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उत्तराखंड-हरियाणा से पहले हिमाचल-पंजाब जैसे कई विवाद, नागरिकों की सजगता में समाधान

हरिद्वार में सामने आई एक ताजा घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि धार्मिक स्थलों की गरिमा की जिम्मेदारी केवल शासन और प्रशासन की है या समाज की भी।

Written byराजेश शांडिल्यराजेश शांडिल्य — edited by Lalit Fulara
May 27, 2026, 05:50 pm IST
in विश्लेषण, मत अभिमत

हरिद्वार में सामने आई एक ताजा घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि धार्मिक स्थलों की गरिमा की जिम्मेदारी केवल शासन और प्रशासन की है या समाज की भी। गंगा घाट पर शराब के नशे में धुत अभद्र हरकतें करने वाले दो लोगों की गतिविधियों को एक जागरूक नागरिक ने कैमरे में कैद कर पुलिस कार्रवाई तक पहुंचाया। यह घटनाक्रम बताता है कि उपद्रवियों से निपटने का रास्ता भीड़ तंत्र या हिंसा से नहीं,बल्कि जागरूकता से प्रमाण जुटा कर भी निकलता है।

यही किया हरिद्वार के तीर्थ पुरोहित उज्ज्वल पंडित ने। हाल ही में हरियाणा के दो शरारती तत्वों की हरकतों को अपने कैमरे में कैद किया। बताया जा रहा है कि दोनों शराब के नशे में धुत थे। वीडियो में एक व्यक्ति लड़खड़ाते हुए चलता दिखाई देता है, जबकि दूसरा उसे संभालते हुए आगे बढ़ रहा है। यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब कुछ दिन पहले ऋषिकेश में हरियाणा के दो युवकों से जुड़ा घटनाक्रम मीडिया और सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा का विषय बना है।

ताजा वीडियो के अनुसार गंगा घाट पर चलते समय उक्त व्यक्तियों में से एक ने पहले राहगीर को टांग मारकर गिराने का असफल प्रयास किया। इसके कुछ कदम बाद ही एक दुकान के बाहर खड़ी महिला श्रद्धालु के निकट पहुंचा और गलत नीयत से हाथ मारते हुए आगे निकल गया। भीड़भाड़ के कारण महिला को तत्काल घटना की गंभीरता का आभास नहीं हुआ और तपाक से पीछे मुड़कर देखते हुए उसने इसे सामान्य धक्का-मुक्की समझकर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

सकारात्मक पक्ष यह रहा कि यहां ऋषिकेश जैसी स्थिति उत्पन्न नहीं हुई। इसकी बड़ी वजह रहे तीर्थ पुरोहित उज्ज्वल पंडित। जिन्होंने संयम और समझदारी का परिचय देते हुए पूरी घटना को कैमरे में रिकॉर्ड किया तथा पुलिस को सूचना दी। इसके बाद पुलिस ने दोनों व्यक्तियों को गंगा तट पर स्नान करते समय हिरासत में लेकर कानूनी कार्रवाई शुरू की। ऐसे तत्वों के कारण पूरे हरियाणा को जिस प्रकार की शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है, उसे देखते हुए समाज को इनके प्रति नरमी नहीं, बल्कि कठोर कानूनी कार्रवाई का समर्थन करना चाहिए। दुर्भाग्यपूर्ण यह भी है कि सोशल मीडिया पर कुछ लोग ऐसे शरारती तत्वों के समर्थन में खड़े दिखाई देते हैं। धर्म, कर्म और भारतीय संस्कृति से जिनका कोई सरोकार नहीं है, वे केवल अपने सोशल मीडिया अकाउंट के व्यू और फालोअर की संख्या बढ़ाने और विवादास्पद टिप्पणियों के माध्यम से चर्चा में बने रहने का प्रयास करते हैं।हालांकि यह सिर्फ व्यू और फालोअर बढ़ाने भर का खेल नहीं,बल्कि एक गलत नैरेटिव गढ़ने का भी गेम है।

ऋषिकेश में हुए घटनाक्रम की वास्तविकता चाहे जो भी हो, उससे पहले यह स्वीकार करना आवश्यक है कि किसी भी व्यक्ति के साथ भीड़ द्वारा किया गया उस हद तक का दुर्व्यवहार निंदनीय और अस्वीकार्य है। साथ ही यह विचार का विषय भी है कि ऐसी परिस्थितियां पैदा क्यों होती हैं। समाधान हालात को जान समझ कर तथ्यों और कानून के आधार पर होना चाहिए, न कि भावनात्मक प्रतिक्रियाओं और क्षेत्रीय कटुता के माध्यम से। यह कहना कि किसी राज्य के पर्यटक न आएं तो फलां राज्य भूखा मर जाएगा, सामाजिक सौहार्द को कमजोर करने वाली सोच है।

ऋषिकेश के घटनाक्रम का अनूठे ढंग से बदला लेने की एक वीडियो पार्किंग जोन से निकल कर आई है। पार्किंग स्थल का यह वीडियो भी चर्चा में है, जिसमें उत्तराखंड पंजीकरण संख्या वाले वाहनों को पूर्व घटनाओं की याद दिलाते हुए बाहर किया जा रहा है। यह प्रवृत्ति भी गलत है। इससे राज्यों के बीच भाईचारा नहीं, बल्कि अविश्वास और अराजकता का वातावरण पैदा होगा, जिसका नुकसान निर्दोष लोगों को उठाना पड़ेगा।वैसे यह पहला मामला नहीं,इसी तरह के घटनाक्रम पंजाब से जाने वाले सिख श्रद्धालुओं और हिमाचल प्रदेश वासियों के भी सामने आ चुके है। शरारती तत्व चाहे हरियाणा के हों, उत्तराखंड के हों या किसी अन्य राज्य के, उनसे निपटने का सबसे प्रभावी तरीका कानून सम्मत कार्रवाई है। उज्ज्वल पंडित जैसे जागरूक नागरिकों की सतर्कता यह सिद्ध करती है कि केवल मारपीट या हंगामे से नहीं, बल्कि प्रमाण जुटाकर भी ऐसे लोगों को कानून के कटघरे में खड़ा किया जा सकता है। इससे न केवल उन्हें कानूनी दंड मिलेगा, बल्कि परिवार, रिश्तेदारों, पड़ोस और समाज के सामने भी उन्हें अपने गलत आचरण के कारण अपमान का दंश झेलना पड़ेगा।

यकीनन हरिद्वार और ऋषिकेश जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों पर पुलिस प्रशासन, संस्थागत व्यवस्थाएं, सीसीटीवी की तीसरी नजर और जिम्मेदार नागरिकों की सजगता ऐसे मामलों की रोकथाम में महत्वपूर्ण सिद्ध होगी । जाहिर है कि पावन धार्मिक स्थलों पर लोग अपने परिवार, महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के साथ शांति, सद्भाव, सौहार्द और आध्यात्मिक शक्ति का अनुभव करने आते हैं, न कि उपद्रव,हो हुल्लड़ और अशांति देखने। प्रशासन की प्राथमिकता में उन तत्वों पर प्रभावी नियंत्रण हो, जो धार्मिक स्थलों को मनोरंजन, विलासिता या मनमानी का केंद्र समझने की भूल करते हैं। आस्था का सम्मान हर व्यक्ति का अधिकार है,जो इसका महत्व जानते हैं,वे इस तरह की गलती तो दूर,गलती करने वाले को भी स्वीकार नहीं करते, लेकिन अहंकार के वशीभूत जो पावन स्थलों पर आकर गरिमा भंग करने का काम करते हैं उनका भूत सजगता और कानून के डंडे से उतारा जा सकता है।

Topics: UttarakhandMischievous TouristsTourists Roaming in Rishikesh After Consuming AlcoholHaryanvi Tourists Controversy
राजेश शांडिल्य
राजेश शांडिल्य
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