बद्रीनाथ नगरी: कहते हैं कि भगवान बद्री विशाल के दर पर आने वाला कोई भी श्रद्धालु कभी निराश नहीं लौटता। आज इस बात को देवभूमि के जांबाज जवानों ने एक बार फिर साबित कर दिखाया। महाराष्ट्र से अपने 13 साथियों के साथ भगवान बद्रीनाथ के दर्शन करने आईं श्रद्धालु संगीता विजय जायसवाल अचानक धाम परिसर की भारी भीड़ में अपने समूह से बिछड़ गईं।
उल्लेखनीय है कि इन दिनों श्रीबदरीनाथ धाम में भारी भीड़ और कई किमी लंबी लाइन में श्रद्धालु भगवान के दर्शनों के इंतजार में रहते है। दर्शन के दौरान मोबाइल भी प्रतिबंधित रहता है। अनजान जगह, भाषा की अनभिज्ञता और अपनों से दूर होने के डर से संगीता जी पूरी तरह घबरा गईं और उनकी आँखों से बेबसी के आँसू बहने लगे।
जवानों ने संगीता को बचाया
जब वह रोती-बिलखती हुई बदहवास हालत में ढूंढ रही थीं, तभी वहां मुस्तैद जवानों की नजर उन पर पड़ी। ड्यूटी पर तैनात कांस्टेबल गौरव रावत और पीआरडी जवान दिनेश कुमार ने तुरंत स्थिति की संवेदनशीलता को समझा। जवानों ने न सिर्फ उन्हें ढांढस बंधाया, बल्कि एक सजग प्रहरी की तरह तुरंत उनके परिजनों की खोजबीन शुरू कर दी। जवानों की कई घंटों की कड़ी मशक्कत और तत्परता का नतीजा यह रहा कि संगीता के परिजनों को ढूंढ निकाला गया। जब सुरक्षा कक्ष में संगीता ने अपने परिवार को देखा, तो दोनों पक्षों के सब्र का बांध टूट गया। रोते हुए एक-दूसरे के गले लगकर परिवार ने जो राहत की सांस ली, उसने वहां मौजूद हर शख्स की आँखें नम कर दी।
परिजनों ने रुंधे गले और नम आँखों से पुलिस कांस्टेबल गौरव तथा पीआरडी जवान दिनेश कुमार का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संकट की इस घड़ी में दोनों जवान उनके लिए किसी देवदूत से कम नहीं थे। भावुकता, राहत और कृतज्ञता से भरे इन पलों के बीच परिवार का सुखद पुनर्मिलन हुआ, जिसके बाद वे पुनः मुस्कुराते हुए अपनी पावन यात्रा पर आगे बढ़ गए।

















