यमुना घाटी के प्रवेश द्वार और टिहरी जिले की तहसील नैनबाग में मां यमुना नदी में जिस तरह कूड़ा-कचरा डाला जा रहा है, जो सीधे नदी के पानी में मिल रहा है वह न केवल पर्यावरण के लिए घातक है बल्कि हमारी आस्था और संस्कृति का भी अपमान है। यमुना मैया सदियों से इस क्षेत्र की जीवनदायिनी रही हैं। आज कुछ लोगों की लापरवाही और प्रशासनिक उदासीनता के कारण नदी में कूड़े के ढेर दिखाई दे रहे हैं।
यमुना प्रदूषण की गंभीर समस्या और अनदेखी
जिस यमुना नदी को हम मां का दर्जा देते हैं, उसी के आंचल को गंदगी से भरने में लोग संकोच नहीं कर रहे हैं। प्लास्टिक की बोतलें, पॉलिथीन, खाने-पीने की सामग्री के अवशेष और ना जाने पता नहीं क्या क्या अन्य कचरा यमुना नदी के पानी में मिल रहा है , यदि समय रहते इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाली पीढ़ियों को इसका गंभीर खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। स्थानीय लोगों ने इस बारे में संबंधित विभागीय अधिकारियों , शासन , प्रशासन को जगाने का काम किया गया लेकिन जूं तक नहीं रेंगी। कई बार व्यापार मण्डल व स्थानीय प्रतिनिधियों ने भी उच्च अधिकारियों को अवगत कराया कराया गया लेकिन वही ढांक के तीन पात! समस्या छोटी नहीं बहुत बड़ी है लेकिन जहां तक समाधान की बात है जिसे खोजने की जरूरत है।
स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों, पर्यटकों और सामाजिक संगठनों ने भी स्थानीय प्रशासन को चेताया है हालांकि प्रशासन के भरोसे इस समस्या का समाधान संभव नहीं है क्योंकि जमुना जी को प्रदूषित करने में किसी ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी है। जमुना जी यह सिर्फ नदी नहीं है हमारी आस्था का भी प्रतीक है जिसमें हमारे देव डोलियों को भी समय समय पर स्नान हेतु ले जाया जाता है साथ ही इस नदी का पानी लोग पीते भी है। मां यमुना की स्वच्छता और पवित्रता की रक्षा का संकल्प पिछले दिनों गृहमंत्री अमित शाह और दिल्ली सरकार ने लिया है जिसे अब उत्तराखंड सरकार को भी लिए जाने की जरूरत है । जिस जमुना नदी ने हमें जीवन दिया है, उसे स्वच्छ और निर्मल रखना स्थानीय लोगों के साथ साथ पर्यटकों का भी नैतिक और सामाजिक दायित्व है।
















