G-7 समिट के बीच ट्रंप ने सहयोगी देशों को भी एंथ्रोपिक के एडवांस AI मॉडल्स का एक्सेस देने से किया इनकार, जानिए मायने?
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G-7 समिट के बीच ट्रंप ने सहयोगी देशों को भी एंथ्रोपिक के एडवांस AI मॉडल्स का एक्सेस देने से किया इनकार, जानिए मायने?

फ्रांस के एवियन में चल रहे 52वें G7 शिखर सम्मेलन के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया और वैश्विक कूटनीति से जुड़ी एक बहुत बड़ी खबर आई है।

Written byजय प्रकाश गुप्ताजय प्रकाश गुप्ता — edited by Mahak Singh
Jun 17, 2026, 12:12 pm IST
in विश्व
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

फ्रांस के एवियन में चल रहे 52वें G7 शिखर सम्मेलन के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया और वैश्विक कूटनीति से जुड़ी एक बहुत बड़ी खबर आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए अपने सबसे करीबी सहयोगी देशों को भी अमेरिकी एआई कंपनी एंथ्रोपिक (Anthropic) के सबसे एडवांस और अत्याधुनिक एआई मॉडल्स का एक्सेस देने से साफ इनकार कर दिया है।

द वाशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने पिछले हफ्ते लगाए गए इन कड़े प्रतिबंधों को हटाने या इनमें किसी भी तरह की ढील देने से साफ मना कर दिया है। यहां तक कि ब्रिटेन (यूके) के प्रधानमंत्री की विशेष अपील को भी व्हाइट हाउस ने ठुकरा दिया है। क्या हैं अमेरिका के इस फैसले के मायने और क्या है एंथ्रोपिक और अमेरिका के बीच चल रहा विवाद? चलिए विस्तार से जानते हैं।

किसने की थी एक्सेस देने की अपील?

यह पूरा मामला तब गरमाया जब फ्रांस में जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर (Keir Starmer) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रशासन से एक विशेष ‘कार्व-आउट’ (प्रतिबंधों में विशेष छूट) की मांग की। ब्रिटिश प्रधानमंत्री चाहते थे कि ब्रिटेन के नागरिकों, वैज्ञानिकों और कंपनियों को एंथ्रोपिक कंपनी के सबसे आधुनिक और शक्तिशाली एआई मॉडल्स: माइथोस (Mythos)और फेबल (Fable) का इस्तेमाल करने की अनुमति दी जाए।

हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने ब्रिटेन की इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया। रिपोर्ट के अनुसार, व्हाइट हाउस के अधिकारियों का मानना है कि यदि वे जी-7 के किसी भी सहयोगी देश को इस प्रतिबंध से छूट देते हैं, तो यह पूरी तरह से अतार्किक होगा। अमेरिका का कहना है कि सुरक्षा के नियम सभी विदेशी संस्थाओं और नागरिकों पर समान रूप से लागू होते हैं फिर चाहे वे कितने ही अच्छे दोस्त क्यों न हों। फिलहाल व्हाइट हाउस के अधिकारी और एंथ्रोपिक के मैनेजमेंट के बीच इस बात को लेकर बातचीत चल रही है कि इन प्रतिबंधों के दायरे और तकनीकी बारीकियों को कैसे संभाला जाए।

यूएस ने क्यों लगा रखा है इस पर प्रतिबंध?

इस विवाद की शुरुआत पिछले सप्ताह शुक्रवार को हुई, जब अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने एंथ्रोपिक कंपनी पर ‘सर्विस एक्सपोर्ट बैन’ (सेवा निर्यात प्रतिबंध) लगा दिया। इस प्रतिबंध के तहत नए कड़े निर्यात नियंत्रण के नियम लागू किए गए हैं। ये इनपर रोक लगाते हैं:

  • अमेरिका की भौगोलिक सीमा से बाहर (यानी दुनिया के किसी भी अन्य देश में) इन एडवांस मॉडल्स के इस्तेमाल पर।
  • किसी भी विदेशी नागरिक द्वारा इन मॉडल्स के एक्सेस या उपयोग पर भले ही वह नागरिक इस समय अमेरिका के भीतर ही क्यों न मौजूद हो।
  • अमेरिका ने इस बैन के पीछे ‘राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कारणों’ का हवाला दिया है। सरकार का मानना है कि इतने शक्तिशाली एआई मॉडल्स का विदेशी हाथों में जाना अमेरिका की संप्रभुता और सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकता है।

क्यों शुरू हुआ एंथ्रोपिक और ट्रंप प्रशासन के  बीच विवाद?

एंथ्रोपिक और ट्रंप प्रशासन के बीच चल रही इस लड़ाई के शुरू होने के मुख्य रूप से दो बड़े कारण हैं, जिन्हें समझना बेहद जरूरी है।

  • अमेरिकी सरकार का दावा है कि एंथ्रोपिक के नए मॉडल्स ‘माइथोस’ और ‘फेबल’ में एक संभावित ‘जेलब्रेक’ (Jailbreak) का खतरा मौजूद है। बता दें एआई की भाषा में जेलब्रेक का मतलब होता है कि कोई यूजर चालाकी से एआई के सुरक्षा फिल्टर को तोड़कर उससे ऐसे काम करवा ले या ऐसी जानकारी उगलवा ले, जो प्रतिबंधित हैं।
  • अमेरिकी अधिकारियों को डर है कि इस सुरक्षा खामी का फायदा उठाकर विदेशी हैकर्स या दुश्मन देश (जैसे चीन या रूस) इस एआई मॉडल से दुनिया भर के महत्वपूर्ण सरकारी और सैन्य सॉफ्टवेयर्स की कमजोरियों का पता लगा सकते हैं। अगर एआई ने किसी संवेदनशील सॉफ्टवेयर की कमी को ढूंढ निकाला तो उस पर बड़ा साइबर हमला करना बेहद आसान हो जाएगा।
  • दूसरी ओर एंथ्रोपिक कंपनी ने सरकार के इस दावे को बहुत बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया बताया है। कंपनी का कहना है कि यह जोखिम बहुत ही सीमित है। एंथ्रोपिक ने कहा कि उन्होंने इन मॉडल्स को बाजार में उतारने से पहले सरकारी सुरक्षा अधिकारियों के साथ मिलकर काम किया था और सुरक्षा के कई कड़े इंतजाम पहले ही जोड़ दिए थे।
  • मगर इस विवाद की असली वजह इस साल की शुरुआत में समाने आई थी। दरअसल, ट्रंप प्रशासन चाहता था कि एंथ्रोपिक कंपनी अपने शक्तिशाली एआई मॉडल्स का इस्तेमाल अमेरिकी सरकार के दो बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए करने की अनुमति दे। पहला है डोमेस्टिक सर्विलांस। मतलब अमेरिकी नागरिकों और देश के भीतर की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए बड़े पैमाने पर निगरानी तंत्र तैयार करना।
  • दूसरा है ऑटोनॉमस वेपन्स यानी ऐसे आधुनिक और घातक हथियार विकसित करना जो बिना इंसानी दखल के खुद फैसले लेकर दुश्मनों पर हमला कर सकें (जैसे कि एआई-संचालित किलर ड्रोन या मिसाइलें)।

एंथ्रोपिक ने ऐसा करने से कर दिया था इनकार

तब एंथ्रोपिक ने अपने नैतिक सिद्धांतों और एआई सुरक्षा नीतियों का हवाला देते हुए सरकार के इस अनुरोध को ठुकरा दिया था। कंपनी का मानना था कि एआई का इस्तेमाल इंसानी निगरानी या युद्ध के मैदान में बिना सोचे-समझे फैसले लेने के लिए नहीं होना चाहिए। कंपनी के इस सख्त रवैये से ट्रंप प्रशासन बेहद नाराज हो गया। बदले की कार्रवाई के रूप में, अमेरिकी सरकार ने एंथ्रोपिक को अपनी सप्लाई-चेन ब्लैकलिस्ट में डाल दिया। तभी से सरकार और इस बेस्ट एआई फर्म के बीच तनाव लगातार बढ़ता चला गया, जिसने अब एक अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक विवाद का रूप ले लिया है।

यूएस के जी-7 देशों को इस AI मॉडल का एक्सेस न देने के क्या हैं मायने?

जानकारों का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि डोनाल्ड ट्रंप के शासन में तकनीक और एआई अब सिर्फ व्यापार की चीजें नहीं रह गई हैं बल्कि इन्हें परमाणु हथियारों की तरह रणनीतिक संपदा माना जा रहा है। अमेरिका की नीति शुरू से ही यही रही है कि वह अपनी सबसे बेहतरीन तकनीक पर पूरी तरह से एकाधिकार बरकरार रखे। भले ही इसके लिए उसे अपने सबसे पुराने और भरोसेमंद साथी देश ब्रिटेन को भी तकनीकी रूप से पीछे छोड़ना पड़े। इस प्रतिबंध के दूरगामी परिणाम हो सकते हैं। ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के देश जो अब तक अमेरिकी एआई कंपनियों (जैसे ओपनएआई, एंथ्रोपिक या गूगल) पर निर्भर थे, वे अब अपने खुद के टॉप लेवल के एआई मॉडल्स विकसित करने में तेजी लाएंगे ताकि भविष्य में उन्हें अमेरिका के सामने इस तरह हाथ न फैलाना पड़े।

Topics: AI Export BanUS AI BanAI National SecurityAI Model Access BanMythos AI ModelFable AI Modeldonald trumpTrump AdministrationAnthropic AIAnthropic AI Export BanG7 Summit 2026
जय प्रकाश गुप्ता
जय प्रकाश गुप्ता
लेखक करीब एक दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। अभी स्वतंत्र लेखन कर रहे हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर गहरी पकड़ है। [Read more]
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