इंडी गठबंधन की बैठक 8 जून को संभावित है। खबरों के मुताबिक इस बैठक में 17 विपक्षी पार्टियों के शामिल होने की उम्मीद है। इसमें सभी दल भाजपा और एनडीए के खिलाफ अपनी भविष्य की रणनीति पर विचार करेंगे। इंडी गठबंधन की यह बैठक हकीकत में इन दलों के अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए बुलाई जाने वाली बैठक है। 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद हुए विधानसभा के सभी चुनावों में इंडी गठबंधन के दलों के खराब प्रदर्शन के कारण इन दलों को अपने अस्तित्व पर ही खतरा नज़र आ रहा है। इस कारण सभी दल एक-दूसरे के साथ अपनी पहचान बनाए रखने के लिए बैठक करने को मजबूर हैं।
कांग्रेस, तृणमूल और वाम दलों के बीच विरोधाभास
इस बैठक में कांग्रेस पार्टी, ममता बनर्जी और वाम दलों के शामिल होने की चर्चा है। जबकि अभी सम्पन्न हुए पाँच प्रदेशों के विधानसभा चुनावों में इन दलों ने एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ा है। पश्चिम बंगाल और केरल में कांग्रेस पार्टी और वाम दलों ने एक-दूसरे के खिलाफ पूरी मजबूती से चुनाव लड़ा है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में राहुल गांधी ने ममता बनर्जी के खिलाफ काफी विषवमन किया है।
बिहार चुनाव के बाद बढ़ी विपक्ष की चिंता
लोकसभा चुनाव के बाद होने वाले विधानसभा चुनावों में इंडी गठबंधन के दल सिर्फ चुनाव नहीं हार रहे हैं, बल्कि उनका राजनीतिक अस्तित्व ही खतरे में होता जा रहा है। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में इंडी गठबंधन का इतना बुरा हश्र हुआ है कि राजद मुश्किल से विपक्षी दल की भूमिका ले सकी। वहीं कांग्रेस पार्टी की सीटें 19 से घटकर 6 पर आ गई हैं।
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की हार का असर
वर्तमान में देश में सबसे मजबूत क्षेत्रीय दल तृणमूल कांग्रेस पार्टी को माना जाता था और ममता बनर्जी को सबसे मजबूत क्षेत्रीय नेता। मोदी विरोधी नेताओं को उम्मीद थी कि तृणमूल कांग्रेस पार्टी पश्चिम बंगाल में भाजपा को करारी मात देगी और यहाँ से भाजपा तथा मोदी का प्रभाव कम होगा। मगर हुआ इसके उलट और ममता बनर्जी की पार्टी बुरी तरह हार गई है। इससे ममता बनर्जी से ज्यादा इंडी गठबंधन के अन्य दलों में मायूसी का भाव आया कि जब तृणमूल कांग्रेस जैसी पार्टी इतनी बुरी हार सकती है, तो उनका राजनीतिक अस्तित्व भी संकट में पड़ सकता है।
लोकसभा चुनाव बाद सम्पन्न विधानसभा चुनावों में इंडी गठबंधन का कमजोर प्रदर्शन
| प्रदेश | कुल सीटें | लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा गठबंधन को प्राप्त विधानसभा सीटें | पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा गठबंधन को प्राप्त सीटें | लोकसभा चुनाव 2024 में कांग्रेस गठबंधन को प्राप्त विधानसभा सीटें | पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस गठबंधन को प्राप्त सीटें |
|---|---|---|---|---|---|
| बिहार | 243 | 174 | 202 | 62 | 35 |
| जम्मू-कश्मीर | 90 | 29 | 29 | 48 | 43 |
| महाराष्ट्र | 288 | 128 | 237 | 151 | 50 |
| दिल्ली | 70 | 52 | 48 | 8 | 0 |
| हरियाणा | 90 | 44 | 48 | 46 | 37 |
| झारखंड | 81 | 52 | 24 | 29 | 56 |
| पश्चिम बंगाल | 294 | 90 | 208 | 204 | 90 |
| असम | 126 | 95 | 102 | 31 | 24 |
| पुडुचेरी | 30 | 2 | 18 | 28 | 6 |
| कुल | 1312 | 666 | 916 | 607 | 341 |
महाराष्ट्र में लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा और एनडीए का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा था, मगर विधानसभा चुनाव में भाजपा-नीत एनडीए ने रिकॉर्ड जीत दर्ज करके इंडी गठबंधन के दलों — एनसीपी (एसपी), शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस पार्टी — के अस्तित्व को ही खतरे में डाल दिया है।
तमिलनाडु में द्रमुक और कांग्रेस के बीच बढ़ती दूरी
इंडी गठबंधन के दलों में वर्तमान में सबसे मजबूत दल तमिलनाडु और पुडुचेरी की द्रमुक है। यद्यपि तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में द्रमुक चुनाव हार गई है, इसके बावजूद भी यह दल इस गठबंधन में सबसे मजबूत है। मगर चुनाव बाद कांग्रेस पार्टी ने द्रमुक को धोखा देते हुए सत्ताधारी जोसेफ विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम के साथ गठबंधन कर लिया है। कांग्रेस पार्टी ने द्रमुक को धोखा सिर्फ सत्ता की लोलुपता के लिए दिया है। कांग्रेस पार्टी को तमिलगा वेत्री कड़गम ने अपनी सरकार में दो मंत्रालयों की जिम्मेदारी दी है। 1967 के बाद पहली बार कांग्रेस पार्टी को तमिलनाडु में सत्ता में भागीदारी मिली है।
इंडी गठबंधन की बैठक में द्रमुक पर सबकी निगाह टिकी हुई है क्योंकि द्रमुक कांग्रेस पार्टी के धोखे के कारण नाराज़ है। द्रमुक की लोकसभा नेता कनिमोझी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर अपनी पार्टी के सदस्यों को लोकसभा में कांग्रेस से अलग सीट आवंटन का अनुरोध किया है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के बीच बढ़ती खटास
इस बैठक में न सिर्फ द्रमुक बल्कि केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की नेशनल कॉन्फ्रेंस पार्टी पर भी सबकी नज़र है। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अपने मंत्रिमंडल में कांग्रेस पार्टी के प्रदेश के छह विधायकों में से किसी को भी स्थान नहीं दिया है, जबकि निर्दलीय विधायक सतीश शर्मा को शामिल किया है। यह कांग्रेस पार्टी के लिए असहनीय पीड़ा है।
इसके साथ ही नेशनल कॉन्फ्रेंस हाल के दिनों में कांग्रेस पार्टी और इंडी गठबंधन के दलों की अपेक्षा भाजपा और एनडीए दलों के साथ ज्यादा नज़दीक दिख रही है। इससे पूर्व भी नेशनल कॉन्फ्रेंस वाजपेयी के समयकाल में भाजपा और एनडीए के साथ गठबंधन कर चुकी है और उमर अब्दुल्ला वाजपेयी मंत्रिमंडल का हिस्सा रह चुके हैं।
झामुमो की भूमिका पर भी बना हुआ है संशय
इसके अलावा झारखंड के मुख्यमंत्री और झामुमो प्रमुख हेमंत सोरेन के भी इस बैठक में शामिल होने पर असमंजस है। झामुमो ने प्रदेश में कांग्रेस पार्टी के साथ सरकार में होने के बावजूद भी असम में कांग्रेस के खिलाफ चुनाव लड़ा है। पश्चिम बंगाल में झामुमो ने कांग्रेस पार्टी के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस पार्टी के पक्ष में खुलकर चुनावी प्रचार किया है। इसके अलावा भी झामुमो ने कई अवसरों पर कांग्रेस पार्टी के खिलाफ रुख अपनाया है।
समाजवादी पार्टी, राजद और शिवसेना (यूबीटी) की संभावित भागीदारी
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, राजद नेता तेजस्वी यादव और शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे के भी इस बैठक में शामिल होने की उम्मीद है। आम आदमी पार्टी, जिसने हाल ही में इंडी गठबंधन से नाता तोड़ लिया है, उसके शामिल होने की संभावना कम है। इसका एक अन्य कारण यह है कि कांग्रेस पंजाब में मुख्य विपक्षी दल है और अगले वर्ष पंजाब में आम आदमी पार्टी तथा कांग्रेस पार्टी को एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ना है।
विपक्षी एकता की कोशिश और बैठक का महत्व
यह इंडी गठबंधन के दलों की आपसी एकता दिखाने की कोशिश के रूप में भी देखा जा सकता है। पिछली बार इंडी गठबंधन के दलों की बैठक 2023 के दिसंबर में हुई थी। इस बैठक में हर लोकसभा सीट पर साझा उम्मीदवार देने पर दलों में सहमति बनी थी, मगर यह कई राज्यों में लागू नहीं हो सका था।
लोकसभा चुनाव के बाद हुए विधानसभा चुनावों में विपक्षी पार्टियों को मिली हार को देखते हुए यह बैठक अहम मानी जा रही है।











