कॉकरोच जनता पार्टी को लेकर एक दायर एक पीआईएल पर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एस. सूर्य कांत ने एक वकील की भावुक दलीलों को साफ-साफ टाल दिया। उन्होंने याचिकाकर्ता को इस मामले में भावुक नहीं होने की सलाह दी है। याचिका में CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी।
क्या था मामला?
16 मई को CJI सूर्य कांत ने कोर्ट में कुछ लोगों के बारे में ‘कॉकरोच’ शब्द इस्तेमाल किया था। उन्होंने उन लोगों की आलोचना की थी जो बिना लॉ डिग्री के या फर्जी डिग्री लेकर वकील बन जाते हैं। ऐसे ही लोग मीडिया और सोशल मीडिया में भी घुस जाते हैं। CJI ने इन्हें पैरासाइट (परजीवी) बताया था।
इसके बाद कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि CJI ने युवाओं को कॉकरोच कहा है। CJI ने अगले दिन ही स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी युवाओं के खिलाफ नहीं थी। उन्होंने कहा, “मैं युवाओं का सम्मान करता हूं। वे देश के भविष्य हैं।”
PIL में क्या मांग की गई?
वकील एन.के. गोस्वामी ने एक PIL दायर की। इसमें अभिजीत दीपके पर आरोप लगाया गया कि वे CJI की टिप्पणी को तोड़-मरोड़कर सोशल मीडिया पर वायरल कर रहे हैं। दीपके ने ‘Cockroach Janta Party’ नाम से एक सटायरिकल (व्यंग्यात्मक) पार्टी बनाई है। PIL में कहा गया कि यह न्यापालिका को बदनाम करने और CJI की टिप्पणी को राजनीतिक रंग देकर व्यवसायिक तरीके से इस्तेमाल करने की कोशिश है।
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PIL में यह भी बताया गया कि कोर्ट की कार्यवाही अब लाइव होती है। कोर्ट की क्लिप्स को संदर्भ से अलग करके वायरल किया जाता है। आउट्रेज अल्गोरिदम, ट्रोलिंग, मीम्स और मोनेटाइजेशन की वजह से संस्थानों की इज्जत को नुकसान पहुंचता है।
CJI का रुख
CJI सूर्य कांत की बेंच ने PIL को थोड़ी देर सुना। वकील गोस्वामी भावुक होकर दलील दे रहे थे। CJI ने उन्हें बीच में ही रोकते हुए कहा, “इतना भावुक मत हो।” असल में CJI ने पहले भी साफ किया था कि उनकी टिप्पणी सिर्फ फर्जी डिग्री वाले लोगों के लिए थी, जो वकालत, मीडिया या अन्य क्षेत्रों में गलत तरीके से घुस आए हैं।
















