केंद्र सरकार लंबे समय से “एक देश-एक चुनाव” (वन नेशन, वन इलेक्शन) की योजना पर काम कर रही है। इसका उद्देश्य लोकसभा और विधानसभा चुनावों को एक साथ कराना है, ताकि बार-बार होने वाले चुनावों से बचा जा सके और सरकारी खर्च व समय की बचत हो।
जल्द शुरू हो सकता है ‘एक देश-एक चुनाव
इस योजना पर विचार कर रही संयुक्त संसदीय समिति (JPC) दो चरणों में इसे लागू करने के विकल्प पर चर्चा कर रही है। सूत्रों के अनुसार, पहले चरण में 2029 के लोकसभा चुनाव के साथ करीब 20 राज्यों के विधानसभा चुनाव कराए जा सकते हैं। इसके बाद दूसरे चरण में 2034 तक बाकी राज्यों को भी इसी चुनावी चक्र में शामिल करने की योजना है। इससे पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने का लक्ष्य पूरा हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना को लागू करने के लिए संविधान में पर्याप्त विकल्प मौजूद हैं। कुछ राज्यों में विधानसभा चुनाव समय से पहले कराए जा सकते हैं, जबकि कुछ राज्यों के कार्यकाल में सीमित बदलाव भी किया जा सकता है। हालांकि इसके लिए संसद की मंजूरी और राजनीतिक सहमति जरूरी होगी। दरअसल, भारत में 1952 से 1967 तक लोकसभा और अधिकांश राज्यों के विधानसभा चुनाव एक साथ होते थे। लेकिन बाद में कई राज्य सरकारों के समय से पहले गिरने और लोकसभा के कार्यकाल से पहले भंग होने के कारण यह व्यवस्था टूट गई। इसके बाद अलग-अलग समय पर चुनाव होने लगे।
एक देश-एक चुनाव के प्रभाव को समझने के लिए JPC विभिन्न राज्यों का दौरा कर रही है। महाराष्ट्र और उत्तराखंड में समिति ने मुख्यमंत्री, प्रशासनिक अधिकारियों और अन्य संगठनों से चर्चा की। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि बार-बार चुनाव होने से पिछले तीन वर्षों में लगभग 175 दिन आचार संहिता लागू रही, जिससे विकास कार्य प्रभावित हुए। उनका यह भी कहना था कि एक साथ चुनाव कराने से चुनावी खर्च में 30 से 35 प्रतिशत तक की बचत हो सकती है। संयुक्त संसदीय समिति को अपनी रिपोर्ट 2026 के मानसून सत्र तक सौंपनी है। इसके बाद संसद में इस विषय पर चर्चा होगी और आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी। गौरतलब है कि इस विषय पर विचार करने के लिए केंद्र सरकार ने 2023 में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक समिति बनाई थी। समिति ने व्यापक अध्ययन और विभिन्न पक्षों से चर्चा के बाद अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंप दी थी।

















