
प्रतीकात्मक तस्वीर
आधार कार्ड का दुरुपयोग आम बात सी हो गई है। अक्सर देखा गया है कि अवैध तरीके से भारत में घुसे लोग भी बड़ी ही आसानी से आधार कार्ड बनवाने में सफल रहे हैं। इसको लेकर सुरक्षा एजेंसियों ने कई बार चिंता भी जाहिर की है। अब इसी को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट एक याचिका पर सुनवाई करने वाला है। इसमें आधार कार्ड को सिर्फ पहचान पत्र के रूप में इस्तेमाल करने और नागरिकता, मूल निवास या पते के सबूत के तौर पर इसका गलत उपयोग रोकने की मांग की गई है।
वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय ने यह जनहित याचिका दायर की है। इसे वकील अश्वनी दुबे के जरिए पेश किया गया। याचिका में केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और चुनाव आयोग को निर्देश देने की अपील है कि आधार को केवल पहचान साबित करने तक सीमित रखा जाए।
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मुख्य मांगें:
आधार का इस्तेमाल नागरिकता, मूल निवास, उम्र या आवासीय पते के सबूत के रूप में न होने दिया जाए।
नए मतदाता पंजीकरण फॉर्म में जन्म तिथि और निवास के सबूत के तौर पर आधार का उपयोग गैर-कानूनी माना जाए।
याचिका में आधार एक्ट 2016 की धारा 9 का हवाला दिया गया है। इसमें साफ लिखा है कि आधार नागरिकता या मूल निवास का सबूत नहीं है। फिर भी कई जगहों पर इसका इस्तेमाल इन कामों के लिए हो रहा है। इसके अलावा, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 23(4) और संविधान के अनुच्छेद 14 का भी जिक्र किया गया है। याचिकाकर्ता कहते हैं कि इन प्रावधानों का उल्लंघन हो रहा है।
आधार एक्ट के मुताबिक यह सिर्फ पहचान का दस्तावेज है। लेकिन व्यवहार में लोग इसे उम्र, नागरिकता और निवास प्रमाण के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। याचिका में चिंता जताई गई है कि इससे घुसपैठिए और अवैध प्रवासी आसानी से अन्य दस्तावेज बनवा सकते हैं। इससे सुरक्षा और कानूनी व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।
मामले में प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस वी. मोहना की पीठ इस याचिका पर सुनवाई करेगी। आज मंगलवार (16 जून 2026) को यह मामला कोर्ट में आएगा। यह याचिका उन सभी लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो आधार को सिर्फ एक पहचान पत्र मानते हैं और इसे दूसरे संवेदनशील कामों में इस्तेमाल होने से रोकना चाहते हैं। कोर्ट इस पर क्या फैसला देता है, यह देखना दिलचस्प होगा।