कन्वर्जन के खिलाफ जनजातीय हुंकार: जानें जनजाति महाकुंभ की 6 बड़ी बातें
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जंगलों पर नहीं होने देंगे कब्जा: लाल किला मैदान से कन्वर्जन पर कड़ा प्रहार, जानें जनजाति सांस्कृतिक समागम की 6 बड़ी बातें

भगवान बिरसा मुंडा के उलगुलान के बाद सबसे बड़े समागम में मतांतरण के षड्यंत्र पर कड़ा प्रहार। जानिए पढ़ें लाल किला मैदान के जनजाति महाकुंभ की सभी बड़ी और प्रामाणिक जानकारी।

Written byShivam DixitShivam Dixit
May 25, 2026, 01:51 am IST
in भारत, संघ @100, धर्म-संस्कृति, दिल्ली, जनजातीय नायक

नई दिल्ली | देश की राजधानी दिल्ली के लाल किला मैदान में रविवार को जनजाति सांस्कृतिक समागम भव्य आयोजन ने जनजातीय गौरव का एक नया अध्याय लिख दिया। भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित इस विशाल ‘जनजातीय महाकुंभ’ में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए। साथ ही कई अन्य मंत्री, सांसद और दिल्ली व छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भी शामिल हुए।

इस जनजाति सांस्कृतिक समागम का मूल उद्देश्य मिशनरियों और अन्य द्वारा किए जा रहे मतांतरण (कन्वर्जन) के खिलाफ सनातन संस्कृति से जुड़ाव और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना था। इस दौरान पूरे समागम में “तू-मैं एक रक्त, वनवासी-ग्रामवासी-नगरवासी” का मूल नारे की गूंज सुनाई देती रही।

Janjati Sanskritik Samagam Red Fort Delhi

उलगुलान के बाद सबसे बड़ी सांस्कृतिक चेतना

गृहमंत्री ने समागम में लाखों की संख्या में उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि यह कोई आम आयोजन नहीं है, बल्कि भगवान बिरसा मुंडा के ‘उलगुलान’ (क्रांति) के बाद देश को सांस्कृतिक रूप से एक सूत्र में पिरोने वाला सबसे बड़ा आंदोलन है।

“मैंने भगवान बिरसा मुंडा को देखा नहीं, लेकिन आज इस महाकुंभ में उपस्थित वनवासी भाइयों की आंखों में उनके संघर्ष की वही चमक और आत्मा जीवंत दिखाई दे रही है। प्रकृति पूजन ही सनातन संस्कृति का मूल आधार है।”

– अमित शाह

मतांतरण के षड्यंत्र पर कड़ा प्रहार

अपने संबोधन में अमित शाह ने मतांतरण (Conversion) के मुद्दे पर कड़ा रुख अख्तियार किया। उन्होंने बिना नाम लिए मतांतरण कराने वालों चेतावनी दी जो जनजातीय समाज को उनकी जड़ों से काटने का प्रयास कर रही हैं।

गृहमंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट कहा कहा- ‘हम अपने जंगलों पर किसी का कब्ज़ा नहीं होने देंगे’ 

Amit Shah Janjati Sanskritik Samagam Red Fort

उन्होंने कहा- संविधान हर व्यक्ति को अपने धर्म के साथ जीने का हक देता है, लेकिन लोभ-लालच की कोई जगह नहीं है। भगवान राम ने शबरी के बेर खाकर यह सिद्ध किया था कि वनवासी और सनातन समाज एक ही रक्त हैं।

शाह ने आह्वान किया कि समाज को उन भ्रांतियों से बचना होगा जो हमारे बीच भेद पैदा कर रही हैं।

कितनी जनजातियों और समूहों ने हिस्सा लिया?

इस ऐतिहासिक समागम में देशभर के 550 से अधिक अलग-अलग जनजातीय समुदायों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। जिनमे मुख्यतः मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, सहित अन्य राज्यों सहित सुदूर अंडमान और निकोबार द्वीप समूह से भी छोटा नागपुरी मूल के 12 जनजाति समूहों के 133 प्रतिनिधियों का विशेष दल भी शामिल रहा।

Janjati Sanskritik Samagam Red Fort

जनजाति सांस्कृतिक समागम में सहभागियों की संख्या

वैसे तो इस पूरे समागम कुंभ जैसा नजारा नजर आ रहा था, जिससे की संख्या का अनुमान लगाना मुश्किल है, लेकिन अगर दिल्ली पुलिस और ट्रैफिक विभाग के आधिकारिक अनुमानों तथा आयोजकों के अनुसार, लाल किला मैदान में 1.5 लाख (डेढ़ लाख) से अधिक जनजातीय भाई-बहन, युवा, सामाजिक कार्यकर्ता और पारंपरिक समुदायों के लोग एकत्र हुए थे।

समागम एकत्रीकरण से पहले निकली जनजाति शोभायात्रा

जनजाति सांस्कृतिक समागम स्थल लाल किला मैदान पहुंचने से पहले दिल्ली की सड़कों पर लगभग 13.3 किलोमीटर लंबे क्षेत्र को समेटती हुई भव्य जनजातीय शोभायात्रा निकाली गईं। जो कि राजघाट चौक, रामलीला मैदान, अजमेरी गेट चौक, कुदसिया बाग (कश्मीरी गेट), और श्यामगिरि मंदिर से होते हुए लाल किला मैदान तक पहुंची। वहीं दिल्ली वासियों से जगह जगह पुष्पवर्षा कर वनवासी भाई बहनों का भव्य स्वागत किया।

जनजातीय सांस्कृतिक समागम में शामिल होतीं जनजातियां

शोभायात्रा और समागम की मुख्य विशेषताएँ

विविधता का महासंगम: शोभायात्रा के दौरान पूरा मार्ग भारत की अनूठी जनजातीय सांस्कृतिक विविधता से सराबोर दिखा। पारंपरिक वेशभूषा, तीर-धनुष, पारंपरिक आभूषण और लोक वाद्यों से लैस हजारों लोक कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति दी।

राजधानी में गूंजा एकता और देशभक्ति का स्वर: पूरी शोभायत्रा के दौरान “भारत माता की जय”, “वंदे मातरम” और “जय जोहार-जय बिरसा” के नारे गूँजते रहे।

अस्मिता की हुंकार (यूसीसी और मतांतरण): इस समागम की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि यह केवल एक उत्सव नहीं था, बल्कि जनजातीय समाज के वनाधिकार, शिक्षा, रोजगार और डी-लिस्टिंग (मतांतरित वनवासियों को आरक्षण की सूची से बाहर करने) जैसे गंभीर मुद्दों पर अपनी आवाज बुलंद करने का एक वैचारिक मंच भी बना।

कार्यक्रम में “तू और मैं एक रक्त हैं” के मंत्र के साथ अमित शाह ने जनजातीय समाज से 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाने के संकल्प में जुड़ने का आह्वान किया।

आवास व्यवस्था: इस आयोजन में देशभर से भाग लेने पहुंचे विभिन्न जनजाति समूहों के लिए दिल्ली के 79 विभिन्न स्थानों पर आवासीय व्यवस्थाएँ की गयी थी।

आयोजक समिति: जनजाति सांस्कृतिक समागम को प्रकाश उईके, महेश भाग चन्दका, अशोक कुमार गोंड के साथ सैकड़ों सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों ने दिन-रात एक कर अपने परिश्रम से इसे भव्य और सफल बनाया ।

Janjati Sanskritik Samagam Red Fort Delhi Shobha yatra

विस्तृत रिपोर्ट –

जनजाति सांस्कृतिक समागम: लाल किले से अमित शाह बोले- ‘उलगुलान’ के बाद यह सबसे बड़ा समागम, वनवासी समाज UCC से रहेगा बाहर

Topics: Tribal Shobha Yatra DelhiJanjatiya Mahakumbh Lal QilaJanjati Sanskritik SamagamAmit Shah Red Fort SpeechBhagwan Birsa Munda 150th AnniversaryConversion in Tribal Society
Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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