कोटा । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), चित्तौड़ प्रांत एवं कोटा महानगर द्वारा आयोजित संघ शिक्षा वर्ग (तरुण व्यवसायी एवं विशेष वर्ग) का प्रकट समारोह (समापन) स्वामी विवेकानंद विद्यालय, महावीर नगर तृतीय में अत्यंत उत्साह और अनुशासन के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर स्वयंसेवकों ने राष्ट्र सेवा और समाज निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
मंचासीन अतिथियों की उपस्थिति और मार्गदर्शन
समारोह में कोटा ब्लड बैंक सोसायटी की संस्थापक सदस्य मधु कासलीवाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में मंचासीन अन्य प्रमुख अधिकारियों में शामिल थे:
- ललित शारदा (सर्वाधिकारी, तरुण व्यवसायी वर्ग)
- प्रो. मोहन लाल साहु (सर्वाधिकारी, विशेष वर्ग)
- गोपाल लाल गर्ग (महानगर संघचालक)
- श्रीकांत जी (मुख्य वक्ता एवं क्षेत्रीय बौद्धिक प्रमुख, राजस्थान क्षेत्र)
“संघ का सेवा कार्य समाज के लिए प्रेरणास्रोत” – मधु कासलीवाल
मुख्य अतिथि मधु कासलीवाल ने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए संघ के 100 वर्षों के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पिछले एक शताब्दी से समाज जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में राष्ट्रसेवा और चरित्र निर्माण का अनवरत कार्य कर रहा है।
“संघ ने अनुशासन, संगठन और सेवा के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का अत्यंत महत्वपूर्ण प्रयास किया है। स्वयंसेवकों द्वारा निस्वार्थ भाव से किए जा रहे सेवा कार्य आज संपूर्ण समाज के लिए एक बड़ा प्रेरणास्रोत हैं।”
“संघ कार्य स्वामी विवेकानंद के सपनों का कार्य है” – श्रीकांत
समारोह के मुख्य वक्ता एवं क्षेत्रीय बौद्धिक प्रमुख श्रीकांत जी ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में राष्ट्र और संघ के विचार को गहराई से प्रस्तुत किया।
“किसी राष्ट्र की ऊँचाई को महलों, मीनारों या पर्वतों से नहीं मापा जा सकता है। इसी तरह गहराई कुएं, तालाब और समुद्रों से नहीं मापी जा सकती। राष्ट्र की ऊँचाई मजबूत मन और गहराई हृदय से नापी जाती है। संघ का कार्य वास्तव में स्वामी विवेकानंद के सपनों का कार्य है। संघ का स्वयंसेवक कुछ बोलता नहीं है, बल्कि धरातल पर करके दिखाता है।”
उन्होंने इतिहास का स्मरण कराते हुए कहा कि चाहे आजादी का आन्दोलन हो, विस्थापितों को बसाने का कार्य हो, कश्मीर का विलय हो या 10 सितम्बर 1947 को दिल्ली में विप्लव करने की योजना हो, इन सभी में स्वयंसेवकों ने एकजुट होकर राष्ट्रहित में अपनी महती भूमिका निभाई है। उन्होंने श्री गुरुजी को ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ का विचार जन-जन के हृदय में स्थापित करने वाला और हिंदुत्व का प्रमुख प्रवर्तक बताया।

समाज परिवर्तन के लिए ‘पंच परिवर्तन’ का आह्वान
श्रीकांत जी ने बताया कि संघ अब समाज परिवर्तन में अपनी सक्रिय भूमिका निभा रहा है। उन्होंने समाज से ‘पंच परिवर्तन’ को अपनाने का आह्वान किया, जिसके प्रमुख बिंदु हैं-
- कुटुम्ब प्रबोधन (पारिवारिक मूल्यों का जागरण)
- स्वदेशी (स्थानीय उत्पादों का उपयोग)
- पर्यावरण संरक्षण
- नागरिक कर्तव्य
- सामाजिक समरसता
उन्होंने प्रत्येक परिवार से आह्वान किया कि वे राष्ट्र कार्य में अपना सक्रिय सहयोग दें और बच्चों को नियमित रूप से संघ की शाखाओं में अवश्य भेजें, क्योंकि भविष्य के लिए संस्कारवान पीढ़ी वहीं से मिलेगी।
15 दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग के मुख्य आंकड़े (Highlights)
इस 15 दिवसीय विशेष एवं तरुण व्यवसायी वर्ग में चित्तौड़ प्रांत के 14 प्रशासनिक एवं संघ दृष्टि से 27 जिलों के 130 स्थानों से कुल 150 शिक्षार्थी शामिल हुए। शिक्षार्थियों की व्यावसायिक पृष्ठभूमि कुछ इस प्रकार रही:
- 62 अध्यापक एवं 3 अधिवक्ता
- 12 चिकित्सक एवं 3 अभियंता (इंजीनियर)
- 39 निजी व्यवसायी एवं 24 निजी कर्मचारी
- 1 प्रशासनिक अधिकारी एवं 3 किसान
इसके अलावा वर्ग में 52 प्रबंधकों एवं 30 बस्तियों से 120 सुरक्षा कार्यकर्ताओं ने अपनी सेवाएं दीं। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षार्थियों को सेवा बस्तियों, गौ सेवा एवं परिवारों से संपर्क का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया।
वरिष्ठ प्रचारकों का मिला सानिध्य, प्रदर्शनी रही आकर्षण का केंद्र
इस वर्ग में शिक्षार्थियों को अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य भैयाजी जोशी, वरिष्ठ प्रचारक दुर्गादास, क्षेत्र प्रचारक निंबाराम, क्षेत्र कार्यवाह जशवंत खत्री, क्षेत्र कार्यकारिणी सदस्य हनुमान सिंह, प्रांत कार्यवाह शंकर माली और प्रांत प्रचारक मुरलीधर का विशेष सानिध्य प्राप्त हुआ।
परिसर में एक भव्य प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें भारतीय संविधान, भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती, सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण के 1000 वर्ष, संत रविदास के जीवन-दर्शन और संघ के शताब्दी वर्ष से संबंधित गौरवशाली इतिहास को दर्शाया गया।
मातृशक्ति का अद्भुत समर्पण: 3200 परिवारों ने भेजे 7500 भोजन पैकेट
वर्ग कार्यवाह नारायण लाल ने सभी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से 90 बस्तियों के उन 3200 परिवारों की मातृशक्ति के अद्भुत समर्पण को नमन किया, जिन्होंने प्रशिक्षणार्थियों के लिए प्रतिदिन लगभग 7500 भोजन के पैकेट तैयार कर भेजे।
कार्यक्रम का समापन अत्यंत ही सौहार्दपूर्ण वातावरण में सामाजिक समरसता सहभोज के साथ हुआ।











