नई दिल्ली | जम्मू-कश्मीर की राजनीति के सबसे रसूखदार परिवारों में से एक, शेख अब्दुल्ला के भतीजे और अवामी नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता मुज़फ्फर शाह ने एक ऐसा बयान दिया है जिससे जम्मू कश्मीर की सियासत में भूचाल आ सकता है।
मुज़फ्फर शाह ने सीधे तौर पर कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) पर 1986 के अनंतनाग दंगों के दौरान मंदिर जलवाने का गंभीर आरोप लगाया है। मुज़फ्फर शाह ने न केवल आरोप लगाए, बल्कि यह भी दावा किया कि उस समय इन दोनों पार्टियों के दर्जनों कार्यकर्ताओं को रंगे हाथों पकड़ा गया था।
“170 लोग पकड़े गए, जिनमें कांग्रेस और NC के कार्यकर्ता शामिल थे”
फेसबुक पर वायरल एक वीडियो में एक चर्चा के दौरान मुज़फ्फर शाह ने 1986 अनंतनाग के उन दर्दनाक दंगों की परतों को खोलते हुए कहा कि मंदिरों को जलाने की साजिश राजनीतिक थी।
उन्होंने आंकड़ों के साथ दावा करते हुए कहा-
“1986 के अनंतनाग दंगों में कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस ने मंदिर जलवाएं। उस वक्त हमने 170 आदमियों को पकड़ा था। उनमें से लगभग 100 से सवा सौ लोग कांग्रेस के थे और बाकी नेशनल कॉन्फ्रेंस के लोग थे।”
मुज़फ्फर शाह के खुलासे के मुख्य बिंदु:
- राजनीतिक साजिश: 1986 के दंगों को कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस ने हवा दी थी।
- मंदिरों को निशाना बनाया: दंगाई भीड़ ने मंदिरों को आग के हवाले किया, जिसके पीछे सुनियोजित राजनीति थी।
- पकड़े गए कार्यकर्ता: पकड़े गए 170 लोगों में से बहुमत (125 के करीब) कांग्रेस के थे, जबकि शेष फारूक अब्दुल्ला की पार्टी NC के थे।
“मुख्यमंत्री की कुर्सी को मैंने ठोकर मार दी”
अपने राजनीतिक संघर्ष और सिद्धांतों का जिक्र करते हुए मुज़फ्फर शाह ने एक और बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि उनके पास मुख्यमंत्री बनने के कई मौके आए, लेकिन उन्होंने सत्ता के लिए अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया।
मुज़फ्फर शाह ने भावुक होते हुए कहा, “मैं भी कब का मुख्यमंत्री बन गया होता, लेकिन मैंने उसमें (कुर्सी में) ठोकर मार दी।” यह बयान दर्शाता है कि मुज़फ्फर शाह खुद को कश्मीर की उस सत्तावादी राजनीति से अलग दिखाना चाहते हैं, जिस पर अक्सर वंशवाद और तुष्टीकरण के आरोप लगते रहे हैं।
कौन हैं मुज़फ्फर शाह?
जम्मू-कश्मीर की राजनीति में मुज़फ्फर शाह एक बड़ा नाम हैं। उनके राजनीतिक कद को इन बिंदुओं से समझा जा सकता है-
पारिवारिक विरासत: वह जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री जी.एम. शाह (Ghulam Mohammad Shah) के पुत्र हैं। जी.एम. शाह ने ही ‘अवामी नेशनल कॉन्फ्रेंस’ की स्थापना की थी।
शेख अब्दुल्ला से संबंध: मुज़फ्फर शाह, शेर-ए-कश्मीर कहे जाने वाले शेख मोहम्मद अब्दुल्ला के सगे भतीजे हैं।
विशिष्ट पहचान: अब्दुल्ला परिवार से जुड़े होने के बावजूद उनकी पार्टी अवामी नेशनल कॉन्फ्रेंस अक्सर नेशनल कॉन्फ्रेंस की नीतियों की मुखर आलोचक रही है।
सियासी गलियारों में हड़कंप
मुज़फ्फर शाह के बयान के बाद कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के लिए इन आरोपों का जवाब देना मुश्किल हो सकता है, क्योंकि यह दावा उसी परिवार के एक सदस्य ने किया है जो उस दौर की राजनीति का गवाह रहा है।
बता दें कि कश्मीर के इतिहास में 1986 अनंतनाग दंगा वह काला पन्ना हैं, जिसने कश्मीरी पंडितों के पलायन की भूमिका तैयार की थी। वहीं अब मुज़फ्फर शाह का यह स्वीकारोक्ति कि उस समय सत्ताधारी दलों के कार्यकर्ताओं ने मंदिर जलाए थे, उस दौर की ‘छद्म धर्मनिरपेक्षता’ पर बड़े सवाल खड़े करती है।
















