नागपुर / नई दिल्ली। भारतीय खेल जगत से एक बेहद दुखद और स्तब्ध कर देने वाली खबर सामने आई है। देश के प्रख्यात निशानेबाज (Shooter) और द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता जसपाल राणा का शुक्रवार को दिल्ली के एक अस्पताल में असामयिक निधन हो गया। वह मात्र 49 वर्ष के थे। उनके इस अचानक चले जाने से पूरे खेल जगत और राष्ट्र में शोक की लहर दौड़ गई है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने जसपाल राणा के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। संघ ने कहा कि उन्होंने अपनी अद्भुत खेल प्रतिभा के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का गौरव बढ़ाया और देश के खेल जगत को एक नई दिशा दी थी।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि
संघ ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जसपाल राणा को याद करते हुए लिखा-
“देश के जाने माने खिलाड़ी पद्मश्री जसपाल राणा के असामयिक निधन पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ गहरा शोक व्यक्त करता है। वे अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित निशानेबाज़ होने के साथ-साथ उच्च कोटि के प्रतिष्ठित प्रशिक्षक भी थे जिसके लिए उन्हें द्रोणाचार्य पुरस्कार भी मिला था। उन्होंने खेल के द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का सम्मान बढ़ाया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ईश्वर से यह प्रार्थना करता है कि उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें।”
देश के जाने माने खिलाड़ी पद्मश्री जसपाल राणा के असामयिक निधन पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ गहरा शोक व्यक्त करता है। वे अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित निशानेबाज़ होने के साथ-साथ उच्च कोटि के प्रतिष्ठित प्रशिक्षक भी थे जिसके लिए उन्हें द्रोणाचार्य पुरस्कार भी मिला था। उन्होंने खेल के… pic.twitter.com/l2unbZZzF8
— RSS (@RSSorg) June 13, 2026
म्यूनिख से लौटते समय बिगड़ी थी तबीयत
रेलवे और खेल अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, जसपाल राणा जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ (ISSF) वर्ल्ड कप से भारत लौट रहे थे। इसी यात्रा के दौरान अचानक उनकी तबीयत काफी बिगड़ गई। भारत पहुंचने पर उन्हें तुरंत दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका और शुक्रवार को उन्होंने अंतिम सांस ली।
उत्तराखंड की देवभूमि से वैश्विक मंच तक का सफर
जसपाल राणा का जन्म 28 जून 1976 को उत्तराखंड के उत्तरकाशी में एक प्रतिष्ठित खेल-प्रेमी परिवार में हुआ था। उनकी निशानेबाजी की शुरुआती कड़ियां उनके घर से ही जुड़ी थीं:
- पिता ही थे पहले गुरु: जसपाल राणा के पिता नारायण सिंह राणा भी शूटिंग के खेल से गहरे जुड़े रहे और उन्होंने ही जसपाल को शुरुआती दिनों में निशानेबाजी की बारीकियां और गुर सिखाए।
- कम उम्र में बिखेरी चमक: जसपाल ने बेहद कम उम्र में ही निशानेबाजी में अपनी असाधारण प्रतिभा का लोहा मनवा लिया था। वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के सबसे सफल और आक्रामक निशानेबाजों में शुमार हुए।
ऐतिहासिक रिकॉर्ड और राष्ट्रीय सम्मान
जसपाल राणा ने एशियाई खेलों (Asian Games) और राष्ट्रमंडल खेलों (Commonwealth Games) में भारत के लिए पदकों की झड़ी लगा दी थी। उनके शानदार करियर, ऐतिहासिक रिकॉर्ड और सम्मानों का विवरण नीचे दिया गया है:
| पुरस्कार / खेल प्रतियोगिता | ऐतिहासिक उपलब्धि और वर्ष |
|---|---|
| अर्जुन पुरस्कार (Arjuna Award) | खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए वर्ष 1994 में इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किए गए। |
| पद्मश्री सम्मान (Padma Shri) | देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान से वर्ष 1997 में नवाजे गए। |
| द्रोणाचार्य पुरस्कार (Dronacharya Award) | भारतीय निशानेबाजी को नए चैंपियन देने के लिए एक ‘उच्च कोटि के उत्कृष्ट प्रशिक्षक (Coach)’ के रूप में सम्मानित। |
| राष्ट्रमंडल खेल (CWG Record) | कॉमनवेल्थ गेम्स में कुल 15 पदक जीते, जिनमें 9 स्वर्ण (Gold Medals) शामिल हैं। |
जसपाल राणा न केवल एक खिलाड़ी के रूप में सफल रहे, बल्कि सक्रिय खेल से संन्यास लेने के बाद उन्होंने देश के युवा निशानेबाजों को तराशने में भी अपनी पूरी जिंदगी लगा दी। उनके कुशल मार्गदर्शन में कई युवा खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का परचम लहराया। उनके इस असामयिक अवसान से भारतीय खेल जगत ने अपना एक सच्चा नायक, ओजस्वी प्रशिक्षक और महान मार्गदर्शक खो दिया है।
















