Quad: विदेश मंत्रियों की बैठक में हुए अहम समझौते, पहली बार हिंद-प्रशांत क्षेत्र समुद्री निगरानी गठजोड़ की पहल
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Quad: विदेश मंत्रियों की बैठक में हुए अहम समझौते, पहली बार हिंद-प्रशांत क्षेत्र समुद्री निगरानी गठजोड़ की पहल

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर की मेजबानी में मंगलवार को 'क्वाड' देशों के विदेश मंत्रियों की एक बेहद महत्वपूर्ण और सार्थक बैठक संपन्न हुई

Written byएजेंसीएजेंसी
May 26, 2026, 11:32 pm IST
in विश्व
क्वाड में शामिल भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री

क्वाड में शामिल भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री

नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, जापान एवं भारत के चतुष्कोणीय रणनीतिक गठजोड़ क्वाड के विदेश मंत्रियों की आज यहां संपन्न बैठक में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री निगरानी, ऊर्जा सुरक्षा तथा दुर्लभ खनिज के उत्खनन, शोधन एवं आपूर्ति श्रृंखला को लेकर अहम फैसले लिए गए।

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर की मेजबानी में मंगलवार को ‘क्वाड’ देशों के विदेश मंत्रियों की एक बेहद महत्वपूर्ण और सार्थक बैठक संपन्न हुई जिसमें अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो, ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग, जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी ने भाग लिया। इस बैठक में तीन पहलों के साथ ही क्वाड की पहलों पर हुई प्रगति की व्यापक समीक्षा की गई, प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र के घटनाक्रमों सहित आपसी हित के अन्य वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया गया।

एस जयशंकर का बयान

बैठक के बाद विदेश मंत्री जयशंकर ने इस रणनीतिक बैठक के नतीजों को साझा किया और कहा कि ये सफल बैठक इस बात का संकेत है कि आज के इस विश्व में, जहाँ एक ओर अनेक चुनौतियाँ हैं, वहीं दूसरी ओर अनेक अवसर भी मौजूद हैं—और ऐसे समय में हमारा आपसी सहयोग कितना घनिष्ठ है। बैठक के बाद जारी किए गए संयुक्त वक्तव्य और फैक्टशीट में बैठक के फैसलों, पहलों और अन्य रणनीतिक सहयोगों का विस्तृत विवरण दिया गया है।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री निगरानी

तीन पहलों में से एक में क्वाड साझेदारों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में क्वाड देशों की समुद्री निगरानी का लाभ उठाने के लिए पहली बार ‘हिंद-प्रशांत क्षेत्र समुद्री निगरानी गठजोड़ पहल शुरू की है। इसका उद्देश्य सूचना साझा करने और समुद्री क्षेत्र की जागरूकता क्षमता को बढ़ाना है, जिसमें शुरुआती ध्यान हिंद महासागर क्षेत्र पर केंद्रित होगा। इसके साथ ही, विषय विशेषज्ञों के आदान-प्रदान और टेबलटॉप अभ्यासों के माध्यम से भी इस क्षमता को विकसित किया जाएगा।

क्वाड देशों के बीच दूसरी पहल

दूसरा, क्वाड देशों ने नए ‘क्वाड क्रिटिकल मिनरल्स इनिशिएटिव फ्रेमवर्क’ की घोषणा की। यह फ्रेमवर्क क्वाड देशों को आर्थिक नीति के साधनों का लाभ उठाने और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला (जिसमें खनन, प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण शामिल है) को मजबूत करने के लिए निवेश में तालमेल बिठाने में मार्गदर्शन देगा।

ऊर्जा सुरक्षा पर विशेष ध्यान

तीसरी पहल में क्वाड देशों ने ‘हिंद-प्रशांत क्षेत्र ऊर्जा सुरक्षा पर क्वाड पहल’ की घोषणा की, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय ऊर्जा लचीलेपन को मजबूत करने में मदद करना है। हर देश अपने-अपने ऊर्जा क्षेत्रों के अनूठे संसाधनों और क्षमताओं का लाभ उठाएगा। इस पहल के माध्यम से, क्वाड साझीदार प्रौद्योगिकी प्रबंधन, नीति, अंतर्राष्ट्रीय बाजार विश्लेषण और आपातकालीन प्रतिक्रिया अभ्यासों में सहयोग के क्षेत्रों की पहचान करने की दिशा में काम करेंगे।

इन तमाम पहलों और अन्य रणनीतिक सहयोगों का विस्तृत विवरण बैठक के बाद जारी किए गए संयुक्त वक्तव्य और फैक्टशीट में दिया गया है। यह बैठक हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता, सुरक्षा और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

महत्वपूर्ण खनिजों को लेकर समझौता

इस दौरान विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने महत्वपूर्ण खनिजों और दुर्लभ मृदाओं के खनन तथा प्रसंस्करण की आपूर्ति को सुरक्षित करने के लिए भारत-अमेरिका द्विपक्षीय रूपरेखा पर हस्ताक्षर किए। डॉ जयशंकर ने इस करार को एक बेहद सामयिक और महत्वपूर्ण कदम बताया और कहा कि यह एक सुदृढ़ और विविधतापूर्ण आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करेगा, साथ ही हमें सहयोग करने, वित्तपोषण जुटाने और महत्वपूर्ण व दुर्लभ खनिजों के प्रभावी प्रबंधन में सहायता प्रदान करेगा।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो का बयान

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने अमेरिका और भारत के बीच रणनीतिक गठबंधन को दोनों देशों के राष्ट्रीय हितों के लिए ज़रूरी बताते हुए कहा कि यह अमेरिका और भारत के बीच सफल रणनीतिक साझेदारी का एक ठोस उदाहरण भी पेश करता है। उन्होंने कहा, “हम दो ऐसे देश हैं जिनके रणनीतिक हित इस बात में हैं कि हमें ज़रूरी खनिजों और आपूर्ति श्रृंखला तक भरोसेमंद और लंबे समय तक पहुँच मिलती रहे, जो हमारी नवान्वेषी अर्थव्यवस्था के लिए बहुत अहम हैं। इसकी नींव 4 फरवरी को रखी गई थी, जब डॉ जयशंकर वाशिंगटन, में आयोजित ‘क्रिटिकल मिनरल्स फोरम’ में शामिल हुए थे। उसके बाद इस काम ने और तेज़ी तब पकड़ी, जब भारत ने ‘पैक्स सिलिका’ पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने कहा कि हम दोनों का एक साझा और रणनीतिक हित इस बात में है कि हमारी जैसी जीवंत नवान्वेषी अर्थव्यवस्था, इन उद्योगों के लिए ज़रूरी बुनियादी चीज़ों को किसी एक ही स्रोत के एकाधिकार के भरोसे नहीं छोड़ सकतीं; ऐसा होने पर हमें ये चीज़ें मिलने से रोका जा सकता है—न सिर्फ़ किसी संघर्ष के समय में, बल्कि एक ऐसे हथियार के तौर पर भी जो हमारे संप्रभु राष्ट्रीय हितों के ख़िलाफ़ इस्तेमाल हो सकता है।”

मार्को रूबियो ने यह भी कहा, “मैं आज बहुत खुश हूँ कि हमारी टीमों ने इस बातचीत से पहले जो काम किया है, उसके परिणामस्वरूप हमारे पास कुछ ऐसे ठोस और हासिल करने लायक नतीजे हैं, जिनकी घोषणा हम अपने-अपने देशों और पूरी दुनिया के सामने कर सकते हैं। समुद्री सुरक्षा के मुद्दे पर, दो बड़ी घोषणाएँ हैं। पहली है ‘हिंद-प्रशांत क्षेत्र समुद्री निगरानी सहयोग पहल’ की शुरुआत; यह पहल हिंद-प्रशांत क्षेत्र में जानकारी साझा करने को बेहतर बनाने के लिए, हममें से हर देश की समुद्री निगरानी क्षमताओं का इस्तेमाल करेगी। इससे ही जुड़ा हुआ है ‘हिंद-प्रशांत क्षेत्र समुद्री जागरूकता पहल’ का विस्तार भी, जो पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र के देशों को लगभग-रीयल-टाइम वाणिज्यिक समुद्री क्षेत्र जागरूकता डेटा उपलब्ध कराता है और आगे भी कराएगा।”

जापान के विदेश मंत्री का बयान

जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी ने कहा, आज, विचारों के खुले आदान-प्रदान के माध्यम से, हम क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर अपनी रणनीतिक सोच को एक-दूसरे के अनुरूप बना पाए, और इस बात पर सहमत हुए कि हम बल या ज़बरदस्ती से यथास्थिति को एकतरफा बदलने के किसी भी प्रयास का कड़ा विरोध करेंगे।” उन्होंने कहा, “हमने महत्वपूर्ण खनिजों और अन्य चीज़ों के निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर भी गहरी चिंता व्यक्त की। हमने उत्तर कोरिया की स्थिति पर चर्चा की, जिसमें परमाणु और मिसाइल संबंधी समस्याएं, तथा साइबर गतिविधियां शामिल थीं तथा हमने उत्तर कोरिया के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया। चूंकि ईरान की स्थिति का हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर, विशेष रूप से ऊर्जा आपूर्ति के दृष्टिकोण से, बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है; इसलिए हमने होर्मुज़ जलडमरूमध्य में स्वतंत्र और सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करने, तथा मध्य-पूर्व में स्थिरता लाने के लिए कूटनीतिक प्रयासों के महत्व की पुष्टि की।”

जापानी विदेश मंत्री ने कहा “हिंद-प्रशांत क्षेत्र में ऊर्जा की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करने की ‘ऊर्जा सुरक्षा पहल’ एक बहुत ही सामयिक और उचित कदम है। हम इस पहल को ‘पावर एशिया’ के साथ जोड़ना चाहेंगे—यह कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद के लिए एक सहयोग ढांचा है, जिसे जापान बढ़ावा दे रहा है।

इसके अतिरिक्त, आज जिस ‘महत्वपूर्ण खनिज पहल फ्रेमवर्क’ की शुरुआत की गई है, वह महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को मज़बूत करने के दृष्टिकोण से एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहल है; और हम इस दिशा में ठोस सहयोग के साथ आगे बढ़ेंगे।”

ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री का बयान

ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग ने क्वाड की बैठकों की सार्थकता को रेखांकित करते हुए कहा , “हमारी जितनी भी बैठकें हुई हैं, उन सभी में हमारा ध्यान गति बनाए रखने और यह सुनिश्चित करने पर रहा है कि हम ऐसे नतीजे दें जो वास्तविक हों। हमारा दायित्व और ज़िम्मेदारी यह है कि हम वास्तविक विकल्प प्रदान करें, खासकर तब जब हमारे क्षेत्र (हिंद-प्रशांत क्षेत्र) में रणनीतिक हालात बिगड़ रहे हैं। यह क्षेत्र गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है… हम जानते हैं कि ईरान द्वारा होर्मुज़ जल डमरूमध्य को बंद करने के हमारे क्षेत्र पर क्या परिणाम होंगे, और हमारी ऊर्जा सुरक्षा के लिए इसका क्या मतलब है।”

पेनी वोंग ने नौवहन की स्वतंत्रता को बहाल करने की दिशा में अमेरिकी विदेश मंत्री रूबियो के कूटनीतिक प्रयासों की सराहना की और कहा, “हम नौवहन की स्वतंत्रता के सिद्धांत को बनाए रखने के महत्व को स्वीकार करते हैं और किसी भी टोल लगाने के प्रस्ताव का विरोध करते हैं। आज क्वाड कई नई पहलें आगे बढ़ा रहा है, जिनमें एक ऊर्जा सुरक्षा पहल भी शामिल है।”

‘क्वाड पोर्ट्स ऑफ़ द फ्यूचर पार्टनरशिप’

उन्होंने कहा, “आज हम ‘क्वाड पोर्ट्स ऑफ़ द फ्यूचर पार्टनरशिप’ के माध्यम से प्रशांत क्षेत्र के प्रति क्वाड की अब तक की सबसे मज़बूत प्रतिबद्धता की भी घोषणा कर रहे हैं, जिसके तहत हम फ़िजी में बंदरगाह के बुनियादी ढांचे के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू कर रहे हैं। इसके अलावा, हम इस बात पर भी ध्यान केंद्रित कर रहे हैं कि हिन्द प्रशांत क्षेत्र में एक पारदर्शी और अधिक सुरक्षित समुद्री क्षेत्र सुनिश्चित करने के लिए हम और क्या कर सकते हैं। हम ‘हिन्द प्रशांत समुद्री निगरानी गठजोड़ पहल’ के माध्यम से, शुरुआत में हिंद महासागर में और ‘मालाबार अभ्यास’ के दौरान अपने समुद्री निगरानी प्रयासों में समन्वय स्थापित करेंगे। हम ‘डोमेन अवेयरनेस इनिशिएटिव’ का विस्तार भी हिंद महासागर तक कर रहे हैं। इससे हमारे साझेदारों को अवैध मछली पकड़ने और तस्करी से निपटने के लिए लगभग-वास्तविक समय का, उपग्रह ट्रैकिंग डेटा उपलब्ध हो सकेगा, और साथ ही हमें मानवीय आपदाओं के समय बेहतर सहायता प्रदान करने में भी मदद मिलेगी। हम धोखाधड़ी के खिलाफ सहयोग को मज़बूत करने के लिए भी मिलकर काम कर रहे हैं, विशेष रूप से दक्षिण-पूर्व एशिया में; इसके तहत हम कानून प्रवर्तन क्षमताओं का निर्माण कर रहे हैं और साइबर सहयोग को और गहरा कर रहे हैं।

Topics: एस जयशंकरक्वाड बैठकक्वाड विदेश मंत्रियों की बैठकमार्क रूबियो
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