केदारनाथ धाम में स्वामी विवेकानंद हेल्थ मिशन सोसाइटी अस्पताल का शुभारंभ हुआ है। यह अस्पताल निश्चित ही लाखों लोगों को राहत देने का काम करेगा। बाबा केदारनाथ के दरबार में, लगभग 12 हजार फीट की ऊंचाई पर, देश के विभिन्न प्रांतों से आए अनेक श्रेष्ठ डॉक्टर और उनके सहयोगीगण जिस समर्पण भाव से सेवा कार्य कर रहे हैं, वह अत्यंत प्रशंसनीय है।
यहां एक सुंदर और सुव्यवस्थित अस्पताल स्थापित किया है, जहां लगातार श्रद्धालुओं और यात्रियों का आना-जाना बना रहता है। यहां 10–12 वर्ष के बच्चों से लेकर 80–85 वर्ष तक के वरिष्ठ नागरिक भी आते हैं।
ऐसी ऊंचाई और कठिन परिस्थितियों में यदि कोई व्यक्ति अचानक बीमार पड़ जाए, तो उसके कष्ट को समझते हुए मुंबई, सूरत, कोलकाता और अन्य स्थानों से आए सेवा-भावी लोग उसकी सहायता के लिए तत्पर रहते हैं। उनका उद्देश्य केवल इतना है कि भक्तजनों की सेवा भली-भांति हो जाए। सेवा का यही भाव सबसे बड़ा आनंद है।
जो सुख भौतिक वस्तुओं से मिलता है, वह कुछ क्षणों तक ही रहता है, लेकिन जब हम किसी दुखी व्यक्ति के दुख को दूर करके उसके चेहरे पर प्रसन्नता देखते हैं, तो जो आत्मिक संतोष प्राप्त होता है, वह कहीं अधिक गहरा और अनंत होता है। इसी भावना के साथ यह सेवा-कार्य निरंतर चल रहा है।
यहां सेवा में लगे सभी डॉक्टरों, चिकित्सा-आधारभूत ढांचे से जुड़े सभी सहयोगियों, तथा सहायता करने वाले सभी बंधु-भगिनियों को मैं विनम्रतापूर्वक प्रणाम करता हूं।

यह अस्पताल निश्चित ही लाखों लोगों को राहत देने का काम करेगा। यहां लगे हुए सेवाभावी चिकित्सकों को मेरा प्रणाम, यहां विषम परिस्थितियां हैं। काम करना कठिन है। बावजूद वे डटकर अपना सेवाव्रत निभाने का प्रण लिए हुए हैं। सनातन का यही धर्म है। जहां हम अपने कर्म को धर्म से जोड़ लेते हैं।
नर सेवा, नारायण सेवा का प्रण ले लेते हैं और लग जाते हैं मानव की सेवा करने। मैं इस पूरे संकल्प के पीछे के प्रेरणास्रोत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉक्टर कृष्ण गोपाल जी का अभिनंदन करता हूं जिनके प्रेरणादाई मार्गदर्शन से यह सेवाकार्य गति पा रहा है।
मैं इस मौके पर कहना चाहता हूं कि केदारनाथ में यह केवल चिकित्सालय का शुभारंभ नहीं हुआ है, बल्कि भारतीय संस्कृति में जो सेवा के सूत्र और संस्कार निहित हैं, उसका एक रूप प्रस्तुतीकरण हुआ है। निश्चित ही ऐसे सेवाभावी कार्य संपूर्ण राष्ट्र को एक सूत्र में पिरोने का काम करते हैं।
यह वही कार्य हैं, जो सदियों से हमारी आत्मा में प्रवाहित होते आ रहे हैं। और आज भी हम उन्हीं कार्यों को करने के बाद मन और आत्मा को संतोष की अनुभूति प्राप्त कराते हैं।दूरस्थ और सीमांत क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, चिकित्सा शिविरों का आयोजन, सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों को सहयोग और आपदा की परिस्थितियों में तत्पर सेवा- सोसाइटी के ये सभी प्रयास अत्यंत सराहनीय हैं।
ऐसे कार्य सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास की भावना को बल देते हैं और एक स्वस्थ, मजबूत तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान करते हैं।

















