उत्तर प्रदेश के संभल में नखासा क्षेत्र के कसेरुआ गांव में अवैध दो मंजिला मस्जिद को बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया गया। यह मस्जिद सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करके बनाई गई थी। ध्वस्तीकरण की इस कार्रवाई के दौरान मस्जिद के अंदर “आई लव मोहम्मद” के पोस्टर भी मिले हैं।
ग्रामीणों की शिकायत पर शुरू हुई कार्रवाई
जिला प्रशासन की ओर से कहा गया है कि ग्रामीणों ने कब्रिस्तान की भूमि सुरक्षित कराने के लिए शिकायत की थी। राजस्व विभाग की टीम ने जांच में पाया कि कब्रिस्तान की जमीन पर मस्जिद बनाकर कब्जा किया गया था। इसके बाद राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत कार्रवाई शुरू की गई। वाद की सुनवाई के दौरान मस्जिद कमेटी को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया। मस्जिद कमेटी कोई भी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाई।
इसके बाद तहसील न्यायालय से बेदखली का आदेश पारित किया गया।
तहसील न्यायालय के आदेश के बाद ध्वस्तीकरण
तहसीलदार न्यायालय से गत 21 अप्रैल को मस्जिद कमेटी को बेदखली का आदेश दिया गया। मस्जिद कमेटी ने जिलाधिकारी न्यायालय में अपील की। जिलाधिकारी न्यायालय से मस्जिद कमेटी को स्थगन आदेश नहीं मिला था। इसके बाद जिला प्रशासन ने शनिवार को मस्जिद पर बुलडोजर चलाकर उसे ध्वस्त कर दिया।
इस कार्रवाई के लिए तहसीलदार, नायब तहसीलदार एवं राजस्व विभाग की टीम के साथ भारी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया। मौके पर चार जेसीबी, डंपर और ट्रैक्टर को ध्वस्तीकरण के लिए लगाया गया।
सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे का मामला
जानकारी के अनुसार, गाटा संख्या-409 कब्रिस्तान की जमीन है। इस भूमि पर मस्जिद का निर्माण किया गया था। इसी हिस्से पर तीन अन्य मकान भी अवैध ढंग से बनाए गए थे।
गाटा संख्या-410, जो खाद गड्ढे के लिए राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है, उस भूमि पर 8 मकानों का निर्माण कराया गया था। वहीं गाटा संख्या-411, जिसे राजस्व रिकॉर्ड में वृक्षारोपण के लिए दर्ज किया गया था, उस भूमि पर खेती कराई जा रही थी।
प्रशासन का कहना है कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। राजस्व अभिलेखों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
जनवरी 2026 में दर्ज हुआ था मुकदमा
उल्लेखनीय है कि लेखपाल की शिकायत पर वर्ष 2026 के जनवरी महीने में सात लोगों के खिलाफ अभियोग पंजीकृत किया गया था।
लेखपाल की तहरीर में कहा गया था कि गलत तथ्य और दस्तावेज प्रस्तुत कर भूमि को वक्फ संपत्ति घोषित कराने का प्रयास किया गया। ग्राम समाज की संपत्ति पर अवैध कब्जा किया गया।












