हरिद्वार/रुड़की । भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) रुड़की में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रचार विभाग, उत्तराखंड द्वारा एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर (Sunil Ambekar) ने राष्ट्र निर्माण, सांस्कृतिक विरासत और तकनीकी के सही उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि हमें ‘जीवन मूल्य आधारित’ विकसित भारत का निर्माण करना है।
“बाजार नहीं, हम तय करेंगे अपनी सभ्यता”
श्री आंबेकर ने हजारों साल पुरानी भारतीय सांस्कृतिक विरासत का स्मरण कराते हुए आधुनिक तकनीक के प्रभाव पर गहरी चिंता और विचार व्यक्त किए।
तकनीक और संस्कृति पर विचार-
“अभी तक बाजार (Market) और तकनीक (Technology) ने हमारी सभ्यता का निर्धारण किया है, लेकिन अब हमें खुद तय करना होगा कि हम अपनी महान संस्कृति के अनुसार कैसे जिएं। हमें अब ‘चॉइस ऑफ टेक्नोलॉजी’ (Choice of Technology) की ओर मजबूती से कदम बढ़ाना होगा।”
वैश्विक पटल पर भारत की बढ़ती साख
उन्होंने विकास की आवश्यकता को स्वीकार करते हुए कहा कि हमें आधुनिक विकास भी करना है, लेकिन इसकी नींव हमारी अपनी संस्कृति और जीवन मूल्यों पर आधारित होनी चाहिए।
- आज भारत की क्षमता और सामर्थ्य पर पूरे विश्व का भरोसा बढ़ा है।
- दुनियाभर में भारत के प्रति चिंतन-मनन और दृष्टिकोण में सकारात्मक बदलाव आया है।
- हमारा लक्ष्य केवल आर्थिक विकास नहीं, बल्कि एक मूल्य-आधारित (Value-Based) समाज की स्थापना करना है।
“संस्कार परिवार से आते हैं, आउटसोर्स से नहीं”
व्यक्ति निर्माण में ‘परिवार’ की सबसे अहम भूमिका पर प्रकाश डालते हुए सुनील आंबेकर जी ने आधुनिक समाज को एक कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि “संस्कार परिवार से आते हैं, उन्हें कहीं बाहर से आउटसोर्स (Outsource) नहीं किया जा सकता।” एक सशक्त राष्ट्र के निर्माण के लिए एक सुदृढ़ और संस्कारवान परिवार इकाई का होना अत्यंत आवश्यक है।
इस बौद्धिक संगोष्ठी के अवसर पर IIT रुड़की के कई प्रबुद्धजन, शिक्षाविद और छात्र बड़ी संख्या में उपस्थित रहे, जिन्होंने इन विचारों पर गहन मंथन किया।












