अमेरिका औऱ इजरायल ने मिलकर ईरान पर 28 फरवरी 2026 को हमला किया था। इसके बाद सभी को अहसास हो गया था कि करीब एक माह के अंदर ही ईरान घुटने टेक देगा। क्योंकि, ईरान ज्यादातर फायर पॉवर को नष्ट कर दिया गया था। अब जून शुरू होने के बाद भी ईरान इस युद्ध में न केवल टिका हुआ है, बल्कि वो अमेरिका जैसे बाहुबली के सामने तनकर खड़ा है। अब इसकी वजह खुलकर सामने आ गई है और वो ये कि चीन अलग-अलग तरीके से ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की बैलिस्टिक मिसाइल बनाने में मदद कर रहा है।
ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, उसे कुछ लीक दस्तावेज़ मिले हैं, जो बताते हैं कि चीनी कंपनी हाओकुन एनर्जी ने तुर्की और UAE की कंपनियों के साथ मिलकर IRGC को बैलिस्टिक मिसाइल बनाने के लिए जरूरी केमिकल्स पहुंचाने में मदद की। ये दस्तावेज़ हैकर ग्रुप प्रण ने हासिल किए और ईरान इंटरनेशनल के साथ शेयर किए। इससे ये भी राज खुले हैं कि कैसे अमेरिकी प्रतिबंधों को बाईपास करने के लिए चीन ने कंपनियों के नेटवर्क का इस्तेमाल किया।
बंदर अब्बास पोर्ट ब्लास्ट
ये दस्तावेज़ 26 अप्रैल 2025 को बंदर अब्बास के शहीद राज़ई पोर्ट पर हुए घातक विस्फोट को सोडियम परक्लोरेट की खेप से जोड़ते हैं। ये केमिकल सॉलिड मिसाइल ईंधन बनाने में इस्तेमाल होता है। ब्लास्ट और मौजूदा प्रतिबंधों की वजह से अब ऐसी खेप भेजने के लिए जहाज ढूंढना मुश्किल हो गया है।
चीनी कंपनी हाओकुन एनर्जी है मास्टरमाइंड
इस नेटवर्क में सबसे अहम भूमिका हाओकुन एनर्जी (Haokun Energy) की है। ये कंपनी कई सालों से IRGC के तेल को चाइनीज रिफाइनरियों तक पहुंचाने का काम करती रही है। अमेरिका ने चार साल पहले इसे IRGC की कुद्स फोर्स को फंडिंग देने के आरोप में प्रतिबंधित कर दिया था। एक सूत्र के मुताबिक, हाओकुन का अभी भी IRGC को तेल के बदले 1 बिलियन डॉलर से ज्यादा का भुगतान बकाया है।
GDCP और Mosta कंपनी
हाओकुन एनर्जी के एक दस्तावेज़ में Golden Globe Demir Celik (GDCP) नाम की कंपनी के साथ रासायनिक उत्पादों की सप्लाई का समझौता बताया गया है। गोपनीयता बनाए रखने के लिए एक्सपोर्ट परमिट्स क्लासिफाइड चैनल्स से जारी किए गए। हाओकुन एनर्जी ने Mosta नाम की कंपनी बनाई, जिसके जरिए बैंक गारंटी ली गई। Mosta पर GDCP का नियंत्रण है, क्योंकि प्रतिबंधों के कारण इसके बोर्ड में कोई ईरानी नागरिक नहीं हो सकता।
हाओकुन एनर्जी ने चाइनीज कस्टम्स के साथ मिलकर गोपनीय तरीके से काम किया और ईरानी साथी से कहा कि कोई जानकारी बाहर न लीक हो।

शिपमेंट का प्लान
दस्तावेज़ बताते हैं कि हाओकुन GDCP के जरिए ईरान को 2,000 टन सोडियम क्लोरेट और 10,000 टन सोडियम परक्लोरेट भेजने वाला था। ये मात्रा करीब 2,500 बैलिस्टिक मिसाइलों के सॉलिड ईंधन के लिए काफी है। पूरी खेप की कीमत 43 मिलियन डॉलर बताई गई।
GDCP का ईरानी कनेक्शन क्या है
दावा किया जा रहा है कि GDCP तुर्की में पंजीकृत है, लेकिन इसके लीक ईमेल एक ईरानी नागरिक मोहम्मदरेज़ा सद्र ने साइन किए थे। हाओकुन के पत्रों में GDCP को इस्लामिक रिपब्लिक का बताया गया। एक ईमेल में हाओकुन का पत्र “कमांडर मोहम्मदरेजा” को संबोधित था। कहा जा रहा है कि ये अहमद मोहम्मदरेजा हो सकता है, जो IRGC नेवी के पूर्व डिप्टी कोऑर्डिनेटर और महमूद अहमदीनेजाद के समय बूशहर के गवर्नर रह चुके हैं। पहले की रिपोर्ट्स में उन्हें IRGC के तेल बिक्री नेटवर्कपौरजाफ़री मुख्यालय से भी जोड़ा गया था।
GDCP IRGC की ओर से बैलिस्टिक मिसाइल ईंधन के कच्चे माल की खरीद और तेल बिक्री का काम भी करती है। एक दस्तावेज़ में GDCP खार्ग द्वीप से 20 लाख बैरल तेल UAE की फॉर्च्यून कंपनी को बेचने की तैयारी कर रही थी। पैसे का लेन-देनएक दस्तावेज़ में GDCP को करीब 3 मिलियन डॉलर क्रिप्टोकरेंसी में ट्रांसफर किए गए। ये पैसे तेहरान के टूरिज्म बैंक की बोर्ज ए आसेमन ब्रांच में जमा हुए। तेल बिक्री से मिले पैसे का बड़ा हिस्सा चीन से सोडियम परक्लोरेट खरीदने में लग रहा है। हाओकुन इन लेनदन को ब्रोकर के रूप में IRGC को हथियार, मिसाइल ईंधन सामग्री आदि बेचकर अपना बकाया चुकाने की कोशिश कर रही है।
पिछले साल ILNA ने रिपोर्ट किया था कि हाओकुन ने तेल के बदले सामान की डील में दो Airbus A330 विमान ईरान को 116 मिलियन डॉलर में बेचे, जबकि उनका असली मार्केट वैल्यू करीब 60 मिलियन डॉलर था। पिछले एक साल में चीन से ईरान को सोडियम परक्लोरेट की कई खेपों की खबरें आई हैं। ये दस्तावेज़ अब तक का सबसे साफ लिखित सबूत देते हैं कि चाइनीज कंपनियां IRGC को मिसाइल ईंधन सामग्री सप्लाई करने में शामिल रही हैं।

















