कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार को सत्ता में आए 3 साल पूरे हो चुके हैं। लेकिन इसके बावजूद पार्टी में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के बीच नेतृत्व को लेकर चल रही खींचतान आज भी जारी है। साथ ही कांग्रेस आलाकमान की लंबी अनिर्णायक स्थिति, कैबिनेट विस्तार और फेरबदल के फैसलों में लगातार हो रही देरी को न केवल सत्तारूढ़ दल के लिए बल्कि कर्नाटक में प्रशासन के लिए भी एक बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि नेतृत्व और सत्ता के बंटवारे (पावर-शेयरिंग) को लेकर बनी इस असमंजस की स्थिति का सीधा असर अब राज्य के प्रशासनिक कामकाज के साथ-साथ पार्टी कार्यकर्ताओं और विधायकों के मनोबल पर भी पड़ने लगा है।
सीएम सिद्धारमैया को दिल्ली का बुलावा
कर्नाटक कांग्रेस के नेतृत्व और प्रस्तावित कैबिनेट फेरबदल को लेकर जारी अटकलों के बीच सीएम सिद्धारमैया को पार्टी आलाकमान ने नई दिल्ली तलब किया है। बताया जा रहा है कि सिद्धारमैया को 26 मई को दिल्ली पहुंचने के लिए कहा आदेश दिया गया है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर इस बैठक का उद्देश्य आगामी राज्यसभा चुनावों को लेकर चर्चा करना बताया जा रहा है।
लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि इस बैठक के दौरान सिर्फ राज्यसभा चुनाव ही नहीं बल्कि कैबिनेट में बड़े फेरबदल, सत्ता के बंटवारे के फॉर्मूले और विधान परिषद (लेजिस्लेटिव काउंसिल) चुनावों के लिए उम्मीदवारों के चयन जैसे बेहद संवेदनशील मुद्दों पर भी बात हो सकती है। इससे पहले कांग्रेस आलाकमान ने संकेत दिए थे कि केरल में सरकार गठन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद वह अपना पूरा ध्यान कर्नाटक के राजनीतिक घटनाक्रम पर केंद्रित करेगा।
डी.के. शिवकुमार के बयान ने बढ़ाई हलचल
इस नए घटनाक्रम ने कर्नाटक कांग्रेस के भीतर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इस बीच उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डी.के. शिवकुमार ने रविवार को कहा कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि कांग्रेस नेतृत्व ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को दिल्ली बुलाया है।
बेंगलुरु के सदाशिवनगर में अपने घर के पास मीडिया से बात करते हुए शिवकुमार ने कहा, ‘मैं अभी-अभी एक बैठक से बाहर आया हूं। मुझे इस मामले के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है।’ जब उनसे पूछा गया कि क्या मुख्यमंत्री को राज्यसभा चुनाव के सिलसिले में बुलाया गया है या राज्य में किसी संभावित नेतृत्व परिवर्तन को लेकर तो शिवकुमार ने सिर्फ इतना ही कहा, ‘मुझे नहीं पता।’
विपक्ष ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को घेरा
सीएम सिद्धारमैया के इस दिल्ली दौरे की खबरों से अटकलों का बाजार गर्म है। कर्नाटक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रभारी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव राधा मोहन दास अग्रवाल ने एक गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे अपने राजनीतिक हितों के लिए मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के बीच मतभेद पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।
उधर डी.के. शिवकुमार जिन्हें मुख्यमंत्री पद का प्रबल दावेदार माना जा रहा है, उन्होंने हाल ही में कहा था कि भगवान लोगों को रास्ता दिखाते हैं लेकिन समर्पण और कड़ी मेहनत के जरिए अपने लक्ष्यों को प्राप्त करना खुद उनकी जिम्मेदारी है। हालांकि, पार्टी के भीतर से इन मतभेदों को दबाने की कोशिशें भी जारी हैं। कर्नाटक के गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने कांग्रेस में किसी भी तरह की गुटबाजी या नेतृत्व की लड़ाई के दावों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पद को लेकर कोई भी निर्णय केवल पार्टी आलाकमान ही लेंगे। साथ ही उन्होंने मीडिया से पूछा कि आखिर नेतृत्व में बदलाव की बात शुरूआत किसने की, उसे इसका जवाब ढूंढना चाहिए।

















