देश की राजधानी दिल्ली में सफदरजंग रोड स्थित जिमखाना क्लब को केंद्र सरकार ने 5 जून तक खाली करने का निर्देश दिया है। इस आदेश के साथ ही लुटियंस दिल्ली में हड़कंप सा मच गया है। यह क्लब 27.3 एकड़ में फैला हुआ है। क्लब के एक सदस्य ने सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट में इस आदेश के खिलाफ याचिका दायर की। सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट में मामले का जिक्र किया और तुरंत सुनवाई की मांग रखी। इस मामले में आज जस्टिस अवनीश झिंगन की बेंच इस पर सुनवाई करेगी।
हाई कोर्ट पहुंचा मामला
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस महीने की शुरुआत में क्लब ने ग्राउंड रेंट में हुई भारी बढ़ोतरी का विरोध करते हुए भी हाई कोर्ट का रुख किया था। क्लब का कहना है कि 2023 तक उसका सालाना किराया सिर्फ 409.50 रुपये था। लेकिन यह बढ़कर 4.10 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया और अप्रैल 2026 में इसे और बढ़ाकर 47.59 करोड़ रुपये कर दिया गया। क्लब ने हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स मिनिस्ट्री (MoHUA) के लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिसर (L&DO) द्वारा 2023 से जारी नोटिसों को रद्द करने की मांग की है।
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1927 से चल रही लीज़
क्लब 1927 से इस जगह पर कब्जा रखे हुए है। इसे परपेचुअल लीज़ डीड के तहत दिया गया था। इसमें सालाना किराया 15 रुपये प्रति एकड़ तय किया गया था। इस हिसाब से पूरे 27.3 एकड़ का सालाना किराया 409.50 रुपये बनता है। क्लब ने अपनी याचिका में माना है कि लीज़ डीड के कुछ कंपाउंडेबल उल्लंघन हुए हैं, जिन्हें MoHUA ने रेगुलराइजेशन चार्ज लेकर नियमित किया है।
2023 में हुई किराए में बढ़ोतरी
13 दिसंबर 2023 को L&DO ने पहली बार 90 साल के इतिहास में किराए को रिवाइज किया। इंस्टीट्यूशनल प्रॉपर्टी के मौजूदा रेट के आधार पर 1 अप्रैल 2018 से पिछली तारीख से नया किराया लगाया गया। इसमें 3.176 एकड़ कवर्ड एरिया के लिए 4.09 करोड़ रुपये ग्राउंड रेंट और बाकी 24.124 एकड़ ओपन एरिया के लिए 1.32 लाख रुपये लाइसेंस फीस तय की गई। क्लब के मुताबिक यह पुराने किराए का करीब 10,000 गुना है। क्लब ने कहा कि इस बढ़ोतरी से पहले उसे सुनवाई का मौका नहीं दिया गया।
बढ़ी मांग, ब्याज भी लगाया
11 सितंबर 2025 को MoHUA ने क्लब को नोटिस दिया जिसमें अनधिकृत निर्माण और अतिक्रमण जैसे उल्लंघनों को ठीक करने को कहा गया। अगले दिन 32.88 करोड़ रुपये की मांग की गई। इसमें 1 अप्रैल 2018 से जनवरी 2026 तक का संशोधित ग्राउंड रेंट 32.02 करोड़ रुपये और ब्याज 86.41 लाख रुपये शामिल था। विभाग ने कहा कि उल्लंघनों का अलग से आकलन चल रहा है।
16 अप्रैल को मंत्रालय ने नया नोटिस जारी किया जिसमें कुल मांग 47.59 करोड़ रुपये हो गई। क्लब को पहले एक हफ्ते में भुगतान करने को कहा गया, बाद में 7 मई तक समय बढ़ाया गया। MoHUA ने PNB को दिए गए ऑफिस स्पेस के सबलेटिंग चार्ज के बारे में भी अलग से बताने की बात कही।
कोर्ट में सुनवाई और मीटिंग
5 और 7 मई को क्लब ने हाई कोर्ट का रुख किया। जस्टिस पुरुषेंद्र कौरव ने कहा कि मांग पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ लगता। केंद्र सरकार ने कहा कि क्लब ने सारी जानकारी नहीं दी। कोर्ट ने दोनों पक्षों को L&DO के सामने जॉइंट मीटिंग करने को कहा। 14 मई को क्लब ने कोर्ट को बताया कि आपसी सहमति से सुलझाने की कोशिशें चल रही हैं। इसके बाद सुनवाई 21 जुलाई के लिए टाल दी गई। अब केंद्र के वेकेशन ऑर्डर के खिलाफ नई याचिका पर 26 मई को सुनवाई होगी।











