक्ष्य रखा है इससे भारतीय निर्यात में वृद्धि होगी, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। भारत फ्रांस ने महत्वपूर्ण क्रिटीकल खनिज, रेयर अर्थ तत्व, सेमी कंडक्टर साइबर सुरक्षा ,ऊर्जा सुरक्षा पर भी बात की है जिससे भारतीय सेमीकंडक्टर उद्योग को मजबूती मिलेगी। राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान कानपुर में भारत फ्रांस सहयोग से एयरोनॉटिक्स उत्कृष्ट केंद्र स्थापित किया जाएगा जिससे भारतीय युवाओं को विशिष्ट प्रशिक्षण मिलेगा। एयरबस टाटा एवं एडवांस सिस्टम से H -125 हेलीकॉप्टर की असेंबली लाइन का भारत में विकास होगा, इससे भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगा और हेलीकॉप्टर निर्यात की संभावना होगी।
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अंतरिक्ष एजेंसियों के बीच सहयोग
भारत के इसरो और फ्रांस की सीएनईस के बीच सहयोग बढ़ेगा जिसका लाभ भारत के गगनयान, मानव अंतरिक्ष उड़ान ,भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन आदि को प्राप्त होगा। वर्तमान में स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा सुरक्षा के दृष्टिकोण से लघु मॉडल रिएक्टर (SMR) के लिए भारत एवं फ्रांस के बीच सहयोग हुआ है। फ्रांस में भारत की यूपीआई का विस्तार किया गया, पेरिस एवं नीस हवाई अड्डे पर अब भारत के डिजिटल भुगतान प्रणाली को स्वीकार किया गया है। यूरोप के सबसे बड़े स्टार्टअप केंद्र स्टेशन- F में भारतीय स्टार्टअप को स्थान मिलेगा, जिससे भारत के स्टार्टअप को वैश्विक मंच प्रदान होगा। आईसीएमआर एवं फ्रांस के हेल्थ डाटा हब में सहयोग स्थापित हुआ जिसमें कैंसर अनुसंधान, जिनोमिक्स, डिजिटल स्वास्थ्य और ए -आई आधारित चिकित्सा के बीच सहयोग की बात की गई है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, भारतीय विज्ञान संस्थान और फ्रांस के प्रमुख विश्वविद्यालय के बीच लगभग 19 समझौते हुए हैं जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, जलवायु विज्ञान और जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र से संबंधित है इससे भारतीय उच्च शिक्षा अनुसंधान को वैश्विक स्तर पर पहचान मिलने के साथ-साथ एक नई दिशा मिलेगी।
भारत और फ्रांस के बीच एक नई पहल हुई है जिसमे भारत की अटल टिंकरिंग लैब मॉडल फ्रांस जाएगा जिसमें रोबोटिक ए-आई , 3D प्रिंटिंग, डिजाइन थिंकिंग होगी और भारत पहली बार अपना नवाचार आधारित शिक्षण मॉडल यूरोप को निर्यात कर रहा है। इससे भारत की छवि कई स्तरों पर मजबूत होगी भारत अब विश्व को नवाचार तकनीकी समाधान प्रदान करने वाला राष्ट्र बन जाएगा दूसरा भारत ग्लोबल साउथ की आवाज बन उन्नत तकनीक के विकास में अग्रणी भूमिका निभाएगा , भारत फ्रांस की साझेदारी ने यह संकेत दिया कि भविष्य की विश्व व्यवस्था केवल अमेरिका चीन के इर्द-गिर्द नहीं घूमेगी, भारत भी उसमें निर्णायक शक्ति के रूप में आएगा और सबसे महत्वपूर्ण बात है कि भारत के डिजिटल सार्वजनिक संरचना, स्टार्टअप शक्ति, युवा प्रतिभा और वैज्ञानिक क्षमता को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली है। इसलिए यह वार्ता भविष्य की वैश्विक तकनीकी आर्थिक रणनीति व्यवस्था को आकार देने वाली होगी।
नीस में ही भारत इनोवेट्स 2026 का संयुक्त उद्घाटन दोनों ने किया। यह 120 से अधिक भारतीय नव प्रवर्तकों ने, लगभग 500 से अधिक वैश्विक निवेशकों ने एवं 15 से अधिक उच्च संस्थानों ने भाग लिया। प्रधानमंत्री मोदी ने घोषणा की भारत केवल वैश्विक साधनों को उपभोक्ता नहीं, अब समाधान प्रदान करने वाला राष्ट्र बन गया है और यही इस पूरी यात्रा का वैचारिक आधार था। फ्रांस के स्टार्टअप नवाचार तंत्र के साथ मोदी जी ने संवाद किया जिसमें स्टेशन-F में भारतीय स्टार्टअप की संख्या बढ़ाने,डीप टेक सहयोग एवं वेंचर कैपिटल नेटवर्क स्थापित करने में सहमति बनी।
स्लोवाकिया यात्रा 2026- भारत की यूरोप नीति का नया अध्याय
1993 में चेकोस्लोवाकिया के विघटन के बाद स्लोवाकिया स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में उभर कर सामने आया और 1995 में भारत ने ब्रातिस्लावा में अपना दूतावास स्थापित किया, 1996 में राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा, 2025 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने यात्रा की और 1993 के बाद पहली बार 2026 में मोदी ने प्रधानमंत्री मोदी ने इन संबंधों को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया।
स्लोवाकिया क्यों महत्वपूर्ण है?
यह यूरोपीय यूनियन के सदस्य का है, यह मध्य यूरोप के औद्योगिक केन्द्रो में गिना जाता है प्रति व्यक्ति ऑटोमोबाइल उत्पादन विश्व के अग्रणी देश में एक है, यूरोप की आपूर्ति श्रंखला का महत्वपूर्ण भाग है। भारत इसे यूरोप के औद्योगिक और आर्थिक तंत्र तक पहुंच के द्वार के रूप में देख रहा है।
भारत-स्लोवाकिया-व्यापक साझेदारी
प्रधानमंत्री मोदी ने प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको से वार्ता की एवं राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी से मुलाकात की और व्यापारिक समुदाय से संवाद किया। भारत इन संबंधों को एक व्यापक साझेदारी के रूप में उन्नत करना चाहता है और भारत इसे रक्षा कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष, शिक्षा, स्वास्थ्य, ऑटोमोबाइल कौशल विकास आदि तक विस्तारित करना चाहता है। 2024 में पहली बार द्विपक्षी व्यापार द्वारा देश के बीच एक अब यूरो से अधिक हुआ 2025 में बढ़कर लगभग 1.6 अरब यूरो तक पहुंच गया है।
भारतीय निर्यात में हुई बढ़ोत्तरी
विशेष बात यह रही है कि भारतीय निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है, व्यापार संतुलन भारत के पक्ष में रहा है। आज स्लोवाकिया में टाटा मोटर्स, टाटा ऑटोकॉप, टाटा कंसल्टेंसी सी के बिरला ग्रुप, अमर राजा आदि कम्पनियाँ औद्योगिक सेतु के रूप में कार्य कर रही हैं वही स्लोवाकिया ने भी भारत यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते का समर्थन किया है। स्लोवाकिया भारत दोनों देशों ने हाई स्पीड रेल, स्मार्ट सिगनलिंग, सप्लाई चैन एकीकरण में सहयोग पर सहमति व्यक्ति की है। स्लोवाकिया को अक्सर यूरोप का डेट्रायट कहा जाता है, यहाँ फॉक्सवैगन, किया एवं जैगुआर जैसी कंपनियां है। भारत ने इलेक्ट्रिक वाहन ऑटो कंपोनेंट में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया है। स्लोवाकिया का पहला उपग्रह भारतीय पीएसएलवी राकेट द्वारा प्रक्षेपित किया गया था। स्लोवाकिया ने संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत की सुरक्षा परिषद में भारत की स्थाई सदस्य्ता का समर्थन किया है, आतंकवाद के विरुद्ध भारत का समर्थन किया है और पहलगाम हमले की निंदा की है। वही 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान स्लोवाकिया ने 1100 अधिक भारतीय छात्रों को सुरक्षित निकासी में ऑपरेशन गंगा के तहत मदद की है।
G7 शिखर सम्मेलन 2026 वैश्विक मंच पर भारत का उदय
फ्रांस के एवियाँ में जी-7 शिखर सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है, जब रूस यूक्रेन युद्ध तीसरे वर्ष प्रवेश कर चुका है, पश्चिम एशिया में संघर्ष वैश्विक चिंता का विषय है और होर्मुज जल डमरू तनाव से वैश्विक ऊर्जा पूर्ति प्रभावित हो रही है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता को लेकर अवसर खतरे दोनों हैं। ऐसे समय में भारत सहभागी के साथ साथ समाधान प्रस्तुत करने वाले राष्ट्र के रूप में सामने आया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है दुनिया संसाधनों की नहीं, विश्वास की कमी से जूझ रही है। मोदी जी ने कहा की नई वैश्विक साझेदारियों की नीव, विश्वास, समानता , साझी जिम्मेदारी और परस्परिक सम्मान पर आधारित होने चाहिए, यही दृष्टिकोण भारत की एक पृथ्वी एक परिवार एक भविष्य की अवधारणा का विस्तार है।
G7 में प्रधानमंत्री मोदी ने विकासशील देशों की चिताओं को प्रमुखता से उठाया और उन्होंने मांग की वैश्विक दक्षिण (Global South) को निर्णय प्रक्रिया में अधिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट कहा कि पश्चिम एशिया के संघर्षों का प्रभाव वैश्विक है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले समुद्री व्यापार में व्यवधान ने विश्व अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है और कई भारतीय नागरिकों ने भी अपने प्राण गंवाए हैं। उन्होंने कहा समुद्री मार्ग सुरक्षित रहने चाहिए और नाविकों को भयमुक्त वातावरण में अपना कार्य करने का अवसर मिलना चाहिए। भारतीय नाविक वैश्विक जहाजरानी क्षेत्र में कार्यरत G7 के आर्थिक सत्र में प्रधानमंत्री मोदी ने एक नई अवधारणा प्रस्तुत की इंपैक्ट (IMPACT) इंटरनेशनल मोबिलाइजेशन पार्टनरशिप फॉर एक्सीलरेटिंग कनेक्टिविटी एंड ट्रेड। प्रधानमंत्री सुझाव दिया कि G7 की पूंजी, भारत की प्रतिभा और ग्लोबल साउथ का स्वामित्व मिलकर विकासशील देशों के नए संपर्क, व्यापार व्यवस्था बना सकते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने अफ्रीका लैटिन अमेरिका और प्रशांत द्वीप को जोड़ने वाले नए आर्थिक संपर्क गलियारे का भी प्रस्ताव रखा है। G7 के दूसरे दिन कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल सुरक्षा, सोशल मीडिया से उत्पन्न चुनौती पर चर्चा करते हुए मोदी जी ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानव केंद्रित होना चाहिए, उसका लाभ सभी देशों तक पहुंचना चाहिए और उसको कुछ देशों के प्रभुत्व का साधन नहीं बनना चाहिए। G7 सम्मेलन का सबसे महत्वपूर्ण चर्चित द्विपक्षीय कार्यक्रम, प्रधानमंत्री मोदी एवं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात है, दोनों नेताओं ने भारत अमेरिका व्यापार समझौता। ऊर्जा सुरक्षा, ए-आई और उभरती प्रौद्योगिकी क्षेत्र की स्थिति पर चर्चा की है।
G-7 के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ज़ायेद से भी मुलाकात की। G7 के दौरान प्रधानमंत्री ने तीन महत्वपूर्ण तथ्य स्थापित की है, पहला भारत अब वैश्विक निर्णयों को प्रभावित करने वाली शक्ति है दूसरा भारत विकसित और विकासशील देशों के बीच सेतु की भूमिका निभा रहा, तीसरा कृत्रिम बुद्धिमत्ता, समुद्र सुरक्षा, आर्थिक संपर्क, जलवायु, वैश्विक दक्षिण जैसे विषय पर भारत वैकल्पिक दृष्टिकोण प्रस्तुत कर रहा है। G7 सम्मेलन 2026 ने स्पष्ट कर दिया है कि अब भारत विश्व राजनीति का निष्क्रिय दर्शन नहीं है, वह वैश्विक मंचो पर अपनी बात रखता है और दुनिया को नई दिशा देने का आत्मविश्वास भी रखता है।
VivaTech 2026 भारत की तकनीकी शक्ति का वैश्विक प्रदर्शन
फ्रांस यात्रा के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पेरिस में आयोजित 2026 सम्मेलन में भाग लेंगे, विवा टेक को यूरोप का सबसे बड़ा स्टार्टअप, नवाचार और प्रौद्योगिकी सम्मेलन माना जाता है, 2026 में भारत को पहली बार ए-आई कंट्री पार्टनर का दर्जा दिया गया है। आज भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है, ए-आई मिशन लागू करने वाले प्रमुख देशों में है ,दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल लोकतंत्र है और बहुभाषी ए -आई के लिए सबसे बड़ा डाटा आधार रखता है। यहां पर भारत मंडप बनाया गया है जिसमें भारतीय स्टार्टअप हैं, ए-आई कंपनियां, डीप-टेक उद्यमी, विश्वविद्यालय, अनुसंधान संस्थान अंतरिक्ष स्टार्टअप ने भाग लिया है। इस भागीदारी से भारत को वैश्विक निवेश, ए-आई नेतृत्व, भारतीय नवाचार का वैश्वीकरण, अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था और सबसे बड़ी बात ब्रांड इंडिया की छवि विकसित होगी।
चार शहर, एक दृष्टि : नीस, ब्रातिस्लावा, एवियाँ और पेरिस
यदि हम इस पूरी यात्रा को मानचित्र पर देखें तो चार शहर दिखाई देते हैं, लेकिन नागरिकता दृष्टि से यह एक ही यात्रा है। नीस में भारत ने फ्रांस के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अर्धचालक, अंतरिक्ष और नवाचार आधारित भविष्य की साझेदारी का खाका तैयार किया। ब्रातिस्लावा में भारत ने मध्य यूरोप के साथ अपने संबंधों को व्यापक भागीदारी तक पहुंचाकर यूरोप की नई आर्थिक भूगोल में प्रवेश किया। एवियाँ में G-7 मंच पर भारत ने वैश्विक दक्षिण के प्रतिनिधि और विश्वसनीय भागीदारों की भूमिका निभाई। पेरिस में विवा टेक (VivaTech) के माध्यम से भारत ने यह संदेश दिया कि अब भारत वैश्विक नवाचार का निर्माता भी है। यही कारण है कि इस पूरी यात्रा नवाचार कूटनीति , आर्थिक कूटनीति एवं सामरिक कूटनीति के संयुक्त प्रदर्शन के रूप में देखा जाना चाहिए।












