नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने संसदीय समिति को बताया कि वो NEET पेपर लीक जैसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए ठोस कदम उठा रही है। इस लीक से लाखों छात्र-छात्राओं पर असर पड़ा है। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने भी कहा कि काउंसलिंग का सीट मैट्रिक्स समय पर तैयार रखा जाएगा ताकि छात्रों को और परेशानी न हो।
CBI की जांच पर क्या कहा?
CBI डायरेक्टर प्रवीण सूद ने सरकारी आश्वासनों वाली संसदीय समिति को बताया कि जांच को उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जाएगा। इसमें और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। जो लोग इसकी जानकारी रखते हैं, उन्होंने यह बात बताई। समिति की बैठक में 2024 के NEET पेपर अनियमितताओं पर चर्चा होनी थी, लेकिन सांसदों ने इस बार के लीक पर अपनी नाराजगी जताई। इस लीक के चलते परीक्षा रद्द कर दी गई और 21 जून को दोबारा परीक्षा होनी है। सांसदों ने अधिकारियों से पूछा कि जांच कहां तक पहुंची है और परीक्षा को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए क्या कर रहे हैं।
NTA का नया प्लान
NTA की तरफ से डायरेक्टर जनरल अभिषेक सिंह और अन्य अधिकारी बैठक में शामिल हुए। NTA ने कहा कि अगले साल से NEET को कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) में बदल दिया जाएगा। साथ ही सवालों का पूल बहुत बड़ा कर दिया जाएगा। इससे JEE की तरह कई अलग-अलग सेट बनेंगे, जिससे लीक का खतरा काफी कम हो जाएगा।
काउंसलिंग पर फोकस
उच्च शिक्षा मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव भी समिति के सामने पेश हुए। समिति की अध्यक्षता AIADMK के एम थांबी दुरई ने की। सांसदों ने कहा कि काउंसलिंग समय पर हो और अलग-अलग कैटेगरी में सीटों का बंटवारा सही तरीके से हो।
NMC चेयरमैन अभिजात चंद्रकांत शेठ ने आश्वासन दिया कि जरूरी कदम उठाए जाएंगे ताकि छात्रों का समय न बर्बाद हो। NTA ने यह भी बताया कि वो अन्य सभी स्टेकहोल्डर्स के साथ लगातार बातचीत कर रही है ताकि परीक्षा प्रणाली और ज्यादा मजबूत और सुरक्षित बने।
जहां तक जरूरत पड़ेगी वहां तक जाएगी जांच
यह बैठक ऐसे समय हुई जब NEET 2026 में पेपर लीक की घटना सामने आई। पहले 2024 में भी अनियमितताएं देखी गई थीं। छात्र लंबे समय से परीक्षा की सच्चाई और पारदर्शिता को लेकर चिंतित हैं। NTA और CBI दोनों ही इस मामले में सक्रिय हैं। NTA का मानना है कि CBT मोड और बड़े प्रश्न बैंक से भविष्य में ऐसी समस्याएं कम होंगी। CBI ने कहा है कि जांच पूरी निष्पक्षता से चलेगी और जहां तक जरूरत पड़ेगी, वहां तक जाएगी। समिति के सदस्यों ने अधिकारियों से सवाल पूछे कि भविष्य में लीक रोकने के लिए क्या-क्या बदलाव किए जा रहे हैं।
















