G7 शिखर सम्मेलन: फ्रांस में PM मोदी पर होंगी सबकी नजरें, राष्ट्रपति मैक्रों ने भारत को क्यों बताया 'टॉप प्रायोरिटी'?
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G7 शिखर सम्मेलन: फ्रांस में PM मोदी पर होंगी सबकी नजरें, राष्ट्रपति मैक्रों ने भारत को क्यों बताया ‘टॉप प्रायोरिटी’?

जानिए फ्रांस ने खासतौर पर क्यों भारत को इस समिट के लिए बुलाया है और क्या है इस स्पेशल इनविटेशन के पीछे पेरिस का मुख्य एजेंडा

Written byजय प्रकाश गुप्ताजय प्रकाश गुप्ता — edited by Shivam Dixit
Jun 12, 2026, 10:00 pm IST
inभारत, विश्व, विश्लेषण
G7 Summit in France President Emmanuel Macron and PM Narendra Modi

फ्रांस के एवियन-ए-बैंस शहर में आयोजित होने जा रहे 52वें जी7 (G7) शिखर सम्मेलन में इस बार पूरी दुनिया की नजरें भारत पर टिकी हैं। हालांकि, भारत आधिकारिक तौर पर जी7 ब्लॉक का सदस्य नहीं है, लेकिन इसके बावजूद फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने पीएम नरेंद्र मोदी को इस वैश्विक मंच पर विशेष रूप से आमंत्रित किया है। फ्रांस के राजनयिक सूत्रों के अनुसार, पेरिस ने इस यात्रा को अपनी टॉप प्रायोरिटी माना है।

फ्रांस ने खासतौर पर क्यों भारत को इस समिट के लिए बुलाया है और क्या है इस स्पेशल इनविटेशन के पीछे पेरिस का मुख्य एजेंडा, चलिए आपको विस्तार से बताते हैं।

G7 समिट में भारत क्यों है फ्रांस की ‘टॉप प्रायोरिटी’?

दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में जहां वैश्विक व्यापार और रणनीतिक स्वायत्तता के सामने नई चुनौतियां आ खड़ी हुई हैं। वहीं फ्रांस भारत को एक ‘ग्लोबल सॉलूशन प्रोवाइडर’ के रूप में देख रहा है। 15 से 17 जून 2026 तक होने वाली इस समिट के दौरान फ्रांस भारत के साथ रक्षा, परमाणु और दोनों देशों के नागरिकों से जुड़े 12 बड़े समझौतों को अंतिम रूप देने की तैयारी में है। यही वजह है कि 52वें जी7 शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी की मौजूदगी बेहद खास होने वाली है। नई दिल्ली में मौजूद फ्रांसीसी राजनयिक सूत्रों ने इस बात के दो मुख्य कारण बताए हैं कि आखिर क्यों मैक्रों प्रशासन भारत को इस मंच पर देखने के लिए इतना उत्सुक था।

पहला कारण यह है कि भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक साझेदारी अब उस स्तर पर पहुंच चुकी है, जहां दोनों देश बिना किसी हिचकिचाहट के वैश्विक और द्विपक्षीय मुद्दों पर खुलकर बात कर सकते हैं। फ्रांसीसी राजनयिकों का मानना है कि भारत की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमता का लोहा अब पूरी दुनिया मानती है। उनका कहना है, ‘जब भारत किसी समस्या का समाधान ढूंढता है तो वह समाधान पूरी दुनिया के काम आता है।’ इसके अलावा दूसरी वजह यह है कि भारत इस साल ब्रिक्स (BRICS) का अध्यक्ष भी है, जो वैश्विक मंच पर उसकी कूटनीतिक ताकत को और मजबूत करता है। यही कारण है कि भारत को जी7 के सभी मुख्य सत्रों में शामिल होने का दुर्लभ अवसर दिया गया है। ऐसा आमतौर पर गैर-सदस्य देशों के साथ नहीं किया जाता।

G7 सम्मेलन का मुख्य एजेंडा

आने वाले सोमवार को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा दिए जाने वाले आधिकारिक रात्रिभोज के साथ इस सम्मेलन की शुरुआत होगी। इस बार का एजेंडा बेहद व्यापक है जिसमें यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की की मौजूदगी में रूस-यूएस युद्ध और मध्य पूर्व (पश्चिम एशिया) के संकट पर गंभीर चर्चा होगी। इसके अलावा सम्मेलन में मुख्य रूप से 6 थीम पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, वो हैं-

1. आर्थिक असंतुलन से निपटना

वैश्विक व्यापार को संतुलित करने पर चर्चा होगी। मुख्य चिंता चीन को लेकर है जो ‘उत्पादन बहुत ज्यादा और उपभोग बहुत कम’ करता है। साथ ही और अमेरिका जो ‘उपभोग ज्यादा’ करके टैरिफ (शुल्क) बढ़ा रहा है। वहीं यूरोप का ध्यान नए इनोवेशन पर है।

2. अंतरराष्ट्रीय साझेदारी और आम सहमति

वैश्विक उथल-पुथल के बीच नए कूटनीतिक रास्ते खोजना, इस समिट के मुख्य उद्देश्यों में से एक है। फ्रांस को उम्मीद है कि भारत इस वैश्विक चुनौती से निपटने में अग्रणी भूमिका निभाएगा।

3. ऑनलाइन सुरक्षा और सोशल मीडिया रेगुलेशन

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को नियंत्रित करने और बच्चों की सुरक्षा के लिए 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने जैसे कड़े नियमों पर सहमति बनाना।

4. खनिज

भविष्य की तकनीकों के लिए जरूरी खनिज संसाधनों की सुरक्षित सप्लाई चेन तैयार करना।

5. वैश्विक स्वास्थ्य

फ्रांस कैंसर अनुसंधान (रिसर्च) को बढ़ावा देना और भविष्य में आने वाली महामारियों के खतरों को समझना।

6. सुरक्षा से जुड़े मुद्दे

दुनिया भर में बढ़ते वित्तीय अपराधों और मानव व अप्रवासी तस्करी पर रोक लगाना।

ट्रंप युग में रणनीतिक स्वायत्तता की परीक्षा

अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के बाद से वैश्विक व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है। ट्रंप ने जहां यूक्रेन युद्ध को तुरंत रोकने का वादा किया था, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने पश्चिम एशिया में ईरान के खिलाफ जंग छेड़ दी। उसके इस कदम ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया है।

ऐसी स्थिति में भारत और फ्रांस दोनों के लिए अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है। फ्रांसीसी सूत्रों का कहना है कि आज के दौर में सहयोगियों और दोस्तों के होने के बावजूद किसी भी देश को अपनी निर्णय लेने की क्षमता और रक्षा तंत्र को खुद मजबूत करना होगा। फ्रांस का मानना है कि भारत ने अपनी आत्मनिर्भर रक्षा नीति से जो उदाहरण पेश किया है, वही मॉडल फ्रांस और यूरोपीय संघ (EU) के लिए भी जरूरी है। हालांकि, यूएस फ्रांस का महत्वपूर्ण सहयोगी रहेगा।

पीएम मोदी के साथ फ्रांस कर सकता है ये 2 बड़े समझौते

इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा भारत और फ्रांस के बीच होने वाली द्विपक्षीय वार्ता है। फ्रांसीसी सूत्रों ने बताया कि वे इस यात्रा के दौरान 12 बड़े डिलिवरेबल्स यानी समझौतों को अंतिम रूप दे सकते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि अब भारत के साथ फ्रांस के संबंध विक्रेता और ग्राहक वाले नहीं बल्कि बराबरी का है। इसलिए भविष्य के सभी रक्षा समझौतों में भारत के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को शामिल किया जाएगा।

जब राफेल (Rafale) सौदे के बारे में पूछा गया तो फ्रांसीसी राजनयिकों ने पुष्टि की कि इसमें भारत के स्थानीय हथियार प्रणालियों को शामिल करने की पूरी प्रतिबद्धता है। दोनों देश असैन्य परमाणु सहयोग के क्षेत्र में एक नए चरण की शुरुआत करने जा रहे हैं, जिससे भारत की स्वच्छ ऊर्जा जरूरतों को बल मिलेगा।

इसके अलावा फ्रांस का लक्ष्य साल 2030 तक 30000 भारतीय छात्रों को अपने विश्वविद्यालयों में दाखिला लेने के लिए आकर्षित करना है (वर्तमान में यह संख्या 12000 है)। इसके साथ ही दोनों देश भारतीय नागरिकों और छात्रों के लिए वीजा जारी करने और उसकी अवधि बढ़ाने में होने वाली देरी की समस्याओं को दूर करने के लिए कूटनीतिक स्तर पर बातचीत कर रहे हैं।

पीएम मोदी की यह यात्रा भारत और फांस के द्विपक्षीय संबंधों के लिए ऐतिहासिक साबित होने जा रही।

Topics: India Top Priorityफ्रांस जी7 शिखर सम्मेलन 2026जी7 सम्मेलन थीमपीएम मोदीराष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोंभारत और फ्रांसIndia and FrancePM Modi G7 SummitMacron Invites PM Modi
जय प्रकाश गुप्ता
जय प्रकाश गुप्ता
लेखक करीब एक दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। अभी स्वतंत्र लेखन कर रहे हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर गहरी पकड़ है। [Read more]
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