खाड़ी में अमेरिका औऱ ईऱान के युद्ध ने भारत के तेल व्यापार में काफी बदलाव किया है। खाड़ी संकट के चलते ही पश्चिम एशिया में भारत और ओमान के बीच व्यापारिक रिश्ते और अधिक प्रगाढ़ हुए हैं। अप्रैल-मई 2025 में ओमान भारत का 30वां सबसे बड़ा आयात स्रोत था। लेकिन इस वित्तीय वर्ष के पहले दो महीनों में ऊर्जा की वजह से ओमान 10वें स्थान पर पहुंच गया है। आयात में 3.8 गुना बढ़ोतरी हुई और यह 3.4 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, यूएई चौथे स्थान पर खिसक गया है। जबकि, रूस फिर से दूसरे स्थान पर आ गया है, उसके बाद अमेरिका है। भारत को एलपीजी यानी रसोई गैस की तलाश में अमेरिका ऊपर आया। ऊर्जा की वजह से ब्राजील से आयात भी 2.8 गुना बढ़कर 2.7 अरब डॉलर हो गया। पेरू से आयात 3.7 गुना बढ़कर 2 अरब डॉलर से ज्यादा पहुंच गया। पेरू अब 20वें सबसे बड़े आयात स्रोत के रूप में आ गया है, जबकि पिछले साल अप्रैल-मई में यह 35वें स्थान पर था। ये आंकड़े वाणिज्य विभाग के हालिया नंबरों से आए हैं।
बदल गया है निर्यात का क्रम
निर्यात की तरफ भी व्यापार का क्रम बदला है। अप्रैल-मई में सिंगापुर ने चीन और नीदरलैंड्स को पीछे छोड़ भारत का तीसरा सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य बन गया है। यह दूसरे स्थान वाले यूएई से सिर्फ 180 मिलियन डॉलर पीछे है। इसके अलावा भी अन्य बदलाव दिख रहे हैं। तंजानिया निर्यात का आठवां सबसे बड़ा गंतव्य बन गया है, जबकि पिछले साल अप्रैल-मई में यह 25वें स्थान पर था। दक्षिण अफ्रीका 10वें स्थान पर है, जो पिछले साल से दो पायदान ऊपर है।
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वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बताया कि तंजानिया को तेल और रत्न-आभूषण निर्यात बढ़ने की वजह से वहां निर्यात पिछले साल के 800 मिलियन डॉलर से बढ़कर इस साल 2.2 अरब डॉलर हो गया। पड़ोसी श्रीलंका अब 12वें स्थान पर है, जहां निर्यात लगभग तीन गुना बढ़कर 1.8 अरब डॉलर पहुंच गया।
सिंगापुर को निर्यात 2.2 गुना बढ़कर 5.1 अरब डॉलर हो गया। यह मुख्य रूप से पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात की वजह से हुआ। पश्चिम एशिया के युद्ध से सिंगापुर पर असर पड़ा था, जिसकी वजह से भारत से ये बढ़ोतरी हुई। इससे सिंगापुर चीन से आगे निकल गया। चीन को निर्यात 25 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ा, जो चीन की सख्त व्यापार बाधाओं को देखते हुए अच्छा प्रदर्शन है।
होर्मुज जलडमरूमध्य का ब्लॉकेड
सरकार का कहना है कि फारस की खाड़ी से जुड़े होर्मुज जलडमरूमध्य के ब्लॉकेड की वजह से ओमान अब इस क्षेत्र का एक तरह का गेटवे बन गया है। अग्रवाल ने कहा कि भारत ने ओमान के साथ हाल ही में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट लागू किया है। ओमान ने अपने तीन बंदरगाह सोहर, सलालाह और दुकम को भारतीय सामान के ट्रांजिट के लिए खोल दिए हैं, ताकि यूएई समेत अन्य देशों तक माल पहुंचाया जा सके। इन कोशिशों की वजह से पश्चिम एशिया को निर्यात पिछले साल के स्तर के करीब पहुंच गया है। हालांकि, ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान की वजह से आयात अभी भी करीब 18 प्रतिशत कम है।

















