छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद से बस्तर में मतांतरण का मुद्दा लगातार चर्चा में रहा है। हाल ही में सूचना का अधिकार (आरटीआई) के जरिए सामने आए आंकड़ों ने इस बहस को और तेज कर दिया है। प्रशासन की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार नवंबर 2000 से फरवरी 2023 तक केवल 364 लोगों ने ही आधिकारिक रूप से अपने मतांतरण की सूचना प्रशासन को दी। वहीं 2023 से 2025 तक किसी भी व्यक्ति ने ऐसी जानकारी नहीं दी।
आंकड़ों ने बढ़ाई बहस
यह आंकड़ा इसलिए चर्चा में है क्योंकि दूसरी ओर बस्तर में चर्च और प्रार्थना केंद्रों की संख्या लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है। कई सामाजिक संगठनों का कहना है कि क्षेत्र में बड़ी संख्या में मतांतरण हुए हैं, लेकिन उनकी जानकारी सरकारी रिकॉर्ड में नहीं है। इसी कारण अब प्रशासनिक आंकड़ों और वास्तविक स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। यह जानकारी सर्व आदिवासी समाज के जगदलपुर जिला अध्यक्ष दशरथ कश्यप ने आरटीआई के माध्यम से प्राप्त की। प्रशासन के अनुसार राज्य गठन के शुरुआती वर्षों में सबसे ज्यादा लोगों ने मतांतरण की सूचना दी थी। अजीत जोगी सरकार के समय 232 लोगों ने जानकारी दी, जबकि भाजपा शासनकाल में यह संख्या 131 रही। वहीं भूपेश बघेल सरकार के दौरान फरवरी 2020 में केवल एक व्यक्ति ने मतांतरण की सूचना दी।
भारत के कई राज्यों में धर्म परिवर्तन को लेकर कानूनी प्रक्रिया तय की गई है। यदि कोई व्यक्ति अपना धर्म बदलता है तो उसे प्रशासन को इसकी सूचना देनी होती है। कई मामलों में शपथ पत्र और जरूरी दस्तावेज भी जमा करने पड़ते हैं। लेकिन बस्तर में सवाल यह उठ रहा है कि क्या सभी लोगों ने यह प्रक्रिया पूरी की या नहीं। प्रशासन ने जानकारी तो दर्ज की, लेकिन आगे जांच कितनी हुई, यह साफ नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में बस्तर और आसपास के इलाकों में मतांतरण को लेकर विवाद भी सामने आए हैं। कई गांवों में आदिवासी समाज और मतांतरित परिवारों के बीच तनाव की स्थिति बनी। नारायणपुर सहित कई जिलों में विरोध और झड़प की घटनाएं भी हुईं। कुछ मामलों में अंतिम संस्कार और दफनाने को लेकर भी विवाद देखने को मिला। सर्व आदिवासी समाज के नेताओं का कहना है कि पंचायत स्तर पर सही आंकड़े जुटाने की जरूरत है। वहीं वनवासी कल्याण आश्रम से जुड़े रामनाथ कश्यप का कहना है कि लगातार हो रहे मतांतरण से आदिवासी संस्कृति प्रभावित हो रही है। उनका मानना है कि धर्म परिवर्तन कर चुके लोगों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए।

















