गुजरात में एक पारसी महिला का अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाज से किया गया। पारसी महिला ने वर्षों पहले एक मुस्लिम प्रोफेसर से शादी की थी। वह नवसारी में एक स्थानीय कॉलेज मे पढ़ाते थे और महिला वहां पर गुजराती भाषा में स्नातक की पढ़ाई कर रही थीं। समय के साथ दोनों में निकटता बढ़ी और शादी करने का मन बनाया।
पारसियों में समुदाय से बाहर शादी करने को लेकर बहुत कठोर नियम हैं। पारसी समुदाय में अगर लड़की अपने समुदाय से बाहर शादी करती है तो उसे समाज से बाहर कर दिया जाता है।
इसको लेकर हाल ही मे सबरीमाला मामले में विभिन्न धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के साथ भेदभाव और अलग-अलग धर्मों में धार्मिक स्वतंत्रता के दायरे से जुड़े मामलों की सुनवाई के संदर्भ में सर्वोच्च न्यायालय ने टिप्पणी की थी, ‘अनुच्छेद 25(1) के तहत अंत:करण का अधिकार जन्मजात अधिकार है और इसे विवाह द्वारा छीना नहीं जा सकता। इस मामले में वर्गीकरण के आधार पर विवाह, महिलाओं के विरुद्ध भेदभावपूर्ण है।’ यह टिप्पणी शायद दीना बुधराज महिला की याचिका के संदर्भ में की गई थी, जिस पर अभी 9 जजों की संविधान पीठ सुनवाई कर रही है। दीना बुधराज ने एक हिंदू से विवाह किया था और उन्हें उनकी दादी के अंतिम संस्कार में इसी कारण शामिल नहीं होने दिया गया था, क्योंकि उन्होनें एक हिंदू से शादी की थी। वह नासिक पारसी पंचायत के इस निर्णय के विरोध में न्यायालय गई थीं और अब इस पर 9 जजों की संविधानपीठ सुनवाई कर रही है।
गुजरात में इसी तरह का मामला
ऐसा ही कुछ इस महिला के साथ भी हुआ। उन्होंने शादी तो एक मुस्लिम से की थी, मगर इस्लाम नहीं अपनाया। वह जीवन भर पारसी पंथ का पालन करती रहीं, मगर उन्हें समाज से निकाल दिया गया। उन्हें उनके भाई और बहन की शादी में भी शामिल होने की अनुमति नहीं थी। इस दम्पत्ति की कोई संतान नहीं है और सोमवार को अचानक से ही महिला की तबीयत बिगड़ी और उन्हें एक पारसी अस्पताल मे भर्ती कराया गया, जहां उनकी मृत्यु हो गई। चूंकि उन्होंने इस्लाम नहीं अपनाया था, इसलिए उनके पति ने पारसी समुदाय के लोगों से संपर्क किया कि उनकी पत्नी का अंतिम संस्कार पारसी रीति-रिवाज के अनुसार किया जाए, मगर लोगों ने मना कर दिया। उनके माता-पिता इस दुनिया में नहीं हैं, तो उनके भाई-बहन को बुलाया गया। इसी दौरान जब कोई फैसला नहीं हो पाया तो महिला के एक रिश्तेदार ने ही विश्व हिन्दू परिषद के स्थानीय नेता से सहायता मांगी।
देखते ही देखते उस महिला के अंतिम संस्कार की व्यवस्था हिन्दू धर्म में हो गई। शुक्रवार को उनका शव श्मशान घाट पर उनके घरवाले लेकर गए और परिवार वालों की उपस्थिति में उनका अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाज से कर दिया गया।
संजय खान की पारसी पत्नी जरीन का भी हिंदू रीति-रिवाजों से हुआ था अंतिम संस्कार
हाल ही में अभिनेता संजय खान की पारसी पत्नी जरीन का अंतिम संस्कार भी चर्चा में रहा था। हिंदू परंपरा के अनुसार अंतिम संस्कार किया गया था और उनके बेटे जायद खान ने उन्हें मुखाग्नि दी थी। वीडियो चर्चा का विषय रहा था, जिसमें जायद खान हाथ में मटका लिए हुए और गले में जनेऊ पहने हुए दिखाई दे रहे थे और फिर उनके अस्थि विसर्जन के भी वीडियो सामने आए थे। इस पर जायद खान का कहना था कि उनकी मां ने पारसी पंथ छोड़ा नही था और वे चाहती थीं कि उनका अंतिम संस्कार या तो पारसी तरीके से हो या फिर हिंदू रीति-रिवाज से। इसलिए उनका अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार किया गया था।
सामाजिक बहिष्कार का वर्ष 2017 में भी आया था मामला
वर्ष 2017 में भी दो पारसी महिलाओं को लेकर ऐसा ही मामला सामने आया था, जब समुदाय से बाहर विवाह करने वाली दो महिलाओं ने अपने प्रियजनों के अंतिम संस्कार में शामिल न हो पाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुप्रीम कोर्ट ने पारसी समुदाय से इस मामले पर प्रगतिशील रुख अपनाने का अनुरोध किया था। उसके बाद वलसाड पारसी पंचायत ने इन दोनों महिलाओं को अपने प्रियजनों के अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति दे दी थी।
















