जयपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), राजस्थान क्षेत्र के कार्यकर्ता विकास वर्ग प्रथम (सामान्य) का भव्य समापन समारोह शनिवार को जयपुर के आदर्श नगर स्थित सूरज मैदान में संपन्न हुआ। इस समारोह में स्वयंसेवकों ने कठोर शारीरिक प्रशिक्षण, सामूहिक कार्यक्रमों और विविध कौशलों का अत्यंत प्रभावी एवं अनुशासित प्रदर्शन किया।
समारोह के मुख्य अतिथि और प्रमुख वक्ता
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सरदार राजन सिंह (प्रधान, गुरुद्वारा साहिब, जवाहर नगर, टीला नं. 5, जयपुर) उपस्थित रहे। वहीं, समारोह का मुख्य उद्बोधन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, राजस्थान क्षेत्र के क्षेत्र संघचालक डॉ. रमेश अग्रवाल ने दिया।
“राय बनाने से पहले संघ के कार्यों को स्वयं देखें” – सरदार राजन सिंह
मुख्य अतिथि सरदार राजन सिंह ने वर्ग के शिक्षार्थियों द्वारा प्रस्तुत शारीरिक प्रदर्शन एवं अनुशासन की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए स्वयंसेवकों की सामूहिकता, राष्ट्रभक्ति एवं समर्पण को देखकर भारत के उज्ज्वल भविष्य के प्रति उनका विश्वास और अधिक दृढ़ हुआ है।
“राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यों को निकट से देखने और अनुभव करने के पश्चात संघ के प्रति मेरे मन में सम्मान और बढ़ा है। मैं समाज के लोगों से आग्रह करता हूं कि किसी भी संगठन के बारे में मत (Opinion) बनाने से पूर्व उसके कार्यों को स्वयं देखकर और समझकर ही अपनी राय बनानी चाहिए।” – सरदार राजन सिंह
सामाजिक समरसता पर अपने विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं का उल्लेख किया और कहा कि भारतीय संस्कृति का मूल मंत्र एकता, सेवा, परिश्रम और परस्पर सहयोग है। उन्होंने गुरु गोविन्द सिंह और महाराणा प्रताप के बलिदान का स्मरण करते हुए युवाओं से राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का आह्वान किया।

शताब्दी वर्ष: “व्यक्तित्व निर्माण से राष्ट्र निर्माण की सतत साधना है संघ”
क्षेत्र संघचालक डॉ. रमेश अग्रवाल ने अपने उद्बोधन में संघ की 100 वर्षों की यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शताब्दी यात्रा संगठन, समर्पण और राष्ट्र निर्माण की सतत साधना की यात्रा है।
डॉ. अग्रवाल के उद्बोधन के मुख्य बिंदु-
- स्थापना का उद्देश्य: डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने उस समय संघ की स्थापना की जब समाज में निराशा थी। उन्होंने ‘दैनिक शाखा’ के माध्यम से व्यक्तित्व निर्माण से राष्ट्र निर्माण का मार्ग प्रस्तुत किया।
- शाखा का प्रभाव: संघ की शाखा स्वयंसेवकों में अनुशासन, नेतृत्व, सेवा, बंधुता और राष्ट्रभक्ति जैसे असाधारण गुणों का विकास करती है।
- राष्ट्रीय योगदान: पिछले 100 वर्षों में संघ ने विभाजन काल में विस्थापितों की सेवा, गौसंरक्षण, श्रीरामजन्मभूमि आंदोलन, रामसेतु संरक्षण और कोरोना काल सहित अनेक अभियानों में अहम भूमिका निभाई है।
- वैश्विक पटल पर भारत: संघ की प्रेरणा से आज 36 से अधिक संगठन सक्रिय हैं। स्वाभिमान और सांस्कृतिक जागरण के कारण भारत विश्व में अग्रणी भूमिका की ओर बढ़ रहा है।
20 दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग के मुख्य आंकड़े (Highlights)
इस बीस दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग में शिक्षार्थियों ने प्रातः 4:00 बजे से रात्रि 10:15 बजे तक की कठोर और अनुशासित दिनचर्या का पालन करते हुए शारीरिक, बौद्धिक एवं संगठनात्मक प्रशिक्षण प्राप्त किया।
- कुल शिक्षार्थी: वर्ग में 231 स्थानों से 277 शिक्षार्थियों ने सहभागिता की।
- विविधता: इनमें 97 कर्मचारी, 57 व्यवसायी, 8 किसान/श्रमिक तथा 115 महाविद्यालय एवं तकनीकी संस्थानों के विद्यार्थी सम्मिलित रहे।
- प्रबंधन टीम: वर्ग के सफल संचालन में 40 शिक्षक, 37 प्रबन्धक, 21 विभाग प्रमुख तथा 3 प्रान्त प्रमुखों ने अपना दायित्व निभाया।
- मुख्य गतिविधियां: योग, व्यायाम, खेल, दण्ड-प्रशिक्षण के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, वृक्ष संरक्षण, जल संरक्षण और जैविक खाद निर्माण जैसे व्यावहारिक कार्य भी सम्पन्न किए गए।
समापन समारोह में संघ के क्षेत्रीय एवं प्रान्तीय अधिकारी, गणमान्य नागरिक, अभिभावक तथा बड़ी संख्या में स्वयंसेवक और शहरवासी उपस्थित रहे।












