ईरान ने अमेरिका पर तीन भारतीय नाविकों की मौत वाले जहाज पर हमले को “सशस्त्र डकैती” और “राज्य स्तर की समुद्री डकैती” बताया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अमेरिका को जवाबदेह ठहराने की अपील की है।क्या कहा ईरान नेशुक्रवार को ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माइल बकाएई ने एक्स पर पोस्ट किया। उन्होंने मृत नाविकों के परिवारों को संवेदना दी और भारतीय लोगों व सरकार को भी सांत्वना दी।
उन्होंने लिखा, “भारतीय वाणिज्यिक जहाजों पर अमेरिका के क्रूर हमले, जिनमें कम से कम तीन भारतीय नागरिक मारे गए, अमेरिका की चल रही सशस्त्र डकैती और राज्य समुद्री डकैती की नीति के सबूत हैं।” बकाएई ने आगे कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अमेरिका के इस गैरकानूनी व्यवहार के लिए जवाबदेही तय करनी चाहिए, जो वैश्विक शांति और सुरक्षा को खतरे में डाल रहा है और समुद्री नौवहन की आजादी को भी प्रभावित कर रहा है।
किन जहाजों पर हुए हमले
पिछले चार दिनों में ओमान के तट के पास तीन वाणिज्यिक जहाजों पर अमेरिकी नौसेना ने हमले किए। इनमें भारतीय क्रू मेंबर्स थे।
8 जून: पलाऊ फ्लैग वाला तेल टैंकर मारिवेक्स पर हमला।
10 जून: पलाऊ फ्लैग वाला तेल टैंकर सेटेबेलो पर हमला।
गुरुवार: गिनी-बिसाउ फ्लैग वाला बिटुमेन टैंकर एमटी जलवीर पर हमला, जिसमें 20 भारतीय क्रू मेंबर्स थे।
मारे गए भारतीय नाविक
तीन भारतीय नाविक एमटी सेटेबेलो के क्रू मेंबर्स थे। उनके नाम हैं – आदित्य शर्मा, सुरेश पटनाला और शिवानंद चौरसिया।
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अमेरिका का पक्ष
अमेरिका के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि इन जहाजों को इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वे अमेरिका द्वारा लगाए गए ईरान पर नौसैनिक ब्लॉकेड को तोड़ने की कोशिश कर रहे थे। वाशिंगटन ने यह ब्लॉकेड ईरान के स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद करने के जवाब में लगाया था।
क्या है पूरा मामला
गौरतलब है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के करीब 20% क्रूड ऑयल का रास्ता है। ईरान ने फरवरी 28 को अमेरिका-इजराइल के हमलों के बाद मार्च की शुरुआत में इस जलडमरूमध्य को बंद कर दिया था। इससे इलाके में बड़ा संघर्ष शुरू हो गया।8 अप्रैल को सीजफायर हुआ, जिसे बाद में अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया गया। लेकिन युद्धविराम के बावजूद हमले जारी रहे।












