राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार (25 मई) को पद्म पुरस्कार दिए। इस खास मौके पर प्रसिद्ध मार्शल आर्ट गुरु के. पजानिवेल को पांच हजार साल पुराने तमिल मार्शल आर्ट ‘सिलंबम’ में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। अवॉर्ड लेने से पहले 53 वर्षीय पजानिवेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दंडवत प्रणाम किया। उनके इस संस्कार और सादगी भरे वीडियो ने पूरे सोशल मीडिया और देशवासियों का दिल जीत लिया है।
कौन हैं के. पजानिवेल
पजानिवेल का जन्म पुडुचेरी के पूरनंकुप्पम में बेहद साधारण परिवार में 30 जनवरी 1973 को हुआ। 13 साल की उम्र में उनके पिता का निधन हो गया था। उनकी माता ने अकेले ही अपने चार बच्चों का पालन-पोषण किया। उन्होंने छोटी उम्र से ही कठिन परिश्रम करना और मां का हाथ बंटाना शुरू कर दिया था। सातवीं कक्षा के बाद उन्होंने स्कूल छोड़ बस साफ करने का काम शुरू किया। इसके बाद वह बस चालक बन गए, लेकिन मार्शल आर्ट के प्रति उनका जुनून कम नहीं हुआ।
कुछ समय बाद उन्होंने मास्टर राजाराम के मार्गदर्शन में सिलंबम में अपना सफर शुरू किया और विभिन्न महाद्वीपों में इसे लोकप्रिय बनाया। पजानिवेल एक कुशल कलाकार और समर्पित शिक्षक के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया और उसमें जीत दर्ज की। उन्होंने वर्ष 2002 में तिरुचिरापल्ली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय स्तर की सिलंबम प्रतियोगिता में 56-60 किग्रा वर्ग में प्रथम पुरस्कार जीता। वहीं वर्ष 2004 में नागरकोइल में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की सिलंबम प्रतियोगिता में 55-60 किग्रा वर्ग में वह प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किए गए। बताया जाता है कि वह स्कूली बच्चों के लिए निशुल्क ग्रीष्मकालीन शिविर आयोजित करते हैं, ताकि यह पारंपरिक कला आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचती रहे। उनके शिष्यों में यूरोप और ब्राजील के छात्र भी शामिल हैं, जिन्होंने विभिन्न प्रतियोगिताओं में सफलता हासिल की है।
सम्मान मिलने पर पजानिवेल ने कहा?
पद्मश्री सम्मान मिलने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए के. पजानिवेल ने कहा कि वे इस सम्मान को चार दशकों से अधिक समय से तमिल विरासत को दुनिया के सामने लाने के लिए प्रोत्साहन मानते हैं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सरकारी सहयोग से स्कूलों में सिलंबम पढ़ाया जाना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने कहा कि वे वैश्विक स्तर पर सिलंबम को लोकप्रिय बनाने के लिए अपने सभी प्रयास जारी रखेंगे।
कई बड़े अवॉर्ड से हो चुके हैं सम्मानित
के. पजानिवेल को इससे पहले वर्ष 2023 में मार्शल आर्ट्स के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। पुडुचेरी सरकार की ओर से 2012 में उन्हें कलाइमामणि पुरस्कार दिया गया। उन्हें 2004 में नेहरू युवा केंद्र ने सर्वश्रेष्ठ युवा पुरस्कार और 2002 में सिलंबम अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया।
सोशल मीडिया पर यूजर्स ने की जमकर तारीफ
भारत की पारंपरिक मार्शल आर्ट विरासत को बचाने और उसे बढ़ावा देने के लिए सोशल मीडिया यूजर्स ने के. पजानिवेल की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि इनको सम्मानित करना बेहद जरूरी था। एक अन्य यूजर ने भाजपा की सराहना करते हुए कहा कि यह अकेली ऐसी पार्टी है, जो आम लोगों और उनकी मेहनत को पहचानती है। ये पद्मश्री अवॉर्ड पहले ज्यादातर चमचों को ही दिए जाते थे। नरेंद्र मोदी के बाद ये अब आम लोगों को दिए जाते हैं।

















