Explainer: बादल फटने से होने वाली तबाही से बचाएगा नया AI मॉडल, जानिए कैसे करता है काम?
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Explainer: बादल फटने से होने वाली तबाही से बचाएगा नया AI मॉडल, जानिए कैसे करता है काम?

आईआईटी भुवनेश्वर के वैज्ञानिकों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित एक बेहद एडवांस वेदर फोरकास्टिंग मॉडल तैयार किया है। उनका दावा है कि यह नया सिस्टम बादल फटने जैसी खतरनाक घटनाओं की जानकारी 72 घंटे (3 दिन) पहले ही दे सकता है।

Written byजय प्रकाश गुप्ताजय प्रकाश गुप्ता — edited by कुलदीप सिंह
Jun 15, 2026, 01:22 pm IST
inविज्ञान और तकनीक
IIT Bhuvaneshwar AI Model

प्रतीकात्मक तस्वीर

पहाड़ी राज्य जैसे हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में हर साल बादल फटने की कई खबरें आती हैं। इन प्राकृति आपदाओं में बहुत सी जान व माल की हानि होती है। क्या हो अगर इन आपदाओं का सटीक अलर्ट मिल जाए, वो भी 3 दिन पहले?

यह संभव कर दिखाया है आईआईटी भुवनेश्वर (IIT Bhubaneswar) के वैज्ञानिकों ने। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित एक बेहद एडवांस वेदर फोरकास्टिंग मॉडल तैयार किया है। उनका दावा है कि यह नया सिस्टम बादल फटने जैसी खतरनाक घटनाओं की जानकारी 72 घंटे (3 दिन) पहले ही दे सकता है, जिससे आपदा प्रबंधन टीमों को राहत और बचाव कार्य की तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिल जाएगा। इस तरह बादल फटने से अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन से लोगों की जान और करोड़ों रुपये की संपत्ति नष्ट होने से बच जाएगी।

क्या है ये लेटेस्ट एआई बेस्ड टेक्नोलॉजी, यह कैसे काम करती है और यह पारंपरिक मौसम प्रणालियों से कितनी बेहतर है, चलिए विस्तार से आपको बताते हैं।

क्या है यह नया AI मॉडल और किसने किया है तैयार?

दरअसल, बादल फटने (Cloudburst) से निपटने के लिए भारतीय वैज्ञानिकों ने एक क्रांतिकारी तकनीक विकसित की है। IIT भुवनेश्वर के मौसम वैज्ञानिकों संदीप पटनायक, हेमंत कुमार, ओमवीर शर्मा, नीलाद्री बिहारी और धनंजय त्रिवेदी की टीम ने मिलकर इस अत्याधुनिक एआई सिस्टम को विकसित किया है। इस मॉडल का टेक्निकल नाम ‘ड्यूल एंकोडर क्रॉस अटेंशन फ्यूजन ट्रांसफॉर्मर मॉडल’ (Dual Encoder Cross Attention Fusion Transformer Model) है।

कैसे करता है काम?

यह एक अत्याधुनिक डीप लर्निंग सिस्टम (Deep Learning System) है जो वायुमंडल और मौसम से जुड़े बेहद जटिल और तेजी से बदलने वाले डेटा का गहराई से विश्लेषण करने में सक्षम है। वैज्ञानिकों ने इस मॉडल की मदद से अगस्त 2023 में उत्तर-पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में हुई उस भीषण बारिश और बादल फटने की घटनाओं का बारीकी से अध्ययन किया जिसने 140 से अधिक मासूमों की जान ले ली थी और चारों तरफ हाहाकार मचा दिया था।

पारंपरिक WRF मॉडल से है कहीं बेहतर

आमतौर पर भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और अन्य एजेंसियां मौसम का अनुमान लगाने के लिए ‘वेदर रिसर्च एंड फोरकास्टिंग’ (WRF) नाम के पारंपरिक न्यूमेरिकल मॉडल का उपयोग करती हैं। लेकिन अचानक होने वाले बदलावों और छोटे क्षेत्रों में होने वाली भारी बारिश को पकड़ने में यह पुराना मॉडल कई बार विफल हो जाता है।

इसके विपरीत, नए एआई मॉडल ने साल 2023 के लाइव ट्रायल्स के दौरान शानदार नतीजे दिए। जैसे:

1. इस सिस्टम ने 3 दिन पहले ही बादलों के खतरनाक तरीके से उमड़ने और फटने के सटीक संकेत दे दिए।
2. परीक्षण के दौरान इस एआई मॉडल की सटीकता पहाड़ी इलाकों में बेहद प्रभावशाली दर्ज की गई। पौड़ी गढ़वाल में लगभग 78 फीसदी सटीक पूर्वानुमान। मंडी (हिमाचल प्रदेश) में इसने 68 प्रतिशत सटीकता हासिल की। जबकि देहरादून में 67 और हरिद्वार में 54 प्रतिशत सटीकता पाई।

वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह मॉडल बारिश के समय और उसकी तीव्रता (इंटेंसिटी) में होने वाले सूक्ष्म से सूक्ष्म बदलावों को भी आसानी से पकड़ लेता है, जहां पुराने कंप्यूटर मॉडल पूरी तरह फेल हो जाते हैं। यह रिसर्च स्प्रिंग नेचर जर्नल में प्रकाशित हुई है। अध्ययन में बताया गया है कि इस नए मॉडल ने बारिश का बहुत सटीक अनुमान लगाया। इसमें गलती की गुंजाइश 9 मिलीमीटर से भी कम रही, जो कि ‘वेदर रिसर्च एंड फोरकास्टिंग’ (WRF) मॉडल के मुकाबले काफी बेहतर है।

इसे भी पढ़ें: US-Iran Peace Deal: US-ईरान शांति समझौते पर कब और कहां होंगे हस्ताक्षर? जानिये

राजधानी दिल्ली में भी बढ़ा खतरा

मौसम विज्ञान (IMD) के नियमों के अनुसार, जब किसी बहुत छोटे भौगोलिक क्षेत्र (लगभग 20 से 30 वर्ग किलोमीटर) के भीतर मात्र एक घंटे के समय में 100 मिलीमीटर (10 सेमी) या उससे अधिक बारिश हो जाती है तो उस स्थिति को तकनीकी रूप से ‘बादल फटना’ कहा जाता है। अब तक यह माना जाता था कि बादल फटने की घटनाएं सिर्फ ऊंचे पहाड़ी इलाकों में ही होती हैं, लेकिन बदलते पर्यावरण और ग्लोबल वार्मिंग के कारण अब मैदानी इलाकों की स्थिति भी चिंताजनक हो गई है। देश की राजधानी दिल्ली में अब मॉनसून के दौरान सिर्फ 2 से 3 घंटे के भीतर ही 100 से 200 मिलीमीटर तक मूसलाधार बारिश होने के मामले तेजी से बढ़े हैं।

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इन बदलते पैटर्न्स को देखते हुए अब यह बिल्कुल नहीं कहा जा सकता कि दिल्ली जैसी घनी आबादी वाले महानगर में बादल नहीं फट सकते। यदि ऐसी घटना दिल्ली में होती है तो जलभराव और बाढ़ से स्थिति अनियंत्रित हो सकती है।
ऐसे में IIT भुवनेश्वर का यह एडवांस एआई अलर्ट सिस्टम भविष्य में दिल्ली समेत देश के कई बड़े शहरों को अचानक आने वाली तबाही से सुरक्षित रखने में वरदान साबित हो सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह एक ऐतिहासिक खोज है जिसका सीधा फायदा आपदा प्रबंधन, समय से पहले चेतावनी देने और नुकसान को कम करने में मिलेगा।

Topics: दिल्लीआपदा प्रबंधनआईएमडीआईआईटी भुवनेश्वर एआई वेदर मॉडलबादल फटने की भविष्यवाणीड्यूल एंकोडर क्रॉस अटेंशन फ्यूजन ट्रांसफॉर्मर
जय प्रकाश गुप्ता
जय प्रकाश गुप्ता
लेखक करीब एक दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। अभी स्वतंत्र लेखन कर रहे हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर गहरी पकड़ है। [Read more]
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