बंगाल सरकार दीघा जगन्नाथ मंदिर के नाम से हटाएगी ‘धाम’, CM शुभेंदु अधिकारी ने की घोषणा- जानिये क्या है पूरा मामला?
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बंगाल सरकार दीघा जगन्नाथ मंदिर के नाम से हटाएगी ‘धाम’, CM शुभेंदु अधिकारी ने की घोषणा- जानिये क्या है पूरा मामला?

पश्चिम बंगाल के दीघा स्थित जगन्नाथ मंदिर परिसर के नामकरण को लेकर चल रहे विवाद के बीच राज्य सरकार ने मंदिर के आधिकारिक नाम से “धाम” शब्द हटाने का निर्णय लिया है।

Written byडॉ. समन्वय नंदडॉ. समन्वय नंद — edited by Lalit Fulara
Jun 10, 2026, 10:14 am IST
inओडिशा

भुवनेश्वर: पुरी की धार्मिक पहचान और परंपराओं को लेकर लंबे समय से जारी विवाद सुलझने की ओर पश्चिम बंगाल के दीघा स्थित जगन्नाथ मंदिर परिसर के नामकरण को लेकर चल रहे विवाद के बीच राज्य सरकार ने मंदिर के आधिकारिक नाम से “धाम” शब्द हटाने का निर्णय लिया है। यह फैसला ओडिशा सरकार, धार्मिक विद्वानों, जगन्नाथ भक्तों तथा विभिन्न सांस्कृतिक संगठनों की लगातार आपत्तियों के बाद लिया गया है। उनका तर्क था कि “जगन्नाथ धाम” की पहचान केवल ओडिशा के पुरी से जुड़ी हुई है और इसका उपयोग किसी अन्य स्थान के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

इस संबंध में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने घोषणा करते हुए कहा कि दीघा मंदिर परिसर के नाम से “धाम” शब्द हटा दिया जाएगा। यह निर्णय ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के औपचारिक अनुरोध के बाद लिया गया है। माझी ने पश्चिम बंगाल सरकार से पुरी स्थित श्रीजगन्नाथ धाम की विशिष्ट धार्मिक पहचान और पवित्रता को बनाए रखने की अपील की थी। पिछले एक वर्ष से राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बने इस संवेदनशील धार्मिक और सांस्कृतिक विवाद के समाधान की दिशा में इस निर्णय को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। ओडिशा सरकार और धार्मिक संगठनों ने किया स्वागत ओडिशा सरकार तथा कई धार्मिक संगठनों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे भगवान जगन्नाथ के करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान बताया है। उनका कहना है कि यह निर्णय पुरी से जुड़ी सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को मान्यता देता है। पुरी से सांसद डॉ. संबित पात्र, जिन्होंने इस मुद्दे को पश्चिम बंगाल सरकार के समक्ष प्रमुखता से उठाया था, ने फैसले पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विवाद तब शुरू हुआ जब अप्रैल 2025 में दीघा जगन्नाथ मंदिर का उद्घाटन कर उसे आधिकारिक रूप से “जगन्नाथ धाम” नाम दिया गया।

मीडिया से बातचीत में पात्र ने स्पष्ट किया कि ओडिशा सरकार या जगन्नाथ भक्तों को ओडिशा के बाहर जगन्नाथ मंदिर बनाए जाने से कोई आपत्ति नहीं थी। विवाद केवल “धाम” शब्द के प्रयोग को लेकर था, जिसका हिंदू परंपरा में विशेष आध्यात्मिक और ऐतिहासिक महत्व है। उन्होंने कहा, “हमने हमेशा देश और विदेश में भगवान जगन्नाथ के मंदिरों की स्थापना और प्रचार का समर्थन किया है। लेकिन ‘जगन्नाथ धाम’ शब्द पुरी से अभिन्न रूप से जुड़ा हुआ है। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी का पत्र मुख्यमंत्री शुभदु अधिकारी को सौंपने के बाद दीघा मंदिर के नाम से ‘धाम’ शब्द हटाने का सकारात्मक निर्णय लिया गया है।” पात्र ने कहा कि इस फैसले का ओडिशा के लाखों श्रद्धालु और देशभर के सनातन धर्मावलंबी स्वागत करेंगे। शुभेंदु अधिकारी ने नाम परिवर्तन की पुष्टि की मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि मंदिर परिसर पहले की तरह पूजा-अर्चना और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र बना रहेगा, लेकिन विवादित शब्द को नाम से हटा दिया जाएगा। उन्होंने कहा, “मैंने ओडिशा के मुख्यमंत्री का पत्र स्वीकार कर लिया है। ‘धाम’ शब्द हटाया जाएगा। सांस्कृतिक केंद्र परिसर यथावत रहेगा, पूजा जारी रहेगी और पूरा परिसर मंदिर के रूप में कार्य करता रहेगा।

हालांकि, नाम से ‘धाम’ शब्द हटा दिया जाएगा।” अधिकारी ने यह भी स्वीकार किया कि बड़ी संख्या में लोगों का मानना था कि पूर्ववर्ती सरकार ने नामकरण के दौरान जनभावनाओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया था। उन्होंने बताया कि नाम परिवर्तन को औपचारिक रूप देने के लिए राज्य मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्ताव रखा जाएगा। इससे मंदिर के उद्घाटन के बाद से जारी विवाद के समाप्त होने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री मोहन माझी ने पुरी की विशिष्ट पहचान का उठाया मुद्दा यह फैसला ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की लगातार अपीलों के बाद आया है। उन्होंने इस संबंध में वर्तमान पश्चिम बंगाल सरकार के साथ-साथ पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी पत्र लिखकर अपनी चिंताएं व्यक्त की थीं। अपने पत्र में माझी ने पुरी के धार्मिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा था कि यह हिंदू धर्म के चार प्रमुख धामों में से एक है। उन्होंने तर्क दिया कि “जगन्नाथ धाम” केवल भौगोलिक नाम नहीं, बल्कि गहरी धार्मिक आस्था और परंपरा से जुड़ा एक पवित्र संबोधन है।

मुख्यमंत्री माझी ने अपने पत्र में लिखा, “दीघा स्थित जगन्नाथ मंदिर परिसर को ‘दीघा जगन्नाथ धाम’ नाम दिए जाने से श्रद्धालुओं, धार्मिक विद्वानों और विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों के बीच व्यापक चिंता उत्पन्न हुई है। ‘जगन्नाथ धाम’ शब्द महाप्रभु श्रीजगन्नाथ के पवित्र निवास पुरी से जुड़ा हुआ है और इसका अत्यंत महत्वपूर्ण आध्यात्मिक, ऐतिहासिक तथा सांस्कृतिक महत्व है।” उन्होंने पश्चिम बंगाल सरकार से अनुरोध किया कि मंदिर परिसर के लिए अधिक उपयुक्त नाम अपनाया जाए। माझी ने लिखा था , “पुरी स्थित श्रीजगन्नाथ धाम की पवित्रता और विशिष्ट पहचान को बनाए रखने की भावना से मैं अनुरोध करता हूं कि दीघा मंदिर परिसर के नाम से ‘धाम’ शब्द हटाकर ‘श्री जगन्नाथ मंदिर, दीघा’ जैसे उपयुक्त नाम को अपनाने की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाएं।” गजपति महाराजा ने भी जताई थी आपत्ति विवाद को उस समय और बल मिला जब पुरी के गजपति महाराजा एवं भगवान जगन्नाथ के आद्य सेवक गजपति महाराजा दिव्यसिंह देव ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। मई 2025 में जारी एक आधिकारिक बयान में उन्होंने कहा था कि ऐतिहासिक रूप से श्रीपुरुषोत्तम क्षेत्र या श्रीक्षेत्र कहलाने वाले पुरी को ही शास्त्रों और धार्मिक परंपराओं के अनुसार “जगन्नाथ धाम” कहे जाने का अधिकार प्राप्त है। उन्होंने कहा, “जगन्नाथ धाम की पवित्रता और पहचान पुरी से अविभाज्य रूप से जुड़ी हुई है।

मुक्तिमंडप के विद्वानों द्वारा संरक्षित प्राचीन शास्त्रों और धार्मिक परंपराओं के अनुसार कोई अन्य स्थान इस पवित्र उपाधि का दावा नहीं कर सकता।” धार्मिक परंपराओं और अनुष्ठानों को लेकर भी उठे सवाल नामकरण विवाद के अलावा गजपति महाराजा ने जगन्नाथ परंपराओं के पालन को लेकर भी चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने कहा कि शास्त्रों और सदियों पुरानी परंपराओं के अनुसार भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की प्रतिमाएं केवल पवित्र नीम की लकड़ी (दारु) से निर्मित होनी चाहिए। पत्थर या धातु से बनी प्रतिमाएं पुरी की पारंपरिक परंपराओं के अनुरूप नहीं मानी जातीं।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पुरी श्रीमंदिर के बाहर भगवान जगन्नाथ को अर्पित किए जाने वाले भोग को “महाप्रसाद” नहीं कहा जाना चाहिए, क्योंकि इस शब्द का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व केवल श्रीजगन्नाथ मंदिर की परंपरा से जुड़ा हुआ है। इन टिप्पणियों के बाद ओडिशा के बाहर जगन्नाथ परंपराओं के संरक्षण को लेकर विद्वानों, सेवायतों, श्रद्धालुओं और धार्मिक संगठनों के बीच व्यापक चर्चा शुरू हो गई थी। दीघा मंदिर परिसर के नाम से “धाम” शब्द हटाने पर पश्चिम बंगाल सरकार की सहमति के बाद यह विवाद अब समाप्ति की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। मंदिर श्रद्धा, पूजा, तीर्थ और सांस्कृतिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में कार्य करता रहेगा, लेकिन ऐसे संशोधित नाम के साथ जो पुरी स्थित श्रीजगन्नाथ धाम की विशिष्ट धार्मिक पहचान से किसी प्रकार का टकराव उत्पन्न नहीं करेगा। धार्मिक नेताओं, विद्वानों और श्रद्धालुओं ने इस निर्णय का व्यापक स्वागत किया है। उनका मानना है कि यह भगवान जगन्नाथ के करोड़ों भक्तों की भावनाओं का सम्मान करने के साथ-साथ ओडिशा और पश्चिम बंगाल के बीच सांस्कृतिक सौहार्द और आपसी सम्मान को भी मजबूत करेगा।

Topics: FEAUREDWest Bengal Digha Jagannath TempleDigha Jagannath Dham controversySuvendu Adhikari announcementJagannath Dham name rowDigha Jagannath Cultural CentreOdisha West Bengal temple disputeMohan Charan Majhi
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