प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां करने के मामले में कांग्रेस सांसद और नेता विपक्ष राहुल गांधी की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। उनके खिलाफ इस मामले में रायबरेली में मानहानि का परिवाद दाखिल कराया गया है।
शिकायत किसने की?
प्रगति पुरम इलाके के रहने वाले भाजपा कार्यकर्ता और वकील शकील अहमद खान ने सोमवार को यह परिवाद दायर किया। उन्होंने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी ने 20 मई को डीह क्षेत्र के लोधवारी गांव में एक जनसभा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री शाह के बारे में अभद्र और मानहानिकारक शब्दों का इस्तेमाल किया। पेशे से वकील और भाजपा नेता शकील ने अदालत को बताया कि इन टिप्पणियों से प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की छवि न सिर्फ देश में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रभावित हुई है।
क्या हुआ अदालत में?
न्यायिक मजिस्ट्रेट पंचम अपर सिविल जज (जूनियर डिवीजन) विनयशील ने मामले की सुनवाई की। सुनवाई के बाद अदालत ने अगली तारीख 15 जून तय की है, जब राहुल गांधी का बयान दर्ज किया जाएगा।
राहुल गांधी के खिलाफ परिवाद दर्ज
राहुल गांधी रायबरेली लोकसभा सीट से सांसद हैं। भाजपा कार्यकर्ताओं में उनकी हालिया जनसभा वाली बातों को लेकर काफी नाराजगी है। शकील अहमद खान ने इस मामले में विस्तार से अदालत को जानकारी दी। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि नेता प्रतिपक्ष के इन बयानों से उच्च पदों पर बैठे लोगों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है।
क्या है पूरा मामला
राहुल गांधी रायबरेली के दौरे पर थे। यहीं पर उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर निशाना साधते हुए कहा कि जब आरएसएस वाले आपके सामने आएंगे और प्रधानमंत्री मोदी, अमित शाह की बात करेंगे, तो आप उन्हें सीधे कह दें कि आपका प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और आपकी संस्था देशद्रोही है।
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उन्होंने आरोप लगाया था कि मोदी सरकार ने देश की आर्थिक व्यवस्था बेच दी है। हमेशा की तरह अंबानी और अडाणी का नाम लेकर कहा कि आर्थिक तूफान आने वाला है, जिससे सरकार लोगों की रक्षा नहीं कर पाएगी। वो अलग बात है कि तेलंगाना में कांग्रेस की अगुवाई वाली सरकार है और वहां की सरकार ने भी अडाणी समूह के साथ 2024 में कुल 4 एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए थे। अडाणी समूह ने हजारों करोड़ का निवेश तेलंगाना में किया है। लेकिन राहुल गांधी ये बातें भूल जाते हैं।
राहुल तो यह आरोप लगाने में लगे हैं कि मोदी और शाह ने संविधान पर हमला किया है और देश की संपत्ति तथा संस्थाओं को कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों को सौंप दिया है। उन्होंने डिमोनेटाइजेशन (नोटबंदी) का भी जिक्र किया।
















