नई दिल्ली | दिल्ली के लाल किला मैदान में जनजाति सांस्कृतिक समागम के भव्य आयोजन के मौके पर भारत सरकार के गृहमंत्री अमित शाह ने देशभर से आए लाखों (लगभग 2.5 लाख) जनजातियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि आज का यह विशाल यह समागम जनजातियों के महाकुंभ के नाम से जाना जाएगा।
अपने संबोधन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह भगवान बिरसा मुंडा के बाद सबसे पहला यह जनजातीय आंदोलन है जो पूरे देश को एक करता है। उन्होंने कहा कि यह वर्ष भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती का वर्ष है।

उन्होंने कहा कि “मैंने भगवान बिरसा मुंडा को नहीं देखा, लेकिन आज यहां उपस्थित जनजातियों में उनकी छबि प्रतिबिंबित हो रही है, मैं उनको नमन करता हूं।”
“प्रकृति पूजा ही सनातन संस्कृति का मूल आधार है।” – अमित शाह
भगवान बिरसा मुंडा का उलगुलान और जनजातीय सस्टेनेबल मॉडल
अमित शाह जी ने सतत विकास के मूलाधार को बताते हुए भगवान बिरसा मुंडा के जल, जंगल जमीन को संरक्षित करने के प्रयास को सार्वभौमिक बताया। उन्होंने कहा कि उलगुलान आंदोलन ने अंग्रेज़ों को धूल चटाने का काम किया था और उस वक्त संचार की सुविधा न होने के बावजूद झारखंड से गुजरात तक पूरे भारत में जनजातियों को भगवान बिरसा मुंडा ने यह संदेश पहुंचाया कि हमारा धर्म ही सच्चा धर्म है और हमारे जंगल पर किसी का कब्ज़ा नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि जल, जंगल, जमीन, पहाड़ हमारे वनवासी भाइयों के लिए आस्था का केन्द्र, आजीविका का साधन और उनकी अस्मिता औऱ संस्कृति का संरक्षण करने वाला अभेद्य किला है। आज दुनिया का सबसे बड़ा सस्टेनेबल मॉडल जनजातियों द्वारा बनाया गया मॉडल है।
धर्म की रक्षा और ‘विविधता में एकता’ का मंत्र
अमित शाह ने कहा कि सभी जनजातियों ने किसी लिखित नियम के बिना विविधता में एकता और एकता में विविधता के मंत्र को चरितार्थ करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि हमारे संविधान निर्माताओं ने हर व्यक्ति को अपने मूल धर्म में सम्मान के साथ जीने का अधिकार दिया है। लोभ, लालच और जबरदस्ती कोई किसी का धर्म परिवर्तन नहीं करा सकता। उन्होंने आह्वान किया कि वनवासी अगर ठान लें कि धर्म की रक्षा करने का संकल्प आज यहां लेना है तो यही संकल्प हमें हमारी संस्कृति औऱ देश से जोड़कर रखेगा।

भेदभाव पैदा करने वालों को कड़ा संदेश
अमित शाह ने कहा कि हमारे बीच भेद पैदा करने वाले नहीं जानते कि हज़ारों साल पहले भगवान राम ने शबरी के झूठे बेर खाकर हमें बताया था कि हम सब एक हैं। भेद पैदा करने वाले लोगों के लिए आज का यह सम्मेलन और लाखों की संख्या में उपस्थित जनजातियां बहुत बड़ा संदेश हैं।
UCC पर स्पष्टीकरण: वनवासी समाज के अधिकारों का संरक्षण
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि अब एक षड्यंत्र शुरू हुआ है कि UCC (समान नागरिक संहिता) जनजातियों को उनकी संस्कृति और परंपरा से जीने के अधिकार से वंचित कर देगा। मोदी सरकार के गृह मंत्री के नाते मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि UCC की कोई पाबंदी वनवासी समाज पर नहीं लगेगी और इससे किसी वनवासी के किसी भी अधिकार का अतिक्रमण नहीं होगा। हमने गुजरात और उत्तराखंड में UCC लागू किया है और विशेष प्रावधान कर UCC से सारी जनजातियों को बाहर रखने का काम नरेन्द्र मोदी सरकार ने किया है।
नक्सलवाद का खात्मा और विकास के नए केंद्र
अमित शाह ने कहा कि जिस नक्सली हिंसा ने 40 हज़ार से अधिक जनजातीय जानें ली, मोदी सरकार ने 5 दशक पुराने उस नासूर नक्सलवाद को समाप्त कर दिया है और आज हमारा देश नक्सल समस्या से पूर्ण रूप से मुक्त हो गया है। जो लोग वनवासी समाज का विकास रोककर बैठे थे, उन्हें हम समाप्त कर चुके हैं। नक्सलियों से लड़ने के लिए जहां सुरक्षाबलों के कैंप लगे थे, उनमें से 70 कैंपों को शहीद वीर गुण्डाधुर सेवा डेरा जनसुविधा केन्द्र में बदलने का काम नरेन्द्र मोदी सरकार ने किया है।

बजट में ऐतिहासिक वृद्धि और जनजाति सशक्तिकरण
अमित शाह ने कहा कि अटल जी ने जनजाति कल्याण मंत्रालय बनाकर विकास की शुरूआत की और प्रधानमंत्री मोदी जी ने उसे आगे बढ़ाया है। पिछली सरकार के समय जनजातियों के कल्याण का कुल बजट 28 हज़ार करोड़ रूपए था, जिसे प्रधानमंत्री मोदी जी ने बढ़ाकर 1 लाख 50 हज़ार करोड़ रूपए कर दिया है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने गरीब संथाल परिवार से आई द्रौपदी मुर्मू जी को महामहिम राष्ट्रपति बनाकर समग्र ट्राइबल समाज का मान बढ़ाया है। आज ओडिशा और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में जनजाति समाज के मुख्यमंत्री नेतृत्व कर रहे हैं।
पेसा (PESA) कानून और जमीनी स्तर पर सुविधाएं
उन्होंने कहा कि पेसा [PESA] कानून के लिए भारत सरकार ने एक पेसा सेल बनाया है और इसके नियमों का संथाली, गोंडी, भीली, मुंडारी जैसी अनेक जनजाति भाषाओं में अनुवाद किया है। विकास के लिए अनेक बड़ी योजनाएं, 722 एकलव्य मॉडल स्कूल और हर जनजाति परिवार के लिए मकान, बिजली, नल से जल, 5 लाख रूपए तक का स्वास्थ्य बीमा और मुफ्त राशन देने का काम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने किया है।
विकसित भारत 2047 का संकल्प
अमित शाह ने कहा कि “तू और मैं एक रक्त हैं” – इसी मंत्र के साथ वनवासी कल्याण आश्रम ने मूक सेवक बनकर जनजातीय सेवा का अखंड यज्ञ चलाया है। हमारी संस्कृति, हमारी भूमि, हमारे धर्म को सुरक्षित करने के लिए यह महाकुंभ बहुत बड़ा काम करेगा। हम भ्रांतियों से बचें, भेदभाव करने वालों को पहचानें और एकजुट होकर 2047 में विकसित और समृद्ध भारत बनाने की दिशा में आगे बढ़ें।

जनजातीय सुरक्षा मंच और अन्य वक्ताओं के मुख्य विचार:
- गणेश राम भगत (राष्ट्रीय संयोजक, जनजातीय सुरक्षा मंच) ने कहा कि जनजातियों में मतांतरण (कन्वर्जन) का प्रभाव काफी तेजी से दिखाई पड़ रहा है, जो हमारे समाज के लिए कैंसर है। आज यहां उपस्थित जनजाति समाज एक जनसमुद्र है।
- डॉ राज किशोर हांसदा (राष्ट्रीय सह संयोजक, जनजाति सुरक्षा मंच) ने अपने संबोधन में कहा कि जनजाति समाज के लोग मतांतरण (कन्वर्जन) कभी भी स्वीकार नहीं करेंगे। अगर हम परिवर्तित हो जायेंगे तो हमारी संस्कृति समाप्त हो जाएगी।
- हर्ष चौहान (जनजाति सुरक्षा मंच) ने कहा कि जनजातीय समाज भारत की रक्षा करता है। पूरे भारत में व्याप्त 700 से अधिक जनजातीय समाज ने मिलकर अंग्रेजों से लोहा लिया। वनवासी सनातन धर्म के मूल हैं और जो कहते हैं हमारा कोई धर्म नहीं है हम उनके विरोधी हैं।
- तेची गुबिन ने अपने संबोधन में कहा कि अपने-अपने वनवासी समाज में जो कन्वर्जन हो रहा है उसको तेजी से रोकने की आवश्यकता है। उन्होंने भारत सरकार से मांग कि जो लोग अपना कन्वर्जन कर अपने मूल धर्म को छोड़ चुके हैं वे आरक्षण का दोहरा लाभ न उठा सकें, इसके लिए अनुच्छेद 314 के तहत उनके आरक्षण को समाप्त कर दिया जाए।
- बुधरी ताती ने कहा कि जब-जब हमारी मातृ शक्ति जब जागती है उसे कोई रोक नहीं सकता है। उन्होंने अपने जनजाति समाज के लोगों से आह्वान किया कि वे आगे आएं और साथ मिलकर अपने समाज को सुरक्षित करने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि जो अपने समाज की सुरक्षा आज करता है उनकी आने वाली पीढ़ी सुरक्षित होती है।
भगवान बिरसा मुंडा का संघर्ष और विरासत
जनजातीय आयोग के सलाहकार व पूर्व जज प्रकाश उईके ने कहा कि मिशनरियों के कहने पर बिरसा मुंडा को जेल में डाला गया था। उन्होंने कहा कि जेल में रहते हुए भी भगवान बिरसा मुंडा जब टहलते थे तो उनसे अंग्रेजी हुकूमत खौफ खाती थी।
उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा का संपूर्ण जीवन जल, जंगल, जमीन को बचाने के प्रति समर्पित रहा। यही संघर्ष हमारे संस्कृति को जीवित रखने का कार्य कर रहा है।
वहीं वनवासी कल्याण आश्रम के राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्येंद्र सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि भगवान बिरसा समस्त जनजातियों के भगवान रूपी आदर्श पुरुष हैं। उन्होंने इस जनजाति सांस्कृतिक समागम कार्यक्रम को जनजाति समाज के लिए कुंभ की संज्ञा प्रदान की।
उन्होंने बताया कि बिरसा मुंडा ने अंग्रेजों से संघर्ष किया और वनवासी समाज के कन्वर्जन को रोकने के लिए संघर्ष किया।

आयोजन का विवरण और भव्यता
बता दें कि आज लाल किला पर हुआ यह भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम जिसे जनजाति सांस्कृतिक समागम का नाम दिया गया भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित किया गया।
इस भव्य आयोजन में देशभर के जनजाति समाज की सांस्कृतिक अस्मिता, आस्था और पारंपरिक जीवन मूल्यों की झाँकी बड़े स्तर पर देखने को मिली।
- सहभागिता: जनजाति सांस्कृतिक समागम में देश के विभिन्न राज्यों से लगभग 1.5 लाख प्रतिनिधि शामिल हुए। साथ ही कार्यक्रम में अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह से विशेष प्रतिनिधिमण्डल भी उपस्थित था।
- शोभायात्रा: जनजाति सांस्कृतिक समागम से पहले एक विशाल जनजातीय शोभायात्रा का आयोजन किया गया जो कि राजघाट चौक, रामलीला मैदान, अजमेरी गेट चौक, कुदसिया बाग (कश्मीरी गेट), और श्यामगिरि मंदिर से होते हुए लाल किले के रामलीला ग्राउंड तक पहुंची। जिसका जगह जगह दिल्ली वासियों से पुष्पवर्षा कर स्वागत किया
- आवास व्यवस्था: इस आयोजन में देशभर से भाग लेने पहुंचे विभिन्न जनजाति समूहों के लिए दिल्ली के 79 विभिन्न स्थानों पर आवासीय व्यवस्थाएँ की गयी थी।
- आयोजक समिति: जनजाति सांस्कृतिक समागम को प्रकाश उईके, महेश भाग चन्दका, अशोक कुमार गोंड के साथ सैकड़ों सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों ने दिन-रात एक कर अपने परिश्रम से इसे भव्य और सफल बनाया ।
आयोजक समिति के साथ ही इस आयोजन को सफल एवं सुव्यवस्थित बनाने में दिल्ली पुलिस तथा स्थानीय प्रशासन ने भी भरपूर सहयोग किया।












