उत्तर प्रदेश के संभल जिले में गुरुवार 16 अप्रैल 2026 को प्रशासन ने एक बड़ी कार्रवाई की। बिछौली गांव में सरकारी जमीन पर बने इमामबाड़ा और ईदगाह को बुल्डोजर से हटा दिया गया। यह काम सुबह से दोपहर तक चला। इलाके में पहले से ही काफी तनाव था, इसलिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।
क्या है पूरा मामला
मामला कुछ यूं है कि कार्रवाई संभल शहर से थोड़ी दूर बिछौली गांव में हुई, जो कोतवाली पुलिस क्षेत्र में आता है। चंदौसी रोड के किनारे यह जगह है। जिन दो संरचनाओं को ध्वस्त किया गया वह इमामबाड़ा गाटा नंबर 1240 पर बना था। यह जमीन पशु चारे के गड्ढों (मैन्योर पिट) के लिए रिजर्व थी। क्षेत्रफल करीब 0.166 हेक्टेयर यानी करीब 2.5 बीघा था। इसके अलावा जिस ईदगाह को ध्वस्त किया गया वह गाटा नंबर 1242 पर थी। यह चारागाह थी। क्षेत्रफल करीब 0.766 हेक्टेयर यानी करीब 12.5 बीघा था। दोनों ही जगहों पर अवैध कब्जा बताकर इन्हें हटाया गया। प्रशासन के अनुसार कुल मिलाकर करीब सात बीघा सरकारी जमीन पर ये निर्माण थे।
कार्रवाई कैसे हुई
सुबह एसडीएम निधि पटेल और नायब तहसीलदार दीपक जुरेल की अगुवाई में राजस्व विभाग की टीम पहुंची। साथ में दो राजस्व निरीक्षक और सात लेखपाल थे। चार बुल्डोजर लगाए गए। टीम के साथ भारी पुलिस फोर्स थी। स्थानीय लोग वहां जमा हो गए थे। कुछ ने इमामबाड़े की रेलिंग खुद तोड़ दी। पुलिस और पीएसी ने भीड़ को हटाया ताकि काम बिना रुकावट हो सके। डीएम और एसपी भी मौके पर पहुंचे और पूरी प्रक्रिया देखी।
सुरक्षा के इंतजाम
इलाके में कोई अनहोनी न हो, इसके लिए पांच थानों की पुलिस फोर्स तैनात की गई। एक कंपनी पीएसी और आरआरएफ के जवान भी थे। भारी संख्या में पुलिसकर्मी मौजूद रहे। प्रशासन ने इसे संवेदनशील मामला मानते हुए सुरक्षा को प्राथमिकता दी।
पीछे की कहानी और कारण
यह कार्रवाई अचानक नहीं हुई। तीन महीने पहले इन जगहों की नाप-जोख की गई थी। अवैध कब्जे की शिकायत पर जनवरी 2026 में केस दर्ज हुआ। तहसीलदार कोर्ट ने नोटिस जारी किए, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। अंत में तहसीलदार कोर्ट से बेदखली का आदेश मिला।
प्रशासन का कहना है कि ये जमीनें सरकारी हैं। जिनका इस्तेमाल पशुओं के चारे के लिए। यहां निजी निर्माण अवैध था। एसडीएम निधि पटेल ने कहा कि दोनों गाटा नंबरों पर सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा था, इसलिए कोर्ट के आदेश के मुताबिक कार्रवाई की गई। मौके पर लोग काफी परेशान दिखे, लेकिन पुलिस की मौजूदगी में काम पूरा होता रहा। प्रशासन ने साफ कहा कि सरकारी जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराना उनका काम है।












