वैंकूवर (कनाडा)। कनाडा में सरकार बदलने के बावजूद भी खालिस्तानी तत्वों के हौसले कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। वहां की धरती पर एक बार फिर भारत विरोधी गतिविधियों ने एक बेहद शर्मनाक रूप ले लिया है। वैंकूवर में भारतीय उच्चायुक्त दिनेश पटनायक के काफिले को खालिस्तान समर्थकों ने घेर लिया और सरेआम भारतीय तिरंगे का अपमान किया।
हैरानी की बात यह रही कि प्रतिबंधित आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) से जुड़ा कट्टरपंथी इंदरजीत गोसल सुरक्षा घेरा तोड़कर सीधे उच्चायुक्त की गाड़ियों के एकदम सामने पहुंच गया। उसने भारतीय ध्वज को फाड़ने और पैरों तले रौंदने की कोशिश की। आसपास मौजूद भीड़ लगातार भारत विरोधी नारे लगाती रही, जबकि कनाडाई सुरक्षा व्यवस्था महज तमाशबीन बनी दिखाई दी।
कार्यक्रम में जा रहे थे उच्चायुक्त, पुलिस पहुंची देर से
यह गंभीर घटना उस समय घटी जब भारतीय उच्चायुक्त एक निर्धारित कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। जानकारी के मुताबिक, खालिस्तानी समर्थक वहां पहले से ही घात लगाए जमा थे। जैसे ही भारतीय काफिला वहां पहुंचा, उन्होंने माहौल को उग्र बना दिया। कनाडाई पुलिसकर्मी काफी देर बाद दौड़ते हुए मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक खालिस्तानियों के दुस्साहस और तिरंगे के अपमान का वीडियो पूरी दुनिया देख चुकी थी।
कौन है इंदरजीत गोसल?
सुरक्षा घेरा तोड़ने वाला इंदरजीत सिंह गोसल कनाडा में सक्रिय खालिस्तानी नेटवर्क का एक अहम मोहरा है।
- गोसल को खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू का बेहद करीबी माना जाता है।
- हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद कनाडा में खालिस्तानी गतिविधियों को आगे बढ़ाने में गोसल का नाम लगातार सबसे आगे रहा है।
- हाल ही में हिंदू मंदिरों के बाहर हुई हिंसा, धमकी और उग्र प्रदर्शनों में भी इसी कट्टरपंथी का नाम जुड़ चुका है।
अपनी इस शर्मनाक हरकत को सही ठहराने के लिए गोसल ने उल्टे भारतीय उच्चायुक्त पर ही जान से मारने की साजिश रचने का बेबुनियाद आरोप लगा दिया। बिना किसी प्रमाण के लगाए गए इन मनगढ़ंत आरोपों की आड़ में खालिस्तानी समर्थक लगातार जहर उगलते नजर आए।
भारतीय समुदाय में भारी रोष
भारत सरकार लंबे समय से कनाडा को चेतावनी देती रही है कि वहां चरमपंथी तत्वों को खुली छूट मिल रही है, जिससे राजनयिकों की सुरक्षा खतरे में है। मगर हर बार ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ (Freedom of Expression) के नाम पर भारत विरोधी ताकतों को संरक्षण मिलता दिखाई देता है।
इस घटना को लेकर वहां रह रहे भारतीय समुदाय में भारी रोष है। कनाडा निवासी जोगिंदर सिंह ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि, “तिरंगे का अपमान केवल एक झंडे का अपमान नहीं है, बल्कि यह पूरे भारत और करोड़ों भारतीयों की भावनाओं पर सीधा हमला है।”
घटना के बाद, भारतीय उच्चायुक्त दिनेश पटनायक ने कनाडाई संस्थाओं पर भरोसा जताते हुए स्पष्ट किया कि भारत और कनाडा के बीच सुरक्षा सहयोग मजबूत है। उन्होंने खालिस्तानियों द्वारा उनके नाम पर फैलाए जा रहे दावों को सिरे से भ्रामक और निराधार बताया।
हालांकि, इस पूरी घटना ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि कनाडा में बैठे खालिस्तानी चरमपंथियों के हौसले लगातार बेलगाम हो रहे हैं और वहां भारत विरोध को स्पष्ट रूप से राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है।











