छिन्नोऽपि रोहति तरुः क्षीणोऽपिउपचीयते पुनश्चन्द्रः।
इति विमृशन्तः सन्तः सन्तप्यन्ते न दुःखेषु ।।
हिन्दी अर्थ-
कट जाने पर भी पेड़ बढ़ता है (पनपता है) तथा क्षीण हो जाने पर भी चन्द्रमा पुनः बढ़ता है। इसी प्रकार विचार करने वाले पुरुष विपत्ति में घबराते नहीं हैं।
















