पश्चिम बंगाल में 4 जून को चुनाव परिणाम के बाद तृणमूल कांग्रेस पार्टी में हाहाकार मचा हुआ है। तृणमूल कांग्रेस की अंदरूनी कलह अब खुलकर सामने आती जा रही है। एक समय तृणमूल कांग्रेस पार्टी में ममता बनर्जी का एक ही इशारा आदेश माना जाता था, मगर वर्तमान में अब उनके नेतृत्व और पार्टी के भविष्य पर सवाल उठ रहे हैं।
ममता बनर्जी के नेतृत्व पर उठने लगे सवाल
सत्ता की कुर्सी से हटते ही तृणमूल कांग्रेस पार्टी में अब ममता बनर्जी के खिलाफ विद्रोह का बिगुल बुलंद होता जा रहा है। ममता बनर्जी द्वारा बुलाई गई पार्टी की एक अहम बैठक में मात्र आठ विधायक और छह सांसद ही पहुंचे हैं। हालांकि तृणमूल कांग्रेस ने इसको लेकर अपनी सफाई देते हुए कहा है कि बैठक में सभी नेताओं को नहीं बुलाया गया था।
विधायकों और सांसदों के बगावती तेवर
दूसरी तरफ तृणमूल कांग्रेस पार्टी के लिए मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। पार्टी के नवनिर्वाचित विधायक और सांसदों ने बगावती तेवर अपना लिए हैं। पार्टी के अनेक विधायकों के फोन बंद हैं। पार्टी के विधायक और सांसद विधानसभा चुनाव में पार्टी की बुरी हार के लिए ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी को दोषी मान रहे हैं। उन्हें लग रहा है कि ममता बनर्जी के नेतृत्व में अब पार्टी कभी भी चुनाव नहीं जीत सकती है। इस कारण वे सभी अभी से नया नेता चुनना चाह रहे हैं।
पार्टी बैठकों में लगातार घट रही विधायकों की संख्या
विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद तृणमूल कांग्रेस पार्टी की बैठकों में विधायकों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। चुनाव के बाद बुलाई गई पहली बैठक में खबरों के मुताबिक पार्टी के 70 विधायकों ने भाग लिया था, वहीं एक अन्य बैठक में 20 विधायकों ने भागीदारी की थी।
ममता बनर्जी द्वारा बुलाई गई आखिरी बैठक में मात्र आठ विधायक और छह सांसदों ने ही शिरकत करके यह स्पष्ट कर दिया है कि अब उनका ममता बनर्जी के नेतृत्व में विश्वास नहीं बचा है।
ममता बनर्जी द्वारा बुलाई गई आखिरी बैठक में शामिल आठ विधायकों में बीना मंडल, असीमा पात्रा, मदन मित्रा, कुणाल घोष, फिरहाद हकीम, शोभनदेव चट्टोपाध्याय, विमान चटर्जी और अशोक कुमार देव शामिल हुए। इसके अलावा छह सांसदों में डोला सेन, माला रॉय, कल्याण बनर्जी, अभिषेक बनर्जी, डेरेक ओ’ब्रायन और सुदीप बंदोपाध्याय बैठक में शामिल हुए।
चुनाव परिणाम के बाद पार्टी का आंतरिक असंतोष खुलकर सामने आ गया है और पार्टी के अधिकतर विधायक ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी से नाराज हैं।
फिरहाद हकीम के इस्तीफे से बढ़ी परेशानी
इसके साथ ही ममता बनर्जी को अब एक और बड़ा झटका लगा है, जब फिरहाद हकीम ने कोलकाता मेयर के पद से इस्तीफा दे दिया है। तृणमूल कांग्रेस पार्टी में सिर्फ विधायक और सांसद ही नहीं, बल्कि 100 से ज्यादा पार्टी पार्षदों ने भी पार्टी का दामन छोड़ दिया है।
अन्य दलों से अलग स्थिति में तृणमूल कांग्रेस
तृणमूल कांग्रेस पार्टी इकलौती ऐसी पार्टी है जो चुनाव हारने के बाद इस प्रकार की समस्या से जूझ रही है। बिहार में राजद 2025 में, उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी 2017 और 2022 में बुरी हार के बाद भी पार्टी में टूट नहीं हुई है। तमिलनाडु में द्रमुक की हार के बावजूद भी पार्टी एकजुट है।
ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष चुनने की चर्चा
खबरों के मुताबिक तृणमूल कांग्रेस पार्टी के लगभग 60 विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष चुन लिया है। तृणमूल कांग्रेस पार्टी इस फैसले के खिलाफ कोलकाता हाईकोर्ट में जाने का मन बना रही है।
तृणमूल कांग्रेस पार्टी विधानसभा अध्यक्ष द्वारा ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष की मान्यता देने के फैसले को चुनौती देने के लिए सोमवार को कोलकाता उच्च न्यायालय जाएगी। यह जानकारी ममता बनर्जी के करीबी सांसद और वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने दी।
कल्याण बनर्जी ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि पार्टी विधानसभा अध्यक्ष के फैसले के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ेगी।












