रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह को डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट विभाग के सचिव और DRDO के चेयरमैन का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। यह व्यवस्था डॉ. समीर वी. कामत के 31 मई 2026 को अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद शुरू हुई है। यह अंतरिम व्यवस्था तब तक चलेगी जब तक नियमित व्यक्ति की नियुक्ति नहीं हो जाती या कोई और आदेश जारी नहीं होता।
सरकार ने यह फैसला भारत के रक्षा क्षेत्र में हो रहे बड़े बदलाव के समय लिया है। रक्षा उत्पादन 1.5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो चुका है, निर्यात भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा है। सेना अब स्वदेशी क्षमताओं पर जोर दे रही है, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोनॉमस सिस्टम, साइबर वारफेयर, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर, क्वांटम टेक्नोलॉजी, एडवांस्ड मटेरियल और स्पेस आधारित सैन्य एप्लिकेशन्स में।
कौन हैं राजेश कुमार सिंह
राजेश कुमार सिंह 1989 बैच के आईएएस अधिकारी हैं, केरल कैडर के। उन्होंने नवंबर 2024 में रक्षा सचिव का पद संभाला। इससे पहले वे DPIIT में सचिव रह चुके हैं। वहां उन्होंने मैन्युफैक्चरिंग मजबूत करने, निवेश आकर्षित करने और औद्योगिक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने का काम किया।
इसे भी पढ़ें: NEET परीक्षा और पेपर पर CBI का बयान-निष्कर्ष तक पहुंचाएंगे जांच को, NTA ने CBT पर दिया जोर
DRDO की उपलब्धियां और चुनौतियां
DRDO ने पिछले कई दशकों में भारत की रक्षा क्षमता को मजबूत किया है। अग्नि और पृथ्वी मिसाइल परिवार, आकाश एयर डिफेंस सिस्टम, अस्त्र मिसाइल, रडार, नौसेना सिस्टम और कई स्वदेशी सेंसर-वेपन सिस्टम इसके बड़े उदाहरण हैं। इनकी वजह से विदेशी आपूर्ति पर निर्भरता काफी कम हुई है। फिर भी संगठन पर देरी, प्रोजेक्ट ओवररन और लैब से फैक्ट्री तक टेक्नोलॉजी ट्रांसफर में दिक्कतों की आलोचना भी होती रही है। कई प्रोग्राम्स तय समय से ज्यादा लंबे चल गए और इंडस्ट्री की भागीदारी कम रही।
आज की चुनौती सिर्फ टेक्नोलॉजी की नहीं, बल्कि संस्थागत भी है। दुनिया भर में सफल रक्षा इकोसिस्टम में मिलिट्री यूजर्स, स्टार्टअप्स, प्राइवेट इंडस्ट्री, एकेडेमिया और सरकार के बीच घनिष्ठ सहयोग होता है। रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व के हालातों से पता चला कि ड्रोन, ऑटोनॉमस सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर, प्रिसीजन मुनिशन्स और AI जैसी चीजें कितनी तेजी से युद्ध को बदल रही हैं।
भारत को दोहरी चुनौती का सामना कर रहा है, एक तरफ मिसाइल, एयरोस्पेस, अंडर वाटर प्लेटफॉर्म जैसी जटिल परियोजनाओं पर काम जारी रखना, दूसरी तरफ नई टेक्नोलॉजीज को जल्दी टेस्ट, प्रोक्योर और डिप्लॉय करने के तरीके ढूंढना।
अवसर और आगे का रास्ता
राजेश कुमार सिंह के पास अब रक्षा नीति, प्रोक्योरमेंट, इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट और DRDO — सब कुछ एक साथ देखने का मौका है। इससे रिसर्च, मिलिट्री जरूरतों और मैन्युफैक्चरिंग के बीच बेहतर तालमेल बन सकता है। आत्मनिर्भर भारत के तहत स्वदेशी उत्पादन अब सिर्फ आयात कम करने का नहीं, बल्कि निर्यात, हाई-स्किल जॉब्स और ग्लोबल सप्लायर बनने का भी साधन बन रहा है।
DRDO को प्राइवेट इंडस्ट्री, स्टार्टअप्स और यूनिवर्सिटी के साथ और गहरे संबंध बनाने होंगे। AI, सेमीकंडक्टर, साइबर सिक्योरिटी, क्वांटम, डायरेक्टेड एनर्जी वेपन्स जैसी क्षेत्रों में तेजी लानी होगी। टैलेंट को आकर्षित और बनाए रखना भी बड़ी जरूरत है। निर्यात के लिए लागत, क्वालिटी, सप्लाई चेन और आफ्टर सेल्स सपोर्ट पर भी ध्यान देना पड़ेगा।

















