जबलपुर / सिवनी। सिवनी में आयोजित राष्ट्र सेविका समिति के 15 दिवसीय ‘प्रवेश शिक्षा वर्ग’ का भव्य समापन समारोह उत्साह और राष्ट्रभक्ति के माहौल में संपन्न हुआ। इस अवसर पर शिक्षिकाओं और सेविकाओं ने शारीरिक और मानसिक अनुशासन का उत्कृष्ट प्रदर्शन कर उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कबीर के दोहों के साथ अद्भुत शारीरिक प्रदर्शन
समापन समारोह की शुरुआत शिक्षार्थियों द्वारा किए गए शानदार शारीरिक और सांस्कृतिक प्रदर्शन से हुई। सेविकाओं ने कबीर के दोहों के गायन के साथ अत्यंत सुव्यवस्थित तरीके से निम्नलिखित कलाओं का प्रदर्शन किया:
- योगासन और गणसमता: शरीर और मन के संतुलन का अद्भुत दृश्य।
- दंड और यष्टि: आत्मरक्षा और शक्ति का सशक्त प्रदर्शन।
- नियुद्ध (मार्शल आर्ट): बिना हथियारों के युद्ध कौशल।
- योगचाप और घोष: विभिन्न रचनाओं और तालबद्ध धुनों का मनमोहक वादन।
हिन्दू राष्ट्र का पुनर्निर्माण हमारा ध्येय: मनीषा संत
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित राष्ट्र सेविका समिति की अखिल भारतीय शारीरिक शिक्षण प्रमुख श्रीमती मनीषा संत ने समिति की स्थापना, कार्य और इसके व्यापक उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा, “अपना इतिहास साक्षी है कि भारत प्रारंभ से ही एक राष्ट्र रहा है। भले ही राज्य अलग रहे हों, राज्यों के अपने नीति-नियम रहे हों, लेकिन हमारी समान भूमि, समान इतिहास, समान मान्यता, परंपरा और संस्कृति रही है। इसीलिए हम अपने ध्येय में ‘हिन्दू राष्ट्र का पुनर्निर्माण’ कहते हैं। इसका अर्थ यही है कि पहले ही यह एक तेजस्वी हिन्दू राष्ट्र था।”
मनीषा जी ने स्पष्ट किया कि कालान्तर में परिस्थितियां बदलीं और मूल्यों का पतन हुआ, लेकिन अब समय आ गया है कि अपने राष्ट्र को पुनः तेजस्वी, विकसित और परम वैभव संपन्न बनाया जाए।
‘स्व’ तंत्र के आधार पर बनेगा विश्वगुरु भारत
अपने ओजस्वी संबोधन में मनीषा संत ने कहा कि हमें भारत का नवोत्थान करना है। “भारत को यहां की जीवन दृष्टि के आधार पर ‘भारत’ ही बनाना है, ‘India’ नहीं। भारत के ‘स्व’ तंत्र के आधार पर, अपने विचार और अपनी संस्कृति के बल पर हमें विकसित और विश्वगुरु भारत का निर्माण करना है।”
उन्होंने जीवन मूल्यों पर जोर देते हुए कहा कि हमारे पूर्वजों ने व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन का उत्तम मार्गदर्शन दिया है। हिन्दुत्व कोई संप्रदाय नहीं, बल्कि एक जीवन दर्शन और जीवनमूल्य है। हमें मूल्याधारित जीवनशैली को अपने आचरण और कृतियों में उतारना होगा।

परिवार, समाज और राष्ट्र का संरक्षण सेविकाओं का कर्तव्य
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित सहायक संचालक (उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग) डॉ. आशा उपवंशी ने सेविकाओं का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि हम सभी सेविकाओं को सदैव जागृत रहकर अपने परिवार, समाज और राष्ट्र का संरक्षण करना है तथा अपनी महान संस्कृति को सहेज कर रखना है।
शिक्षा वर्ग की एक झलक:
प्रवेश वर्ग की वर्गाधिकारी शिखा राय ने शिविर का विस्तृत वृत्त (रिपोर्ट) प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि इस 15 दिवसीय कड़े प्रशिक्षण वर्ग में महाकौशल प्रान्त के 9 विभागों के 22 जिलों से कुल 101 शिक्षार्थियों ने भाग लिया और राष्ट्र सेवा का संकल्प लिया।


















