संभल। उत्तर प्रदेश के संभल जनपद में प्रशासन ने सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी और सख्त कार्रवाई की है। जनपद के बाघऊ गांव में ‘खेरे वाले बाबा चमन शाह बाबा दरगाह शरीफ मजार’ के नाम पर बनाए गए अवैध मजहबी निर्माण को प्रशासन ने बुलडोजर की मदद से जमींदोज कर दिया है।
क्या है अवैध कब्जे का पूरा मामला?
उपजिलाधिकारी (SDM) के निर्देश पर राजस्व विभाग की टीम ने इस स्थल की सघन जांच की थी। जांच रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि गाटा संख्या 592 की सार्वजनिक भूमि में से 24 वर्गमीटर क्षेत्र पर बाघऊ गांव के ही निवासी अजीज का अवैध कब्जा था।
रिपोर्ट के अनुसार- आज से लगभग 5 साल पहले ‘ज्यारत’ के नाम पर धीरे-धीरे इस जमीन पर अवैध ढंग से कब्जा किया गया और फिर वहां एक पक्का मजहबी निर्माण (मजार) करा दिया गया था।
तहसीलदार कोर्ट से जुर्माना, DM कोर्ट से अपील खारिज
तहसीलदार न्यायालय में इस वाद (केस) की विधिवत सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद न्यायालय ने न केवल अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया, बल्कि अतिक्रमणकारी अजीज पर 39 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
इस फैसले के खिलाफ अजीज ने जिलाधिकारी (DM) के न्यायालय में इस आदेश को चुनौती दी। हालांकि, 3 जून 2026 को जिलाधिकारी न्यायालय ने साक्ष्यों के अभाव में अजीज के वाद (अपील) को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिसके बाद कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया।
भारी पुलिस बल की मौजूदगी में चला बुलडोजर
डीएम कोर्ट से फैसला आते ही प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद हो गया। तहसीलदार, नायब तहसीलदार और राजस्व विभाग के अन्य अधिकारियों की टीम थाना बबराला, गुन्नौर पुलिस और पीएसी (PAC) के जवानों के साथ मौके पर पहुंची। भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मौके पर बुलडोजर मंगवाकर इस अवैध निर्माण को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया गया।
जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल का स्पष्ट बयान
जिलाधिकारी (DM) अंकित खंडेलवाल ने कार्रवाई की जानकारी देते हुए कहा-
“यह पूरा मामला सार्वजनिक जमीन पर अतिक्रमण से जुड़ा था। राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत तहसीलदार न्यायालय में वाद दर्ज कर सुनवाई की गई थी, जिसमें अतिक्रमण साबित हुआ। सभी पक्षों की सुनवाई और साक्ष्यों की गहन जांच के बाद ही अपील खारिज की गई है। कब्जे के पक्ष में कोई भी ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया जा सका। विधिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई है।”












