बीते मंगलवार को कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने स्कूलों और कॉलेजों में यूनिफॉर्म से जुड़ा एक पुराना नियम बदल दिया। अब छात्र अपनी यूनिफॉर्म के साथ हिजाब, पगड़ी, जनेऊ या रुद्राक्ष जैसे धार्मिक प्रतीक पहन सकते हैं। इस फैसले पर कर्नाटक के बीजेपी नेता आर. अशोक ने कड़ी आपत्ति जताई है।
आर. अशोक कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता ने इसे हताशा में उठाया गया राज्य सरकार कदम बताया और इसे कांग्रेस की तुष्टिकरण रणनीति करार दिया।
क्यों हुआ विवाद?
दरअसल, बीजेपी के वरिष्ठ नेता आर. अशोक ने कांग्रेस सरकार के इस कदम को दावणगेरे उपचुनाव के परिणामों और अल्पसंख्यक मतदाताओं के बीच बढ़ती नाराजगी का नतीजा बताया है। उन्होंने एक बयान में आरोप लगाया कि कांग्रेस अपनी विफलताओं को छिपाने और अपना वोट बैंक बचाने के लिए राज्य में विभाजनकारी राजनीति का सहारा ले रही है।
आर. अशोक ने कहा, ‘यह फैसला अधिकारों के बारे में नहीं है। यह एक विशेष समुदाय को खुश करने के लिए दी गई एक सोची-समझी राजनीतिक रिश्वत है, जिसने हाल ही में अपनी नाराजगी दिखाई है।’
अपनी नाकामी छुपाना चाहती है सरकार
बीजेपी नेता ने आरोप लगाया कि जब कर्नाटक बढ़ती कीमतों, भ्रष्टाचार, किसानों की आत्महत्या और बिगड़ती कानून-व्यवस्था जैसे गंभीर मुद्दों का सामना कर रहा है तब सरकार का ध्यान केवल राजनीतिक लाभ के लिए धार्मिक मुद्दों पर है। आर. अशोक ने राज्य सरकार की इस बात के लिए भी आलोचना की कि उसने इस मामले में अदालती फैसलों की कथित रूप से अनदेखी की है। उन्होंने साल 2022 के कर्नाटक उच्च न्यायालय के उस फैसले का हवाला दिया जिसमें शिक्षण संस्थानों में निर्धारित ड्रेस कोड को सही ठहराया गया था।
बीजेपी नेता ने कहा, ‘हाईकोर्ट ने साफ तौर से जोर दिया था कि शैक्षणिक संस्थानों को धार्मिक प्रदर्शन के अखाड़े के बजाय अनुशासन और समानता के केंद्र बने रहना चाहिए। कांग्रेस सरकार पिछले अदालत के आदेश को उलट कर न्यायपालिका की अवमानना कर रही है।’
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दिखावे की धर्मनिरपेक्षता
आर. अशोक ने सिद्धारमैया सरकार पर सेलेक्टिव सेकुलरिज्म करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार हिजाब की अनुमति दे रही है वहीं दूसरी तरफ शैक्षणिक संस्थानों में भगवा शॉल का विरोध किया जाता है। उन्होंने पक्षपात का दावा करते हुए कांग्रेस को घेरा और कर्नाटक सरकार की तुलना पश्चिम बंगाल की पिछली सरकार यानी तृणमूल कांग्रेस से की। साथ ही कहा कि इस तरह तुष्टिकरण की राजनीति नहीं चलेगी और यह राज्य के सामाजिक सद्भाव को नुकसान पहुंचा सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि, कांग्रेस कुछ अतिरिक्त वोटों के लिए छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है।
शिक्षाविदों ने जताई चिंता
वहीं राज्य सरकार का तर्क है कि यह कदम छात्रों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने के लिए उठाया गया है ताकि सभी समुदायों के छात्र बिना किसी भेदभाव के शिक्षा प्राप्त कर सकें। इस फैसले ने कर्नाटक में एक नई बहस छेड़ दी है। जहां एक तरफ कांग्रेस समर्थकों और अल्पसंख्यक संगठनों ने इसे स्वागत योग्य कदम बताया है, वहीं बीजेपी ने इसे समाज को बांटने वाला कदम बताया है। आर. अशोक ने कहा कि जनता सरकार के इस रवैये को देख रही है और आने वाले समय में लोग ऐसी राजनीति को खारिज कर देंगे। कुछ जानकारों का मानना है कि कहीं इस तरह ड्रेसकोड में ढील देने से स्कूल में समानता का भाव कम न हो जाए।

















