कानपुर आईआईटी के नवीनतम शोध में पाया गया है कि मानसिक स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए ‘ध्यान’ सबसे प्रभावी उपाय है. शोध में कहा गया है कि खेलकूद से मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है लेकिन ‘ध्यान’, खेल कूद के मुकाबले कहीं ज्यादा मस्तिष्क को एकाग्र और संतुलित रखने में कारगर है.
शोध में कहा गया है कि जब किसी व्यक्ति द्वारा मेडिटेशन या ध्यान किया जाता है तो उस समय उसका मस्तिष्क पूरी तरह शांत रहता है. ध्यान लगाने पर दिमाग में एक विशेष प्रकार की तरंगे जिसे अल्फाबेट कहा जाता है, उन तरंगों को छोड़ता है. शोधकर्ता का कहना है कि तनाव, मस्तिष्क में निर्णय लेने की क्षमता, स्मरण शक्ति और हानि लाभ के आकलन को किस प्रकार प्रभावित करता है, इस पर अभी अध्ययन किया जा रहा है.
विश्लेषण के लिए तीन श्रेणियां बनाई गईं
आईआईटी के इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर तुषार संधान के मार्गदर्शन में इस अध्ययन में करीब 85 लोगों के अध्ययन को शामिल किया गया है. इस शोध में तुलनात्मक रूप से अध्ययन किया गया है और यह बताया गया है कि इसमें तीन अलग-अलग श्रेणियों के लोगों के मस्तिष्क के सिग्नल का विश्लेषण किया गया है.
पहली श्रेणी उन लोगों की है जो लोग नियमित रूप से ध्यान या मेडिटेशन करते हैं. दूसरी कैटेगरी में उन युवा और छात्रों को रखा गया है जो खेलकूद में सक्रिय रहते हैं और तीसरी कैटेगरी में उन लोगों को शामिल किया गया है जो कभी में मेडिटेशन या किसी भी प्रकार की शारीरिक गतिविधियों में शामिल नहीं होते हैं.
ध्यान का 20 से 40 फीसदी तक असर
प्रोफेसर तुषार संधान का कहना है कि जब इन तीनों श्रेणियों के लोगों का इलेक्ट्रो एनसेफलोग्राम (ईईजी) का तुलनात्मक अध्ययन किया गया तो पाया गया कि मेडिटेशन करने वाले लोगों का मस्तिष्क, खेलकूद में सक्रिय रहने वालों की अपेक्षा कहीं ज्यादा सकारात्मक था. यह पाया गया कि खेलकूद गतिविधियों का तनाव कम करने में 25 से 30 फीसदी तक योगदान है लेकिन ध्यान लगाने वाले लोगों के मष्तिष्क पर इसका असर 20 से 40 फीसदी तक पाया गया है.
उचित निर्णय लेने की क्षमता
अध्ययन में कहा गया है कि जो लोग नियमित रूप से ध्यान लगाते हैं उनके मस्तिष्क में अल्फाबेट सामान्य तौर पर बनी रहती है और इसका सबसे महत्वपूर्ण प्रभाव यह है कि ध्यान लगाने वाला व्यक्ति आम दिनों में सामान्य काम करते समय या दूसरों से बातचीत करते समय भी शांत अवस्था में रहकर के अपना कार्य कर पाता है. ऐसे लोगों का दिमाग शांत तरीके से किसी भी बात पर विचार कर पाता है और किसी विषय पर उचित निर्णय ले पाने में सक्षम होता है.
शोध में मस्तिष्क के अंदर फ्रंटल लोब में अल्फा तरंगों की गतिविधियों की जांच की जा रही है. यह पाया गया है कि किसी प्रकार के सही गलत निर्णय के लिए मस्तिष्क का यही हिस्सा जिम्मेदार होता है. उसके लिए टीम कई आधुनिक उपकरणों का उपयोग कर रही है जिसमें कस्टम 3 डी प्रिंटेड हेडबैंड भी शामिल है. यह काफी लचीले सिलिकॉन इलेक्ट्रोड से बने हुए हैं.यह मस्तिष्क के ईईजी सिग्नल को पकड़ने में सक्षम हैं.
मानव स्वभाव को प्रभावित करती है अल्फाबेट्स
प्रोफेसर तुषार का कहना है तनावग्रस्त व्यक्ति के दोनों कानों में 8 से 12 हर्ट्ज की अलग-अलग फ्रीक्वेंसी वाली बाई न्यूरल बीट्स सुनाने पर अल्फावेब में बढ़ोतरी देखी गई है। इससे उस व्यक्ति का तनाव तुरंत कम हुआ। अल्फाबेट्स व्यक्ति के मूल स्वभाव और उसकी तात्कालिक मानसिक स्थिति दोनों को प्रभावित करती है.

















