क्या जनजातीय संस्कृति खतरे में है? क्यों महत्वपूर्ण है जनजाति सांस्कृतिक समागम? - Parakh
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क्या जनजातीय संस्कृति खतरे में है? क्यों महत्वपूर्ण है जनजाति सांस्कृतिक समागम? – Parakh

“जड़ों को बचाइए, संस्कृति को बचाइए।”

Written byPanchjanyaPanchjanya
May 25, 2026, 03:05 pm IST
in भारत

24 मई को दिल्ली के लाल किला मैदान में आयोजित “जनजाति सांस्कृतिक समागम” केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि जनजातीय समाज की पहचान, परंपरा, आस्था और स्वाभिमान का राष्ट्रीय उद्घोष बनकर सामने आया। एक लाख से अधिक लोगों की उपस्थिति, पारंपरिक वेशभूषा, लोकनृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच सबसे बड़ा संदेश था — “जड़ों को बचाइए, संस्कृति को बचाइए।”

Panchjanya के विशेष कार्यक्रम परख में संपादक हितेश शंकर जी ने बात की है-

▪️ जनजातीय समाज की प्रमुख आकांक्षाएं क्या हैं?

▪️ विकास और सांस्कृतिक संरक्षण के बीच संतुलन कैसे बने?

▪️ PESA Act और Forest Rights Act का महत्व क्या है?

▪️ भाषा, परंपरा और पहचान पर क्यों बढ़ रही है चिंता?

▪️ कन्वर्जन, डीलिस्टिंग और संवैधानिक विमर्श का क्या पक्ष है?

क्या भारत अपने जनजातीय समाज की आवाज को पर्याप्त स्थान दे पा रहा है?

देखिए ‘परख’ का यह विशेष विश्लेषण।

Topics: डीलिस्टिंगपारंपरिक वेशभूषासंवैधानिक विमर्शकन्वर्जनसांस्कृतिकजनजातीय समाजलोकनृत्य
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