नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की पहली सरकार बने एक महीना हो गया है। 9 मई वो दिन था जब शुभेंदु अधिकारी ने सूबे के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। 4 मई को जब विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आए तो बंगाल के साथ ही पूरे देश में इस बात का जश्न था कि ममता बनर्जी और TMC के गुंडाराज का अंत हुआ। बंगाल में विकास के एक नये युग की शुरुआत की नींव पड़ी। अपने 30 दिन के शासन में शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल में ऐसे कई परिवर्तन के आदेश दिए जो दशकों से ममता बनर्जी की ‘अनइच्छाशक्ति’ और मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति के कारण रुके हुए थे। ममता बनर्जी ने अपनी राजनीति पश्चिम बंगाल को बांग्लादेश बनाने में खफा दी थी। सूबे में हिंदुओं की अनदेखी और मुस्लिमों को तुष्ट करने वाली नीतियों का बोलबाला था। कानून-व्यवस्था की स्थिति ऐसी थी कि पुलिस की जगह TMC के गुंडे फैसला करते थे और कानूनी धाराएं लगाते थे। महिलाओं के खिलाफ अत्याचार इस कदर बढ़ गए थे कि आरजी कर जैसी घटनाओं ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया था। अब सूबे में सत्ता बदलते ही नीतियां बदलने लगी हैं।
30 दिन में बड़े प्रशासनिक-राजनीतिक बदलाव का गवाह बना बंगाल
पिछले एक महीने में बंगाल में बड़े प्रशासनिक और राजनीतिक बदलाव हुए हैं। शुभेंदु अधिकारी सरकार ने स्कूलों में ‘वंदे मातरम्’ को अनिवार्य कर दिया है। सड़क पर नमाज पढ़ने में अब रोक लगा दी गई है। कैबिनेट की पहली बैठक में ही BSF को 142 एकड़ जमीन देना और टाटा ग्रुप की वापसी जैसे कई फैसले लिए गए। सरकार का एक महीना पूरा होने पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मंगलवार को मेदिनीपुर में प्रशासनिक समीक्षा बैठक की। जिसमें टीएमसी सांसद जून मालिया, विधायक सुइली साहा और संसद दीपक अधिकारी भी शामिल हुए। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इस बैठक में जिले की कानून-व्यवस्था, बाढ़ नियंत्रण, सड़क व स्वास्थ्य परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की और सभी विभागों को 15 दिन में एक्शन टेकेन रिपोर्ट देने का निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मेदिनीपुर की संस्कृति और विकास दोनों सरकार की प्राथमिकता है।

32 लाख महिलाओं को 3-3 हजार, सरकारी बसों में फ्री सफर
शुभेंदु अधिकारी ने बंगाल में भ्रष्टाचार और अवैध घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई करने के साथ कई फैसले लिए। महिलाओं के लिए अन्नपूर्णा योजना लागू की और करीब 32 लाख महिलाओं के खाते में तीन-तीन हजार रुपये आए हैं। सरकारी बसों में महिलाओं के लिए फ्री यात्रा की घोषणा करके नारी शक्ति को बड़ी सौगात दी। शिक्षक भर्ती घोटाले और अन्य कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच शुरु हो गई है। TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी से जुड़े फर्जी हस्ताक्षर मामले में पूछताछ की प्रक्रिया तेज हुई।प्रशासनिक स्तर पर भ्रष्टाचार की जांच के लिए एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में विशेष जांच समिति के गठन किया गया।
30 दिन में सीमा पार से वापस लाए गए 5 हजार लोग
शुभेंदु अधिकारी सरकार ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर निगरानी बढ़ा दी है। सूबे में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी लोगों की वापसी की प्रक्रिया तेज हो गई है। बांग्लादेशी घुसपैठियों को सूबे से अब खदेड़ा जा रहा है। इन घुसपैठियों को ममता बनर्जी ने अपने वोट बैंक के लिए संरक्षण दिया हुआ था। बीजेपी सरकार 30 दिनों के कार्यकाल में करीब पांच हजार बंगाली लोगों को सीमा पार से वापस लाई है।
सूबे में आयुष्मान योजना, सातवें वेतन आयोग के गठन की घोषणा
यह पहली बार है जब पश्चिम बंगाल में बीजेपी सरकार के आते ही आयुष्मान भारत योजना लागू हुई। सूबे में जन औषधि केंद्रों के विस्तार पर जोर दिया गया है। सूबे में टाटा समूह की वापसी को लेकर भी चर्चा तेज है। लंबे समय से रुकी हुई मेट्रो और रेल परियोजनाओं को लेकर भी कार्य जारी है। सातवें वेतन आयोग के गठन की घोषणा को सरकारी कर्मचारी वर्ग एक बड़े निर्णय के रूप में देख रहा है। नई सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, पीएम विश्वकर्मा, पीएम श्री स्कूल, उज्ज्वला योजना, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और पीएम सूर्य घर जैसी कई केंद्रीय योजनाओं को राज्य में लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

सीमा सुरक्षा और अवैध घुसपैठ पर सख्त रुख
भारत-बांग्लादेश सीमा को लेकर सरकार ने पहले महीने में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। सीमा बाड़बंदी के लिए लंबित भूमि हस्तांतरण को प्राथमिकता दी गई है और बीएसएफ को आवश्यक जमीन उपलब्ध कराई गई है। अवैध प्रवासियों की पहचान और निगरानी के लिए होल्डिंग सेंटरों की व्यवस्था को मजबूत किया गया है। हजारों अवैध घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। सरकारी कार्यालयों और आधिकारिक दस्तावेजों में इस्तेमाल होने वाले ‘बिस्वा बांग्ला’ लोगो की जगह राष्ट्रीय अशोक स्तंभ को अपनाने का फैसला किया है। शिक्षा विभाग ने सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में प्रतिदिन वंदे मातरम् गाना अनिवार्य करने का निर्णय लिया है। इसी तरह मदरसों में भी इस व्यवस्था को लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने जरूरतमंद लोगों को रियायती दर पर भोजन उपलब्ध कराने के लिए ‘मां आहार’ योजना की भी घोषणा की है। इस योजना के तहत बेहद कम कीमत पर मछली-भात, अंडा-भात और शाकाहारी भोजन उपलब्ध कराया जाएगा।

















