महाराष्ट्र के नागपुर जिले के कोराडी में स्थित प्रसिद्ध श्री महालक्ष्मी जगदंबा मंदिर में जल्द ही आस्था और भव्यता का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। मंदिर परिसर में बन रही 188 फीट ऊंची भगवान हनुमान की विशाल प्रतिमा अब स्थापना के अंतिम चरण में पहुंच गई है। इस प्रतिमा को देश के प्रसिद्ध मूर्तिकार नरेश कुमावत ने तैयार किया है। बताया जा रहा है कि यह प्रतिमा देश की सबसे ऊंची हनुमान जी की प्रतिमाओं में शामिल होगी। आधुनिक तकनीक और पारंपरिक शिल्पकला के मेल से तैयार की गई यह भव्य प्रतिमा श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगी।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मूर्तिकार नरेश कुमावत ने आकार ले रही हनुमान जी की मूर्ति को साझा करते हुए बुधवार (20 मई) को लिखा, ”आने वाला कोराडी हनुमान जी प्रोजेक्ट महज एक प्रतिमा नहीं है। यह एक पवित्र जनभावना है, जो साकार रूप ले रही है।”
श्रद्धालुओं में भव्य प्रतिमा को लेकर खासा उत्साह
कोराडी का श्री महालक्ष्मी जगदंबा मंदिर पहले से ही विदर्भ क्षेत्र का एक प्रमुख शक्तिपीठ माना जाता है, जहां हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इस विशाल हनुमान प्रतिमा के स्थापित होने से कोराडी देश के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों में नई पहचान बनाएगा। पर्यटन को बढ़ावा मिलने से स्थानीय रोजगार और व्यापार पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। कहा जा रहा है कि प्रतिमा के आसपास आधुनिक सुविधाओं, लाइट एंड साउंड शो, होलोग्राफिक थिएटर और धार्मिक विषय पर आधारित संग्रहालय विकसित किए जा रहे हैं, ताकि श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभव के साथ आधुनिक आकर्षण भी मिल सके। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में इस भव्य प्रतिमा को लेकर काफी उत्साह है। आने वाले वर्षों में यहां लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों के पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है।
30 मई तक निर्माण कार्य होगा पूरा
जुलाई 2023 में निर्माण कार्य शुरू होने के बाद से अब तक हनुमान जी की मूर्ति पर लगभग 6.47 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। पहले इस प्रोजेक्ट को जनवरी 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब इसकी समय सीमा बढ़ाकर 30 मई 2026 कर दी गई है। इसकी नींव और चबूतरे का निर्माण महाराष्ट्र स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी लिमिटेड द्वारा किया गया है, जबकि नागपुर मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (NMRDA) मंदिर परिसर के निर्माण और उसके आसपास के विकास पर कार्य कर रही है।
इन मूर्तियों को कैसे बनाया जाता है?
मूर्तिकार नरेश कुमावत के अनुसार, वह हाईटेक लैब और भट्ठियों से इन मूर्तियों को बनाते हैं। अब तक वह 80 देशों में जाकर मूर्तियां बना चुके हैं। प्रेरणा स्थल, नए संसद भवन के अलावा कनाडा के मिसिसॉगा शहर में स्थित हिंदू हेरिटेज सेंटर में उनके द्वारा बनाई गई भगवान राम की 51 फीट ऊंची मूर्ति और ब्रैम्पटन शहर में भगवान शिव की सबसे ऊंची 54 फुट मूर्ति स्थापित की गई है। अमेरिका के सिएटल में स्थापित स्वामी विवेकानंद की भव्य प्रतिमा का निर्माण भी उन्होंने ही किया है।
मशीनों ने काम किया आसान
नरेश कुमावत इस बारे में पहले भी बता चुके हैं कि उन्होंने अपने स्टूडियो में एक हाईटेक लैब बनाई हुई है, जहां पर 1400 डिग्री सेल्सियस पर मेटल को पिघलाया जाता है। फिर 900 डिग्री सेल्सियस पर मूर्तियां बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाला मोल्ड (एक सांचा होता है), जिसमें मिट्टी, धातु, प्लास्टर या रेजिन जैसे तरल व अर्ध-तरल पदार्थों को डालकर मूर्ति को मनचाहा आकार दिया जाता है। यहां पर कनाडा से लाई गई मशीनें लगी हुई हैं। इन्हीं के जरिए सबसे पहले मूर्ति को सॉफ्टवेयर पर डिजिटल तौर पर बनाया जाता है। फिर उसे सॉफ्ट पदार्थ में कार्विंग का काम भी यहीं पर किया जाता है। इन मशीनों ने उनके काम को बेहद आसान कर दिया है। इसके अलावा उनके पास एक और क्ले स्टूडियो भी है, जहां मिट्टी से मूर्तियां बनाई जाती हैं।

















