6 साल पुराने मामले में तृणमूल कांग्रेस के सांसद औऱ पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर बेंच ने उनके खिलाफ जारी अरेस्ट वारंट पर लगी रोक हटा दी है। अब मध्य प्रदेश पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती है। यह फैसला 18 जून 2026 को आया।
कोर्ट ने क्या कहा
जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की सिंगल बेंच ने अभिषेक बनर्जी की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने 12 नवंबर 2025 को दिए गए स्टे को भी हटा दिया। भोपाल की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने पहले यह अरेस्ट वारंट जारी किया था। कोर्ट का कहना था कि याचिकाकर्ता की तरफ से पहले चरण में भी कोई पेश नहीं हुआ। लगता है कि इस याचिका की कार्यवाही में उनकी कोई दिलचस्पी नहीं है। इसलिए स्टे हटाया जा रहा है। कोर्ट ने आदेश की कॉपी तुरंत ट्रायल कोर्ट को भेजने को भी कहा।
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मामला क्या है
यह पूरा मामला करीब 6 साल पुराना है। नवंबर 2020 में कोलकाता में एक चुनावी रैली के दौरान अभिषेक बनर्जी ने भाजपा नेता आकाश विजयवर्गीय के बारे में कथित तौर पर ‘गुंडा’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। आकाश विजयवर्गीय ने इसके खिलाफ मानहानि का केस भोपाल की एमपी-एमएलए विशेष अदालत में दायर किया। अदालत ने अभिषेक बनर्जी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया।
इसके बाद अभिषेक बनर्जी ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का रुख किया। उन्होंने अपनी याचिका में कहा कि वह लोकसभा सांसद हैं, इसलिए फरार होने की कोई आशंका नहीं है।
अब क्या हो सकता है
हाई कोर्ट के ताजा फैसले के बाद मध्य प्रदेश पुलिस पश्चिम बंगाल जाकर अभिषेक बनर्जी को गिरफ्तार कर सकती है। हालांकि, यह भी संभव है कि पुलिस का एक्शन आने से पहले वे सुप्रीम कोर्ट में राहत के लिए याचिका दाखिल करें।
पश्चिम बंगाल में भी नई परेशानी
इसी दिन पश्चिम बंगाल में भी अभिषेक बनर्जी के खिलाफ दो नई एफआईआर दर्ज की गई हैं। दक्षिण 24 परगना जिले में भाजपा नेता अभिजीत दास की शिकायत पर ये केस दर्ज हुए। गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से अभिषेक बनर्जी ईडी समेत कई जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद उनकी परेशानियां और बढ़ गई हैं।
















