पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनने के बाद शुभेंदु अधिकारी सरकार जनसरोकार के निर्णय तेजी से ले रही है। राज्य की जनता को भी भाजपा के लिए मतदान करते समय इतनी तेजी से लिए जाने वाले निर्णयों की उम्मीद नहीं रही होगी। इन्हीं जनसरोकारों और तेजी से लिए जाने वाले कदमों में एक फैसला राज्य में धर्म आधारित आरक्षण की समाप्ति भी है।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने तुष्टिकरण को खत्म करने के लिए एक बड़ा फैसला लेते हुए राज्य में मुसलमानों को मिलने वाला आरक्षण पूरी तरह से समाप्त कर दिया है। पश्चिम बंगाल में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए जो आरक्षण को 17% से घटाकर 7% कर दिया है। इसी में मुसलमानों को भी ओबीसी आरक्षण का लाभ दिया जा रहा था। शुभेंदु अधिकारी की सरकार हाईकोर्ट के वर्ष 2024 के आदेश पर यह फैसला किया है, जिसे ममता बनर्जी सरकार ने लागू ही नहीं किया था। हाईकोर्ट ने फैसला दे दिया था कि इसे आरक्षण को हटाइए मगर ममता बनर्जी की सरकार ने हटाया नहीं था।
इसे भी पढ़ें: केंद्र सरकार ने NEET-UG री-एग्जाम से पहले Meta, Google और Telegram से मांगी मदद
क्या है पूरा मामला
वर्ष 2011 में सत्ता में आने के बाद ममता बनर्जी ने अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण की दो श्रेणियां बनाई थी। एक थी ओबीसी ए और दूसरी थी ओबीसी भी अन्य पिछड़ा वर्ग ए वाली श्रेणी में मुसलमानों के अलग-अलग तबकों को शामिल किया गया था। अब सरकार बदलने के बाद मुस्लिम आरक्षण का 10% कोटा पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है।
पश्चिम बंगाल में अब अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अलावा 66 पिछड़ी हुई हिंदू जातियों को ओबीसी की सूची में रखा गया है। शुभेंदु अधिकारी नीत भाजपा की सरकार ने असली हकदार को ही इस सूची में रखा है। धर्म के नाम पर होने वाला जो तुष्टिकरण था जो वर्षों से चल रहा था उसे समाप्त कर दिया गया है।

















