देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में जिलाधिकारी (DM) के सख्त निर्देशों के बाद प्रशासन ने एफआरआई (FRI) रेंजर्स कॉलोनी के बाहर स्थित मजार के पास लगने वाले ‘प्रसाद’ के बाजार को नहीं लगने दिया। प्रशासन की इस त्वरित कार्रवाई से क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।
क्या है मजार से जुड़ा पूरा विवाद?
उल्लेखनीय है कि कॉन्वेंट रोड पर स्थित इस मजार को लेकर पिछले लंबे समय से विवाद चल रहा है।
अवैध कब्जे का आरोप-
आरोप है कि यह मजार वन विभाग (Forest Department) की सरकारी भूमि पर अवैध रूप से बनाई गई थी। बाद में सुनियोजित तरीके से इसे वक्फ संपत्ति (Waqf Property) के रूप में दर्ज करा दिया गया। भूमि के स्वामित्व को लेकर यह मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है।
नगर निगम और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई
इस अतिक्रमण को हटाने के लिए नगर मजिस्ट्रेट (City Magistrate) प्रत्यूष सिंह और नगर निगम की टीम भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची।
- टीम ने मजार के बाहर कॉन्वेंट रोड पर लगे सभी प्रसाद के खोकों (दुकानों) को तत्काल प्रभाव से हटवा दिया।
- दुकानदारों को सख्त चेतावनी दी गई है कि भविष्य में यदि यहां दोबारा दुकानें लगाई गईं, तो उनके खिलाफ कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
खादिम को थमाया जाएगा नोटिस
सिटी मजिस्ट्रेट प्रत्यूष सिंह ने बताया-
“इस अवैध बाजार और खोकों के कारण सड़क पर अतिक्रमण हो रहा था, जिससे यातायात बुरी तरह प्रभावित हो रहा था। इसी वजह से जनहित में इन्हें हटाया गया है। आगे भी अतिक्रमण पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रशासन अब मजार के प्रबंधन पर भी शिकंजा कसने की तैयारी कर रहा है। खबर है कि मजार के खादिम को जल्द ही एक औपचारिक नोटिस जारी किया जा रहा है, जिसमें उन्हें भूमि से संबंधित सभी वैध कागज और दस्तावेज प्रस्तुत करने का निर्देश दिया जाएगा।















